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Gorakhpur news- एक्सक्लूसिव: डीडीयू में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम के लिए अब रखे जाएंगे संविदा पर शिक्षक, जानिए क्या है बड़ी वजह

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में पढ़ाने के लिए नियमों को ही उलट दिया गया है। पढ़ाने के लिए संविदा पर शिक्षक रखे जाने हैं, लेकिन किसी पाठ्यक्रम के लिए नियुक्ति ही नहीं हुई। इसके उलट विशेष परिस्थिति में बुलाए जाने वाले बहुत सारे शिक्षक नियमित गेस्ट फेकल्टी बन गए हैं। अब इनकी कक्षाएं कौन ले रहा है, खुद लिए या किसी और ने, सवाल यह भी है। इन्हीं आशंकाओं को देखते हुए कुलपति ने विधि विभाग में गेस्ट फैकल्टी बने शिक्षकों का भुगतान ही रोक दिया है, जिससे खलबली मची हुई है।

अमर उजाला ने जब इस मामले के तह तक जाने की कोशिश की तो काफी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में अगर कोई बतौर गेस्ट फैकल्टी पढ़ाता है तो एक कक्षा पढ़ाने पर छह सौ रुपये पारिश्रमिक निर्धारित है। बस, क्लास-क्लास का खेल यहीं शुरू होता है। मसलन, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम एमबीए में वाणिज्य विभाग के ही प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर कक्षाएं लेते हैं।

संविदा पर एक भी शिक्षक पूरे साल नहीं रखा गया। विधि विभाग में दो साल पूर्व बीए-एलएलबी का पाठ्यक्रम शुरू हुआ। संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए दस पद स्वीकृत किए गए, लेकिन नियुक्ति की प्रक्रिया फाइलों में ही कैद होकर रह गई। विभाग में तीन प्रोफेसर छह असिस्टेंट प्रोफेसर ही गेस्ट फेकल्टी बनकर कक्षाएं लेते रहे। यही हाल बीजे और बीबीए का भी है।

विधि विभाग में तीन लाख रुपये का भुगतान रुका

सबसे ज्यादा शिक्षकों की जरूरत विधि विभाग में है। विधि के अलावा समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, अंग्रेजी, इतिहास, अर्थशास्त्र की स्नातक की पढ़ाई होती है। इसके लिए तीन प्रोफेसर और सात असिस्टेंट प्रोफेसर को गेस्ट फैकल्टी बनाकर शिक्षण कार्य कराया गया। विधि विभाग के शिक्षकों ने पढ़ाया अलग से। कुलपति ने करीब तीन लाख रुपये का भुगतान रोक दिया है। साथ ही विभागाध्यक्ष से अध्यापन कार्य को सत्यापित करके भेजने को कहा है, ताकि यह पता चल सके कि शिक्षकों ने जब स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में पढ़ाया तो उस वक्त नियमित कक्षाएं उनके नाम पर तो नहीं थी।

 

क्या है नियम

उत्तर प्रदेश शासन की नियमावली के मुताबिक स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में अध्यापक के लिए संविदा पर शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी। विशेष परिस्थितियों में ही नियमित शिक्षक को आमंत्रित शिक्षक के रूप में बुलाया जा सकता है।

 

गोविवि में चल रहे स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम

बीजे, एमबीए, बीबीए, बीसीए, बीए-एलएलबी, एमएसएसी (पर्यावरण विज्ञान, बायोटेक्नालॉजी, माइक्रोबायलोजी, इलेक्ट्रानिक्स, गृहविज्ञान), आपदा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

सप्ताह में निर्धारित कक्षाएं

प्रोफेसर – 14
एसोसिएट प्रोफेसर -16
असिस्टेंट प्रोफेसर-18

गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय के नियमित शिक्षक को अपनी कक्षाएं लेकर कोर्स पूरा कराना है। स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में पढ़ाने को लेकर बहुत भ्रम की स्थिति है। जल्द ही सारी गड़बड़ी ठीक हो जाएगी। यूजीसी की गाइड लाइन के मुताबिक संविदा पर शिक्षक नियुक्त होंगे। पाठ्यक्रम की निगरानी के लिए सेल्फ फाइनेंस कोर्स सेल गठित की गई है। इसमें डायरेक्टर प्रो. शांतनु रस्तोगी को नियुक्त किया गया है। एक डिप्टी डायरेक्टर बाहर से नियुक्त होंगे। यह सेल एक गाइड लाइन बनाएगी, जो सभी पाठ्यक्रम में लागू होंगे। विधि विभाग का भुगतान किया जाएगा, लेकिन उसके लिए अध्यापन कार्य को सत्यापित करके मांगा गया है।

विधि विभाग में तीन लाख रुपये का भुगतान रुका

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