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Lucknow news- कोरोना की वापसी में स्वास्थ्य विभाग भी नहीं कम जिम्मेदार, बंद कर दिया था माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने से लेकर सैनिटाइजेशन तक का काम

लखनऊ। राजधानी में कोरोना की वापसी के पीछे स्वास्थ्य विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं है। कोरोना का ग्राफ गिरने पर अफसरों ने कंटेनमेंट जोन बनाने से लेकर जांच का काम ठप कर दिया था। सिर्फ कागजी खानापूर्ति ही की जा रही थी। खास ये कि गैर राज्यों से आने वालों की जांच में भी कोताही बरती गई। अब जब फिर से केस बढ़ने लगे तो अफसरों की नींद खुली है और सभी मानकों का फिर से पालन कराने का दावा किया जा रहा है।

राजधानी में बीते साल 15 सितंबर के बाद से कोरोना मरीजों की तादाद कम होने लगी थी। इससे लापरवाह हुए स्वास्थ्य विभाग ने माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने बंद कर दिए। अक्तूबर-नवंबर तक मरीजों का ग्राफ गिरकर महज 200-250 प्रतिदिन रह गया। इसके कुछ दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट पर भी गैर राज्य व विदेश से आने वाले लोगों की जांच बंद कर दी। अब फिर कोरोना का ग्राफ बढ़ने लगा तो सख्ती शुरू की है।

एक केस पर 25 की जांच का आदेश हवा

एक कोरोना मरीज मिलने पर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के आधार पर 25 लोगों की जांच का आदेश था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने ऐसा करने के बजाय जांच का दायरा मरीज के घर तक समेट दिया।

निगरानी समिति भी फेल

मरीज के पॉजिटिव आने पर उसकी निगरानी के लिए मोहल्ला समिति का गठन किया गया था। इसके जरिये मरीज व उसके परिवारीजन की निगरानी की जानी थी। स्वास्थ्य विभाग ने इसे भी बंद करा दिया। होम आईसोलेशन में रहने वाले रोगी के तीमारदार बेफ्रि क होकर बाजार में घूम रहे थे। अफसर कोविड कमांड सेंटर से निगरानी के बजाय हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे।

संक्रमित राज्यों से आए 10 फीसदी की ही जांच

देश के जिन पांच राज्यों में कोरोना ने दोबारा शिकंजा कसा है वहां से आने वाले 10 फीसदी से कम यात्रियों की ही जांच स्वास्थ्य विभाग ने कराई। अफसरों का तर्क था जो भी संदिग्ध रोगी दिखता, सिर्फ उसी की जांच कराई जाती थी। ऐसे में संक्रमित राज्यों से आने वाले यात्रियों ने समुदाय में मिलकर संक्रमण की नई चेन बना दी और अब कोरोना लगातार बढ़ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक संक्रमित राज्यों से रोजाना 14 हजार से अधिक यात्री लखनऊ पहुंच रहे हैं। इनमें 700 से 800 लोगों की जांच की जा रही है। सीएमओ डॉ. संजय भटनागर का तर्क है कि सभी यात्रियों की जांच संभव नहीं है। ऐेसे में जो संदिग्ध दिख्ता है उसी की जांच की जा रही है।

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