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Lucknow news- राममंदिर की नींव के लिए जिस तरह की मिट्टी की जरूरत थी खोदाई में अब वह मिट्टी मिलने लगी है

राममंदिर की नींव के लिए जिस तरह की मिट्टी की जरूरत थी खोदाई में अब वह मिट्टी मिलने लगी है। राममंदिर निर्माण के लिए विगत करीब एक माह से नींव खोदाई का कार्य चल रहा है। 35 फीट तक नींव खोदाई का कार्य होने के बाद प्राकृतिक मिट्टी मिलने लगी है। इंजीनियरों का कहना है कि अब राममंदिर की नींव के लिए जिस तरह की मिट्टी की जरूरत है अब वह प्राकृतिक मिट्टी मिलने लगी है।

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि राममंदिर के नींव के लिए आवश्यक प्राकृतिक मिट्टी अब प्राप्त हो रही है। हमने पहले ही उम्मीद जताई थी कि करीब 15 मीटर तक खोदाई किए जाने पर प्राकृतिक मिट्टी मिल जाएगी। राममंदिर सदियों तक सुरक्षित रहे इसलिए देश की आठ नामी तकनीकी एजेंसिया राममंदिर निर्माण के काम में लगी हैं। उन्होंने कहा कि इंजीनियरों ने यह सूचना दी है कि राममंदिर की नींव के लिए प्राकृतिक मिट्टी खोदाई के दौरान निकलने लगी है।

बताया इंजीनियरों ने जो सर्वे किया है उससे यह निष्कर्ष निकला है कि बाढ़ आदि से मंदिर सुरक्षित रहेगा। सर्वे ऑफ इंडिया ने सरयू की बाढ़ का जो मानक तय किया है उसका अधिकतम लेवल 94 मीटर है। सरयू के घाट से रामजन्मभूमि परिसर (जहां राममंदिर बनना है वह स्थान) 105 मीटर ऊपर है। अब भूकंप से सुरक्षा के लिए इंजीनियर प्लान बना रहे हैं। इसके लिए राममंदिर की नींव में पत्थरों की लेयर बिछाई जाएगी। मंदिर को जितना लंबा व चौड़ा बनना है, उतने हिस्से पर ठोस प्लेटफार्म रहेगा। हर दो-दो फीट पर रोल चलाया जाएगा। मंदिर की नींव में किस प्रकार के केमिकल व पदार्थों का प्रयोग करना है इसको लेकर एलएंडटी व टाटा के इंजीनियर अध्ययन कर रहे हैं।

श्रीराम मंदिर के लिए दान में मिल रही चांदी भी अब बड़ी समस्या बन गई है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि अब तक करीब चार कुंतल चादी दान में मिल चुकी है। बार-बार अपील करने के बाद भी लोग चांदी का दान कर रहे हैं, हमारे लिए समस्या यह है कि हम इतनी सारी चांदी रखें कहां। उन्होंने रामभक्तों से फिर अपील किया कि धातु का दान न करें, जो भी दान करना है वह निधि के रूप में करें।

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