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Lucknow news- यूपी: मुकुल गोयल के डीजीपी बनने से कई अफसरों के अरमान रह गए अधूरे, विधानसभा चुनाव अब असली चुनौती

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मुकुल गोयल के डीजीपी बनने के बाद कई आईपीएस अफसरों के डीजीपी बनने के अरमान अधूरे रह गए। मुकुल गोयल अगर अपने रिटायरमेंट तक डीजीपी रहे तो कई अधिकारी उनके रिटायर होने से पहले रिटायर हो जाएंगे। मुकुल गोयल का रिटायरमेंट फरवरी 2024 में है।

इससे पहले 1988 बैच के कमल सक्सेना जनवरी 2022 में, 1986 बैच के नासिर कमाल और 1987 बैच के विश्वजीत महापात्रा जुलाई 2022 में रिटायर होंगे। इसी बैच के जीएल मीणा जनवरी 2023 में, आरपी सिंह फरवरी 2023 में, 1988 बैच के डीएस चैहान मार्च 2023 में, अनिल अग्रवाल अप्रैल 2023 में, आरके विश्वकर्मा मई 2023 में रिटायर हो जाएंगे। इसके अलावा विजय कुमार जनवरी 2024 में और आनंद कुमार अप्रैल 2024 में रिटायर होंगे।

ऐसे में अगर मुकुल गोयल अपने रिटायरमेंट तक डीजीपी के पद पर रहते हैं तो आनंद कुमार के लिए भी डीजीपी की रेस में शामिल होना मुश्किल होगा क्योंकि उनके पास रिटायरमेंट में छह माह से कम समय रह जाएगा। संघ लोक सेवा आयोग 6 माह से कम बची हुई सर्विस वाले अधिकारियों के नाम पर विचार ही नहीं करता।

आगामी विधानसभा चुनाव होगा चुनौती

मुकुल गोयल के आगामी विधानसभा ही प्रमुख चुनौती रहेगा। उतर प्रदेश में अभी तक मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच ही माना जा रहा है। मुकुल गोयल समाजवादी पार्टी की सरकारों में अहम पदों पर तैनात रहे हैं। सरकार मुलायम सिंह की रही हो या अखिलेश यादव की। दोनों ही सरकारों में अहम पदों पर तैनात रहे।

2007 में जब मायावती की सरकार बनी तो उससे पहले ही वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे। सपा सरकार बनने के बाद वह केंद्र से सितंबर 2012 में वापस यूपी आए थे। अब देखना दिलचस्प होगा कि पक्ष और विपक्ष के बीच मुकुल गोयल खुद को कितना एडजस्ट कर पाते हैं।

पश्चिमी यूपी के बिगड़े समीकरण को साधने की भी कोशिश

पश्चिमी उतर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले मुकुल गोयल अपने बेहतर नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं। माना जा रहा है कि मुकुल गोयल की तैनाती पश्चिमी उतर प्रदेश में किसान आंदोलन की वजह से हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए की गई है।

2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों के बाद समाजवादी पार्टी की सरकार ने अपर पुलिस महानिदेशक के पद से अरुण कुमार को हटाकर मुकुल गोयल को ही जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि समाजवादी पार्टी को इसका कोई लाभ चुनावों में नहीं मिला था।

आगामी विधानसभा चुनाव होगा चुनौती

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