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Gorakhpur news- यूपी पंचायत चुनाव 2021: चुनाव जीतने के बाद भी कई प्रत्याशी नहीं ले पाएंगे प्रधानी की शपथ

गोरखपुर जिले की कई ऐसी पंचायतें हैं जहां चुनाव जीतने के बाद भी प्रत्याशी प्रधान पद की शपथ नहीं ले पाएंगे। जिले में ग्राम पंचायत सदस्य के सभी पदों के बराबर नामांकन नहीं होने की दशा में यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इन पंचायतों में चुनाव खत्म होने के छह महीने के भीतर खाली पड़े ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए उपचुनाव होंगे। ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या पूरी होने पर ही नव निर्वाचित प्रधान शपथ ले सकेंगे।

जिले में ग्राम पंचायत सदस्य के 16 हजार 372 पद हैं। दो दिनों के नामांकन में कुल पदों के सापेक्ष 16 हजार 76 प्रत्याशियों ने ही पर्चा भरा। इस तरह करीब 300 पदों के लिए किसी ने दावेदारी नहीं की है। बहुत सी ऐसी भी ग्राम पंचायतें हैं, जहां सदस्य पद की एक सीट के लिए दो-तीन दावेदारों ने नामांकन किया है। ऐसे में खाली पड़ी सीटों की संख्या और बढ़ सकती है।

नियमानुसार ग्राम पंचायतों के गठन के लिए दो तिहाई ग्राम पंचायत सदस्यों का होना जरूरी है। जिले में ग्राम पंचायतों में कहीं ग्राम पंचायत सदस्य के 11 तो कहीं 13 तो कही 15 पद हैं। ऐसे में ग्राम प्रधान को शपथ लेने के लिए दो तिहाई बहुमत के हिसाब से क्रमश: 8, 9 और 10 ग्राम पंचायत सदस्य का निर्वाचित होकर शपथ लेना जरूरी है, तभी ग्राम पंचायत के गठन का कोरम पूरा होगा और नवनिर्वाचित प्रधान शपथ ले पाएंगे।

करीब 100 ग्राम पंचायतों में ऐसी स्थिति बन सकती है जहां प्रधान के लिए संबंधित प्रत्याशी जीत दर्ज कराने के बाद भी शपथ नहीं ले पाएंगे। ऐसी पंचायतों में अगले छह महीने में ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए उपचुनाव होंगे। हालांकि ऐसी स्थिति में प्राय: प्रधान अपने खर्च पर अपने करीबियों को चुनाव में खड़ा कर जरूरी संख्या पूरी करा लेते हैं। बता दें कि जिले में प्रधान के 1294 पद के लिए सर्वाधिक 11,292 प्रत्याशियों ने नामांकन किया है।

 

पंचायत के कामकाज में ग्राम पंचायत सदस्य की भूमिका अहम

ग्राम पंचायत सदस्य चाहें तो वे ग्राम पंचायत के प्रस्ताव से असहमति जता सकते हैं। इससे प्रस्ताव पारित होने में दिक्कत आ सकती है। नियमत: प्रस्ताव पारित न होने पर कोई भी विकास कार्य नहीं हो सकता है। मगर वास्तविकता थोड़ी अलग है। सारी प्रक्रिया कागज पर ही पूरी कर ली जाती है।

पंचायत सदस्य भी जानते हैं कि प्रस्ताव पर उनकी असहमति का कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है, इसलिए वे भी विरोध नहीं करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कोई भी ग्राम पंचायत सदस्य, प्रधान के प्रस्ताव का विरोध करने का प्रयास नहीं करता, क्योंकि ज्यादातर सदस्य प्रधान के करीबी होते हैं।  

डीपीआरओ ने किया था आगाह
नामांकन पत्रों की बिक्री के समय ही डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने सभी एडीओ पंचायत को गांवों के लोगों को आरक्षण की जानकारी देने के निर्देश दिए थे। उनको ग्राम पंचायत सदस्य पद की अहमियत बताते हुए प्रचार-प्रसार कराने को कहा था कि यदि जरूरी सदस्यों की संख्या पूरी नहीं होगी तो संबंधित पंचायत का गठन नहीं हो पाएगा, जिससे गांव का विकास कार्य प्रभावित होगा।

डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने कहा कि दो तिहाई ग्राम पंचायत सदस्य न होने पर संबंधित ग्राम पंचायत का गठन नहीं हो पाएगा। ऐसी पंचायतों में प्रधान पद पर जीत दर्ज करने वाले प्रत्याशी शपथ नहीं ले सकते। इन पंचायतों में ग्राम पंचायत सदस्य के लिए छह महीने के भीतर उपचुनाव कराए जाएंगे। ऐसी कितनी पंचायतें हैं, इनका आकलन किया जा रहा है। दो से तीन दिन में संबंधित पंचायत की जानकारी हो जाएगी।
 

पंचायत के कामकाज में ग्राम पंचायत सदस्य की भूमिका अहम

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