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Lucknow News- उपचुनाव के नतीजों ने बढ़ाया सीएम योगी व प्रदेश अध्यक्ष का कद, कोरोना काल के काम बने विपक्ष के लिए सीख

उपचुनाव के नतीजों पर नजर दौड़ाएं तो सीधे समझ में आ सकता है कि भाजपा की लगातार सक्रियता तथा लॉकडाउन के समय वर्चुअल संवाद के माध्यम से लोगों से संपर्क व संवाद का लाभ भी मिला है। साथ ही नतीजों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव का कद भी बढ़ा दिया है।

विपक्ष को यदि 2022 की तैयारी करनी है तो उसे भाजपा की सक्रियता से सीख लेकर आत्मविश्लेषण करना होगा। कारण, जब वह लॉकडाउन के समय हाथ पर हाथ धरे बैठा था तब भाजपा गरीबों की मदद तथा प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए लोगों के बीच थी। इससे भाजपा नेतृत्व लोगों को यह संदेश देने में कामयाब रहा कि उसका लोगों से नाता सिर्फ वोट के लिए नहीं है बल्कि वह सुख-दुख में साथ खड़ी है।

राजनीतिक आर्थिक समीक्षक प्रो. एपी तिवारी कहते हैं कि भाजपा ने जिस तरह प्रवासी मजदूरों के रोजगार की चिंता की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकल पर वोकल का नारा देकर विकास की आपाधापी में खो चुके गांवों के स्थानीय रोजगार के कामों प्रोत्साहित किया। साथ ही इनके लिए आर्थिक मदद का रास्ता खोला, उससे भाजपा लोगों के बीच अपनी पकड़ व पहुंच बढ़ाने में कामयाब रही।

सेवाकार्यों से सरोकार, संपर्क-संवाद से सक्रियता

होली का त्योहार निपटने के बाद कोरोना के कहर से लोगों को बचाने के लिए सरकार ने एक तरफ लॉकडाउन लगाकर लोगों का बाहर निकलना रोका ताकि संक्रमण की चेन तोड़ी जा सके तो इसी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही दिन से यह चिंता करना भी शुरू कर दिया कि लॉकडाउन के कारण लोगों की जिंदगी दुश्वार न होने पाए।

विपक्ष जब सिर्फ भाजपा सरकार पर बयान जारी कर आरोप लगाने में व्यस्त था तब मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार व संगठन का बेहतर समन्वय दिखाकर यह चिंता की कि कोरोना के संकट और लॉकडाउन के चलते किसी गरीब को दो जून की रोटी दुश्वार न होने पाए।

सरकार ने अपनी योजनाओं का मुंह गरीबों की तरफ मोड़ दिया बल्कि संगठन ने भी सेवा ही संगठन का नारा देकर जिस तरह लोगों की दवाई और उनके दो जून की रोटी की चिंता के साथ काम शुरू किया उससे सरकार व भाजपा संगठन लोगों को यह संदेश देने में कामयाब रहा कि विपक्ष की राजनीति सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है।

लॉकडाउन के दौरान किए गए ये काम भी बने उदाहरण

यही नहीं, पैदल आने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए बसों का इंतजाम, उनके लिए भोजन और पानी की व्यवस्था, बाहर पढ़ने वाले छात्रों को लाने के लिए बसों का इंतजाम कर भी लोगों के सरोकारों व संवेदनाओं से जुड़ने में भाजपा कामयाब रही। लोगों की समस्याओं के समाधान को योगी सरकार जिस तरह सक्रिय दिखी, उसका भी फायदा उपचुनाव में भाजपा को मिला।

उधर, भाजपा ने सेवाकार्यों के साथ रणनीति बनाकर जिस तरह पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वर्चुअल संवाद शुरू कर लगातार सक्रियता बनाए रखने की रणनीति अपनाई। साथ ही अलग-अलग मुद्दों पर तथा कार्यकर्ताओं के साथ समाज के अलग-अलग तबकों से वर्चुअल माध्यम से संवाद स्थापित करने के सहारे मीडिया में जगह बनाई उससे भाजपा संगठन व सरकार लोगों के बीच लगातार खुद की उपस्थिति व चर्चा में बनाए रखने में कामयाब रही।

ऊपर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा तो प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह लगातार कार्यकर्ताओं तथा जनता से निरंतर संवाद करते हुए सक्रियता बनाए रखने की कोशिश की उससे वह आम लोगों के सरोकारों के साथ खड़ी दिखी। जिसका लाभ भी उपचुनाव में भाजपा को मिला।

ये तथ्य भी महत्वपूर्ण: सरकार व पार्टी दोनों ने दिखाई सक्रियता

दरअसल, कोरोना और लॉकडाउन के बाद यह पहले उपचुनाव एक तरह से सरकार और विपक्ष की जनता में पकड़ व पहुंच की कसौटी बन गए थे। उसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वतंत्र देव सिंह ने जिस तरह तीन तरह से जिम्मेदारी संभाली। मुख्यमंत्री ने संबंधित क्षेत्रों की जरूरतों को समझकर वहां की जरूरतों को पूरी कराने पर ध्यान दिया। साथ ही संगठन के साथ तालमेल बनाकर वहां के विकास पर फोकस किया।

पार्टी अध्यक्ष ने न सिर्फ संगठनात्मक व्यूह रचना मजबूत बनाकर विपक्ष की चुनौती बढ़ाई तो दूसरी तरफ सवालों के जरिये भी उसे जनता के बीच कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। सरकार ने मुख्तार जैसे माफिया पर कार्रवाई कर जनता को कानून-व्यवस्था पर भरोसा बढ़ाया तो दूसरी तरफ संगठन ने सरकार के इस काम को लोगों के बीच पहुंचाकर उन्हें यह बताने की कोशिश की वह दिन लद गए जब ऐसे चेहरों के आगे सरकारें झुक जाया करती थी।

यही नहीं यह बात भी महत्वपूर्ण है कि ये उपचुनाव संभवत: पहले ऐसे चुनाव थे जिनमें चुनावी रणनीति बनाने से लेकर प्रचार तक का पूरा भार मुख्यमंत्री योगी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव ने अपने कंधों पर उठाया। इसलिए उपचुनाव की जीत भाजपा के लिए जहां बड़ी उपलब्धि है और मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष का कद बढ़ाने वाली है वहीं विपक्ष को यह भी समझाने वाली है कि सिर्फ आरोप लगाने और सरकार की आलोचना करने भर से उन्हें कुछ हासिल होने वाला नहीं है।

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