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Gorakhpur news- गोरखपुर विश्वविद्यालय: अब छह सत्रों में होगा नाथपंथ पर मंथन, प्रशासन ने तैयार किया खाका

विस्तार

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की ओर से नाथपंथ के वैश्विक प्रदेय विषय पर होने वाली संगोष्ठी अब छह सत्रों में होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इच्छा के बाद एक सत्र और बढ़ा दिया गया है। 20 से 22 मार्च तक कुल 34 तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जाएगा। विश्व भर के 250 नामवर विद्वान नाथपंथ की महिमा पर मंथन करेंगे।

हाल ही में गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी ने कुलपति से मुलाकात के दौरान नाथपंथ के साहित्य संकलन और अनुवाद की इच्छा जताई थी। जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छठवें सत्र का खाका तैयार किया गया। सत्र का विषय नाथ पंथ और अंतरराष्ट्रीय साहित्य होगा। संगोष्ठी में मॉरीशस, नेपाल, तिब्बत पश्चिम बंगाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान में नाथपंथ के प्रभाव पर 40 विद्वान अपने विचार ऑनलाइन या ऑफलाइन मोड में प्रस्तुत करेंगे।

विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस से प्रो. विनोद मिश्र, नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय से डॉ.श्वेता दीप्ति, हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति प्रो. हरमेंद्र सिंह बेदी, जयपुर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. नंद किशोर पांडेय, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. संजीव कुमार दुबे, बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय हरियाणा के कुलपति प्रो. रामसजन पांडेय का संवाद आकर्षण का केंद्र होगा। इस सत्र में विश्वभर में उपलब्ध नाथ पंथ के साहित्य के संकलन एवं अनुवाद की दिशा में भी काम होगा।

 

ये होंगे मुख्य वक्ता

काशी हिंदू विश्वविद्यालय से प्रो. मनोज कुमार सिंह, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह, जवाहर लाल नेहरू से प्रो. कपिल कपूर, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से प्रो. केके सिंह, रेलिजन वर्ल्ड से डॉ. भव्य श्री, वीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा से डॉ. विवेक प्रकाश सिंह, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विवि से डॉ. चंद्रकांत सिंह, तेजपुर केंद्रीय विवि से प्रो. अनंत कुमार नाथ, पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय शिलांग से प्रो. हितेंद्र मिश्र, असम विश्वविद्यालय से डॉ. सत्यदेव, कल्याणी विश्वविद्यालय के डॉ. हिमांशु आदि।

छठवें सत्र के उप विषय
संगोष्ठी की समन्वयक प्रो. नंदिता सिंह ने बताया कि छठवें सत्र के उपविषय के रूप में भक्ति आंदोलन, नाथ साहित्य और गोरखनाथ, नाथ पंथ और भारतीय संत साहित्य, नाथ पंथ और संस्कृत एवं जनपदीय साहित्य, नेपाल, भूटान एवं अन्य भारतीय प्रायद्वीप में नाथ पंथ, बंगाल एवं पूर्वोत्तर भारत में नाथ पंथ का प्रभाव, नाथ पंथ का अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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