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Gorakhpur news- दवा का खेल: 140 का इंजेक्शन बेच रहे थे 3750 रुपये में, पंचकूला से जुड़े हैं तार

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर पैडलेगंज स्थित न्यू लोटस हॉस्पिटल में इंजेक्शन की सप्लाई करने वाले राजू मेडिकल स्टोर पर एडीएम (वित्त एवं राजस्व) राजेश कुमार सिंह और ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने शनिवार को छापा मारा है। कार्रवाई के दौरान उन्हें 140 रुपये का मेरोपेनेम इंजेक्शन 3750 रुपये में बेचने का साक्ष्य मिला। मामले में ड्रग इंस्पेक्टर की तहरीर पर राजू मेडिकल स्टोर के संचालक अभिषेक शर्मा के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और 419, 420 के तहत चिलुआताल थाने में केस दर्ज किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, 12 मार्च को पैडलेगंज स्थित न्यू लोटस हॉस्पिटल में मेडिकल स्टोर चला रहे फार्मासिस्ट विनय कुमार और अस्पताल कर्मी दीपू कुमार के खिलाफ ड्रग इंस्पेक्टर की तहरीर पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने थोड़ी सख्ती दिखाई तो विभागीय जांच शुरू हुई। फिर जानकारी मिली कि न्यू लोटस हॉस्पिटल के मेडिकल स्टोर की सप्लाई बीआरडी मेडिकल कॉलेज के गेट के सामने स्थित राजू मेडिकल स्टोर से होती है।

प्रशासन की ओर से एडीएम और ड्रग इंस्पेक्टर टीम के साथ राजू मेडिकल स्टोर पहुंचे। जांच शुरू हुई तो पता चला कि मेरोपेनेम इंजेक्शन की कीमत 140 रुपये हैं, जिसे न्यू लोटस हॉस्पिटल में 3750 रुपये का स्टीकर लगाकर दिया जाता था। इसके एवज में न्यू लोटस हॉस्पिटल से 205 रुपये ही लिए जाते थे।

टीम ने मौके से इंजेक्शन, काफी मात्रा में 3750 रुपये का स्टीकर बरामद किया। ड्रग इंस्पेक्टर की तहरीर पर चिलुआताल थाने में राजू मेडिकल स्टोर के संचालक अभिषेक शर्मा के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इस सिलसिले में मेडिकल स्टोर संचालक का पक्ष नहीं मिल सका है। पक्ष मिलते ही प्रकाशित किया जाएगा।  

 

हरियाणा के पंचकूला से मंगवाते हैं इंजेक्शन

मेरोपेनेम इंजेक्शन हरियाणा के पंचकूला से मेडिकल स्टोर संचालक मंगवाता है। खुद की कंपनी बनाकर साल्ट बताकर इंजेक्शन बनाया जाता है। कंपनी बनाने वाले खुद ही एमआरपी भी तय करते हैं। यही वजह है कि मनमाने दामों पर ऐसे इंजेक्शन बेचे जाते हैं। इस खेल में न्यू लोटस हॉस्पिटल का एक डॉक्टर भी शामिल है, जो इस इंजेक्शन को लिखता है।  

हायर ग्रेड की एंटीबॉयोटिक
फिजिशियन डॉ गौरव पांडेय ने बताया कि मेरोपेनेम इंजेक्शन हायर ग्रेड की एंटीबॉयोटिक है। इसका इस्तेमाल संक्रमण को रोकने के लिए किया जाता है। वह भी ज्यादा संक्रमण हो तभी इस इंजेक्शन को दिया जाता है।  

कई ब्रांडेंड कंपनियों के हैं इंजेक्शन
मेरोपेनेम एंटीबॉयोटिक इंजेक्शन है। इसे कई ब्रांडेड कंपनियां बनाती हैं। अलग-अलग कंपनियों के अलग-अलग दाम हैं। दवा विक्रेता समिति के महामंत्री आलोक चौरसिया ने बताया कि अगर ब्रांडेड कंपनी का इंजेक्शन है तो अधिकतम कीमत 500 से 600 के बीच आती है। इससे अधिक दाम के इंजेक्शन नहीं आते हैं।

कुशीनगर वाले मरीज को इंजेक्शन भी नहीं लगाया था
एडीएम वित्त एवं राजस्व राजेश कुमार सिंह ने बताया कि कुशीनगर के जिस मरीज ने न्यू लोटस हॉस्पिटल की शिकायत की थी, उस मरीज को यह इंजेक्शन डॉक्टर ने लिखा था। परिजनों ने इंजेक्शन खरीदा भी, लेकिन इंजेक्शन मरीज को नहीं लगाया गया। खरीदा गया इंजेक्शन फिर से मेडिकल स्टोर में पहुंच गया था।

 

साइबर कैफे से लिया गया सीपीयू कब्जे में

प्रशासन ने स्टीकर बनाने वाले एक साइबर कैफे से सीपीयू भी अपने कब्जे में लिया है। बताया जा रहा है कि सीपीयू में दवाओं के स्टीकर के कई रिकॉर्ड मौजूद हैं। इस काम में मेडिकल स्टोर में काम करने वाला अमन नाम का एक कर्मी शामिल हैं, जो स्टीकर का प्रिंट निकालकर दवाओं पर लगाता था।   

एडीएम वित्त एवं राजस्व राजेश कुमार सिंह ने कहा राजू मेडिकल स्टोर पर छापे के दौरान मेरोपेनेम इंजेक्शन मिला है। इसकी एमआरपी 140 रुपये है। मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन 205 रुपये में न्यू लोटस हॉस्पिटल को दिया जाता था। हॉस्पिटल में इस पर 3750 रुपये का स्टीकर लगाया जाता था, फिर मरीजों को 3750 रुपये में दिया जाता था। इसमें राजू मेडिकल स्टोर के संचालक अभिषेक शर्मा की मिलीभगत की जानकारी मिली है। मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश ड्रग विभाग को दिए गए हैं।

ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने कहा कि राजू मेडिकल स्टोर के संचालक अभिषेक शर्मा के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और 419, 420 के तहत केस दर्ज कराया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जो भी इसमें शामिल होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
 

हरियाणा के पंचकूला से मंगवाते हैं इंजेक्शन

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