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Lucknow news – मौत बांटने वाला गांव अब दूर कर रहा अंधियारा: बाराबंकी में अवैध शराब बनाने वाले अब दीये बना रहे, इन्हें दीपोत्सव पर अयोध्या में प्रज्ज्वलित करेंगे सीएम योगी

यह फोटो बाराबंकी है। यहां राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित समूह की महिलाएं दीपोत्सव के लिए दीये तैयार कर रही हैं।

घाघरा नदी की कछार में स्थित है चैनपुरवायहां कभी हर घर में बनती थी शराबअब मधुमक्खी पालन जैसे काम में लगे ग्रामीण

रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाराबंकी जिले में बने दीये को अपने हाथों से प्रज्जवलित करेंगे। यह दीये उस गांव में बन रहे हैं, जहां कुछ दिन पहले तक अवैध शराब बनती थी। लेकिन, पुलिस और जिला प्रशासन के मोटीवेशन व सहयोग से लोगों ने अवैध धंधा छोड़कर एक सम्मानजनक जीवन जीना शुरू कर दिया है। शनिवार को अपर मुख्य सचिव गृह अवस्थी ने भी इस गांव में पहुंचकर लोगों का उत्साह बढ़ाया। अवस्थी ने जिलाधिकारी से कहा है कि वह जितनी मात्रा में दिये दे सकते हैं, वह मुहैया कराएं। इन दीयों को दीपोत्सव में मुख्यमंत्री खुद अपने हाथों से प्रज्जवलित करेंगे।

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महिलाओं द्वारा बनाए गए दीये।

महिलाओं द्वारा बनाए गए दीये।

शराब बनाने के लिए कुख्यात था चैनपुरवा गांव

थाना मोहम्मदपुर खाला का गांव चैनपुरवा, कभी अवैध शराब बनाने के लिए कुख्यात था और पुलिस के डर के साए में ग्रामीणों का जीवन व्यतीत होता था। यह अवैध शराब कभी-कभी लोगों की जान भी ले लेती थी और उनके परिवार के भविष्य में अंधेरे के सिवाय कुछ नहीं बचता था। इसी लिए इस गांव के लोगों को मौत बांटने वाला कहा जाता था। मगर बाराबंकी पुलिस की एक अनोखी पहल ने इनका जीवन ही बदल कर रख दिया और यह जो लोगों के भविष्य में अंधेरा करते थे, वह आज घरों को अपने इको फ्रेंडली दीयों से रोशन करने का काम कर रहे हैं। इन्हें इस काम के लिए प्रेरित किया है बाराबंकी पुलिस ने।

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अब यह सम्मान के साथ अपना जीवनयापन कर रहे हैं। इस काम में सबसे पहले महिलाएं आगे आईं, जो समूह बना कर दिये बनाने का बीड़ा उठाया है। दीपावली में इनके पास पूरे जिले से बड़े आर्डर मिल रहे हैं। इनके उत्साहवर्धन के लिए पुलिस इन्हें आर्डर भी दिलवा रही है और हर सम्भव मदद भी कर रही है।

पुलिस ने शहद उत्पादन की ट्रेनिंग कराई, अब दीये बना रहीं

महिलाओं ने बताया कि उनका यह चैनपुरवा गांव तराई क्षेत्र में है। यहां पास की बहती घाघरा (सरयू) नदी से उनके घर के पुरुष मछलियां पकड़ कर लाते थे और अवैध शराब का निर्माण कर उसका सेवन और बिक्री दोनों करते थे। इस काम में हमेशा पुलिस का डर बना रहता था। इस काम से बचाने के लिए उनका आर्थिक शोषण भी होता था और जिले कहीं अवैध शराब से किसी के मरने की घटनाएं हो गईं तो पुलिस के डर से उन्हें गांव भी छोड़ना पड़ जाता था। उनके घर के पुरुष अक्सर जेल में ही रहकर घुटते रहते थे। क्योंकि उनके पास जमानत कराने की भी व्यवस्था नही होती थी।

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ऐसे में बाराबंकी पुलिस ने उन्हें अच्छे काम के लिए प्रेरित किया और उन्हें शहद उत्पादन और दिए बनाने की पहले ट्रेनिंग करवाई फिर सरकार से आर्थिक सहायता दिलवा कर उनकी जिन्दगी बदल दी। अब उन्हें पुलिस का कोई डर नहीं है, बल्कि पुलिस खुद इसमें उनका सहयोग कर रही है।

जिलाधिकारी ने कहा- यह एसपी की अच्छी सोच का परिणाम

जिलाधिकारी डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि हमारा जनपद अवैध शराब के धंधे से काफी बदनाम हो चुका था और पिछले दिनों यहां बड़ी दुखद घटनाएं भी हो चुकी थी। पुलिस अधीक्षक डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने यहां एक नई सोच डेवलप की और जो गांव चैनपुरवा अवैध शराब के धंधे में लिप्त था, वहां जाकर लोगों से बात की कि वह क्यों ऐसा काम करते है और कौन सा ऐसा काम है जो वह करके इस अवैध काम को छोड़ सकते हैं। इस क्रम में उनसे मधुमक्खी पालन और दीयों के निर्माण का काम शुरू करवाया और इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग भी दिलवाई। आज वहां की महिलाएं समूह बनाकर सम्मानजनक कार्य कर रही हैं और इस काम को आगे बढ़ाने के लिए हम और भी सहयोग करने को तैयार हैं।

Input – Bhaskar.com

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