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Lucknow news – उत्तर रेलवे की पहल: चारबाग रेलवे स्टेशन से बंदर भगाएंगे ‘कलंदर’; लंगूरों की आवाज निकालने में माहिर टीम को मिला टेंडर

लंगूर की आवाज निकालकर बंदरों को भगाने का काम करते कलंदर। - Dainik Bhaskar

लंगूर की आवाज निकालकर बंदरों को भगाने का काम करते कलंदर।

किस्मत शाह की टीम को 6 माह के लिए रेलवे विभाग ने काम दियालखनऊ के अलावा अयोध्या, वाराणसी के रेलवे स्टेशन पर भी तैनात किए गए हैं कलंदर

उत्तर रेलवे जोन (लखनऊ) ने चारबाग रेलवे स्टेशन पर बंदरों पर नियंत्रण पाने के लिए हूबहू लंगूरों की आवाज निकालने वाले ‘कलंदरों’ को नियुक्त किया है। इसका काम लखनऊ के तेलीबाग निवासी किस्मत शाह को मिला है। यह उनका पुश्तैनी का काम है। वे बताते हैं कि उनके पास एक विशेष टीम है, जिसको लंगूर की तरीके से आवाज निकालने में महारत हासिल है। उत्तर रेलवे ने इस तरह के काम के लिए लखनऊ, अयोध्या, फैजाबाद और वाराणसी स्टेशनों पर 15000 रुपए प्रतिमाह माह के कॉन्ट्रैक्ट पर 6 महीने के लिए कलंदर रखे हैं।

सुबह सात बजे से देते हैं ड्यूटीकिस्मत शाह बताते हैं कि, उनके अलावा उनके कुछ और साथी हैं, जिनको स्टेशनों पर नौकरी दी गई है। इन्‍हें हर महीने साढ़े 12 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। यह सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक स्‍टेशनों पर ड्यूटी देते हैं। इन सभी की सुबह आने और शाम को जाने पर अटेंडेंस लगती है। वन्‍य जीव अधिनियम के तहत लंगूरों को भी रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि उन्हें कोई परेशानी नहीं हो।

बंदरों के उत्पात से परेशान हो गए हैं लोगलखनऊ, अयोध्या, वाराणसी के रेलवे स्टेशनों पर बंदर ज्यादा उत्पात मचा रहे थे। उनकी वजह से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। वहीं, बंदर अक्सर बिजली के तारों पर करंट लगने की वजह से मर भी जाते थे। शॉर्ट-सर्किट होने की वजह से रेलवे के आवागमन पर भी प्रभाव पड़ता था। इन सारी परेशानियों को देखते हुए रेलवे ने स्टेशनों पर लंगूर रखने का फैसला किया।

कौन हैं किस्मत शाह?लखनऊ के तेलीबाग इलाके के रहने वाले किस्मत शाह बताते हैं कि वे पांच भाई हैं। सभी लोग बंदर को भगाने व अन्य काम में लगे हैं। वे बताते हैं कि उनके चाचा ने 20 साल पहले दिल्ली में बंदरों को भगाने का काम शुरू किया था। तब बंदरों का उत्पात संसद भवन के पास के इलाके में था। तब उनके चाचा वहां गए। उन्हें पहली बार बंदर को भगाने के लिए कहा गया था। उन्होंने लंगूर की आवाज निकालकर उन बंदरों को भगा दिया। इसके बाद से सभी परिवार के लोग बंदरों को पकड़ने से जुड़े काम किया है।

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