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Lucknow news- मुख्यमंत्री योगी ने किया कन्नौज मेडिकल कॉलेज में बीएसएल थ्री लैब का लोकार्पण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  सोमवार को अपने सरकारी आवास पर कोविड-19 की जांच के लिए कन्नौज मेडिकल कॉलेज में बीएसएल थ्री लैब का लोकार्पण किया वर्चुअल तरीके से किया।  इसके अलावा राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रयागराज में एफेरिसिस फैसिलिटी, राजकीय मेडिकल कॉलेज आगरा व कानपुर में केमिल्यूमिनिसेंस फैसिलिटी, राजकीय मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में एफेरेसिस व केमिल्यूमिनिसेंस फैसिलिटी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय फिरोजाबाद में एफेरेसिस फैसिलिटी व केमिल्यूमिनिसेंस फैसिलिटी की शुरुआत भी की गई।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि प्रदेश सरकार ने अंतर्विभागीय समन्वय से बेहतर कोविड मैनेजमेंट किया है। इसकी सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी की है। 23 मार्च 2020 को प्रदेश की कोविड-19 टेस्टिंग क्षमता मात्र 72 थी। यह इस समय बढक़र 1.75 लाख हो गई है। कोरोना मरीजों के बेहतर इलाज के लिए 1.75 लाख से अधिक कोविड बेड स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं आ जाती है, तब तक सतर्कता और बचाव ही इसका उपचार है। इस मौके पर कोरोना प्लाज्मा दान पर एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि यूपी में सरकारी क्षेत्र की 258 और निजी क्षेत्र की 132 लैब सहित कुल 390 लैब उपलब्ध हैं। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह, चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह व वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

सात निजी मेडिकल कॉलेज में एफेरेसिस सुविधा

मुख्यमंत्री ने सात हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बाराबंकी, इंटीग्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज लखनऊ, रामा मेडिकल कॉलेज एवं रिसर्च इंस्टीट्यूट हापुड़, एफएच मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल फिरोजाबाद, टीएस मिश्रा मेडिकल कॉलेज लखनऊ, हैरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज वाराणसी, मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज मुजफ्फरनगर में बीएसएल-टू लैब व केमिल्यूमिनिसेंस फैसिलिटी की शुरुआत की। मेयो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बाराबंकी में एफेरेसिस फैसिलिटी का शुभारम्भ किया गया।

वरदान है प्लाज्मा एफेरेसिस
कोरोना मरीजों के इलाज एफेरेसिस सुविधा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है। जिसमें कोरोना संक्रमण से ठीक हुए मरीजों के शरीर से प्लाज्मा एफेरेसिस एंटीबॉडी निकालकर गंभीर कोरोना मरीज को चढ़ाया जाता है। इस मशीन से प्लेटलेट्स भी खून से पृथक किया जाता है। इससे डेंगू के मरीजों केा लिए जरूरी प्लेटलेट्स उचित व सुरक्षित रूप से निकाली जाती है। इसे सिंगल डोनर प्लेटलेट भी कहते हैं।

 

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