Home लखनऊ Lucknow news- तीन पशु चिकित्सालयों को जल्द मिलेंगे नए भवन

Lucknow news- तीन पशु चिकित्सालयों को जल्द मिलेंगे नए भवन

गौरीगंज (अमेठी)। जिले के अलग-अलग विकासखंड में स्थित तीन राजकीय पशु चिकित्सालयों को जल्द ही नए अस्पताल भवन मिलेंगे। निदेशक की मांग व जिला योजना की स्वीकृति के बाद पशुपालन विभाग ने डीपीआर समेत इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। प्रत्येक अस्पताल के निर्माण पर 79.34 लाख रुपये की लागत आएगी। चयनित अस्पताल में पुराने भवन को गिराकर नए अस्पताल भवन के साथ ही कार्यरत स्टाफ के लिए आवास का भी निर्माण होगा।

जिले के तकरीबन सभी पशु चिकित्सालय जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं। भवन जर्जर होने से यहां तैनात चिकित्सक व कर्मचारी या तो बाहर परिसर में बैठकर काम करते हैं या फिर वहां जाने से ही बचना चाहते हैं। इस संबंध में लगातार किए गए पत्राचार के बाद पिछले दिनों निदेशक पशु पालन विभाग ने जिले के पशु पालन विभाग को पत्र भेजकर अस्पताल भवनों के निर्माण को जिला योजना से स्वीकृति दिलाने के बाद डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) समेत प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा था।

निदेशक की मांग पर पहले चरण में चार पशु चिकित्सालयों (संग्रामपुर, भेटुआ व जामो) के नवीन भवन (आवासीय व अनावासीय) के निर्माण को जिला योजना से स्वीकृति दिलाने के बाद पशुपालन विभाग ने प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। पशुपालन विभाग की ओर से भेजे गए डीपीआर को आधार मानें तो प्रति अस्पताल 79.34 लाख रुपये की लागत आएगी।

यह होगा निर्माण
भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार धनावंटन के बाद निर्मित होने वाले अस्पताल भवन में चिकित्साधिकारी कक्ष, फार्मासिस्ट कक्ष, दवा वितरण कक्ष, दवा स्टोर रूम, पशुपालकों के बैठने के लिए हाल, गर्भाधान के लिए जालीदार बैरिकेडिंग व गंभीर रूप से बीमार पशुओं की भर्ती के लिए एक बड़ा हॉल बनाया जाएगा।
बनाए जाएंगे अनावासीय भवन
अस्पताल में तैनात स्टाफ अनिवार्य रूप से परिसर में ही रात्रि निवास करें इसके लिए चिकित्साधिकारी, फार्मासिस्ट व वार्ड ब्वाय के अलावा चौकीदार के लिए श्रेणीवार आवास बनाए जाएंगे। परिसर में बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया जाएगा।
धनावंटन के बाद होगा निर्माण
सीबीओ डॉ. रमेश पाठक ने शासन को प्रस्ताव भेजने की बात स्वीकार की। सीबीओ ने कहा कि चूंकि निदेशालय स्तर से प्रस्ताव मांगा है ऐसे में प्रस्ताव तत्काल मंजूर होने की संभावना है। प्रस्ताव मंजूर होने व धन आवंटित होते ही कार्यदायी संस्था नामित कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

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