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Lucknow news – नोटबंदी के चार साल पर कांग्रेस का विश्वासघात दिवस: प्रमोद तिवारी बोले- मुसोलिनी-हिटलर की कतार में खड़े हैं पीएम मोदी, नोटबंदी के लिए देश से माफी मांगें मोदी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी।

नोटबंदी के चार साल होने पर कांग्रेस ने मनाया विश्वासघात दिवसलखनऊ में पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी ने प्रेस कांफ्रेंस कर पीएम मोदी पर साधा निशाना

नोटबंदी के चार साल होने पर रविवार को कांग्रेस के द्वारा ‘विश्वासघात दिवस’ मनाया गया। इस मौके पर कांग्रेस नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस की। उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि इसे नकारा नहीं जा सकता कि 86.4 प्रतिशत की नोटबंदी इससे पहले तानाशाह गद्दाफी, मुसोलिनी और हिटलर ने की थी। नोटबंदी का फैसला करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी अपने आपको इस कतार में खड़ा कर लिया है। यह मैं नहीं कह रहा हूं इतिहास में दर्ज है।

नोटबंदी के लिए पीएम मोदी को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए

इस दौरान प्रमोद तिवारी ने राज्यसभा में दिए गए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के बयान का उदाहरण दिया। कहा कि नोटबंदी देश की 125 करोड़ जनता की आकांक्षाओं और उनके भविष्य के साथ विश्वासघात व एक संगठित व वैधानिक लूट थी। एक झटके में मोदी ने कुछ पूंजीपति मित्रों और भाजपा को ही फायदा पहुंचाया। मोदी जी ने कहा था कि मेरे देशवासियों मुझे 50 दिन दे दो। बेनामी सम्पत्ति, भ्रष्टाचार, कालाधन, आतंकवाद और नक्सलवाद की पूर्ण समाप्ति के लिए नोटबंदी अति आवश्यक है, आप लोगों को जो पीड़ा और कष्ट इस दौरान झेलना पड़ रहा है, सारी स्थिति इन दिनों में सुधर जाएगी। यदि हालात न सुधरे तो आप जिस चौराहे पर खड़ा करेंगे, मैं खड़ा होकर देश की जनता की सजा स्वीकार करूंगा। तिवारी ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी मोदी जी को याद दिला रही है कि 50 दिन तो छोड़ दीजिए चार साल बीत गए हैं देश की अर्थव्यवस्था रसातल में है, मोदी जी को देश की जनता से नोटबंदी के लिए माफी मांगनी चाहिए।

चार साल में देश में सबसे अधिक आतंकी घटनाएं हुईं

तिवारी ने कहा कि नोटबंदी आतंकवाद, नक्सलवाद के लिए जरुरी बताया गया था। ठीक इसके उलट पुलवामा की घटना हुई। जिसमें हमारे 40 जवान शहीद हो गए। चार साल में देश में सबसे ज्यादा आतंकी घटनाएं हुई है। आज देश 47 सालों में सर्वाधिक बेरोजगारी की स्थिति से गुजर रहा है। हमारी जीडीपी रसातल में पहुंच गयी है। मजदूरों का पलायन जो कोरोना काल में हुआ है, उसकी सबसे बड़ी वजह नोटबंदी ही है। कई प्रदेशों की अर्थव्यवस्था टूट गयी और प्रवासी श्रमिकों को अत्यधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

Input – Bhaskar.com

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