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Lucknow news- लखनऊ यूनिवर्सिटी के सितारों ने मंगल तक बिखेरी चमक, पिछले सौ साल के दौरान एक से बढ़कर एक निकलीं विभूतियां

विज्ञान के क्षेत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने कई कीर्तिमान गढ़े हैं। भूगर्भशास्त्र के नाम से नया विषय शुरू करने वाले डॉ. बीरबल साहनी लविवि के शिक्षक थे तो मिशन मंगल की निदेशक डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव यहां की पूर्व छात्रा हैं। इसके साथ ही प्रदेश में पहली बार रेडियो प्रसारण का गौरव भी लविवि के नाम रहा है।

सीमैप और सीडीआरआई के निदेशक भी लविवि के छात्र रह चुके हैं। पिछले सौ साल के दौरान लविवि से विज्ञान के क्षेत्र में एक से बढ़कर एक विभूतियां हुई हैं। लविवि प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव के अनुसार विज्ञान की पढ़ाई में लविवि ने बुलंदियों को छुआ है। इस समय लखनऊ के साथ ही देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों में लखनऊ के पूर्व छात्र विभिन्न पदों पर हैं।

लविवि में वर्ष 1950 में नक्षत्रशाला भी स्थापित हो चुकी थी। उस समय किसी भी शैक्षणिक संस्था में स्थापित होने वाली यह पहली नक्षत्रशाला थी। गणित एवं खगोलविज्ञान विभाग में प्रो. एएन सिंह ने इसकी स्थापना की थी। यह प्रदेश की पहली तथा देश की कुछ चुनिंदा नक्षत्रशालाओं में से एक थी। इसके माध्यम से विद्यार्थी नक्षत्र देखने और उन्हें पहचानने के साथ उनकी सटीक गणना करना भी सीखते थे।

डॉ बीरबल साहनी और डॉ रितु करिथल
– फोटो : अमर उजाला

वर्ष 1985 में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 72वें संस्करण के दौरान यह नक्षत्रशात्रा चालू हालत में थी। लविवि को बांटनी की एक नई विधा पेलियोबॉटनी का अविष्कार करने का श्रेय भी जाता है। विवि के बॉटनी विभाग के पहले विभागाध्यक्ष प्रो. बीरबल साहनी ने इसकी शुरुआत की। इस विधा में जीवाश्म पौधों का अध्ययन किया जाता है।

प्रो. बीरबल साहनी ने सितंबर 1939 में पेलियोबॉटनी समिति का गठन किया। इस समिति के माध्यम से इस क्षेत्र में किये जाने वाले कामों पर शोधपत्रों का प्रकाशन किया गया। इसके बाद सदस्यों ने मिलकर वर्ष 1946 में पेलियोबॉटनी संस्थान की नींव रखी। प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने तीन अप्रैल 1949 को इसके भवन निर्माण की नींव रखी।

ओलंपिक के मैदान तक छाए विवि के खिलाड़ी

डेमो
– फोटो : डेमो

लविवि के मैदान ने हॉकी में केडी सिंह बाबू और सुजीत कुमार समेत आधा दर्जन से ज्यादा ओलंपियन दिए हैं। इसके साथ ही क्रिकेट में सुरेश रैना से लेकर आरपी सिंह और अशोक बाम्बी जैसे खिलाड़ी भी रहे हैं। लविवि एथलेटिक्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नीरज जैन ने बताया कि लविवि में रोइंग के साथ ही टेनिस भी काफी उन्नत अवस्था में था।

हॉकी, क्रिकेट और फुटबाल के साथ ही यहां पर टेनिस काफी लोकप्रिय था। एक समय यहां पर 18 टेनिस ग्राउंड हुआ करते थे। लविवि के ही पूर्व छात्र गौस मोहम्मद खान वर्ष 1939 में विम्बलडन में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे थे। उन्हें वर्ष 1971 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

हॉकी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कुंवर दिग्विजय सिंह, मो. शाहिद, सैयद अली और सुजीत कुमार एथलेटिक्स एसोसिएशन से जुड़े रहे। लविवि ग्राउंड पर भारत पाकिस्तान के बीच एक क्रिकेट मैच भी हो चुका है। लविवि से इसके साथ ही कुश्ती और ताइक्वांडो के भी कई बड़े खिलाड़ी हो चुके हैं।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष समेत प्रशासनिक अधिकारियों की नर्सरी भी रहा विवि
लविवि ने देश को शानदार आईएएस अधिकारी दिए हैं। इन अधिकारियों ने अपनी प्रशासनिक क्षमता से देश के शीर्ष पदों पर स्थान बनाया है। इन अधिकारियों में आज की तारीख में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार का नाम शामिल है। इसी तरह पूर्व डीजीपी अतुल समेत पूरे देश भर में सैकड़ों की संख्या में तैनात प्रशासनिक अधिकारी लविवि की भूमि से ही निकले हैं।

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