HomeलखनऊLucknow news- लविवि : इंटीग्रेटेड पीएचडी शुरू करने की तैयारी, विवि प्रशासन...

Lucknow news- लविवि : इंटीग्रेटेड पीएचडी शुरू करने की तैयारी, विवि प्रशासन ने यूजीसी को भेजा प्रस्ताव

लखनऊ। परास्नातक में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) को प्रभावी बनाने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय जल्द ही विद्यार्थियों को इंटीग्रेटेड पीएचडी की सुविधा देने की तैयारी कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसका विस्तृत प्रस्ताव बनाकर यूजीसी को भेजा है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद इसे प्रभावी बनाया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार इंटीग्रेटेड पीएचडी चार साल की होगी। इसमें विद्यार्थी को विकल्प दिया जाएगा कि वह चाहे तो दो साल में पीजी की डिग्री लेकर एग्जिट कर सकेगा। जबकि आगे इसे नियमित करने पर वह पीएचडी पूरी कर सकेगा। इसमें तीन साल तक कोर्स से जुड़ी पढ़ाई होगी जबकि आखिरी साल इंडस्ट्री विजिट व अन्य चीजें शामिल की जाएंगी। बता दें कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसी सत्र से पार्ट टाइम पीएचडी की भी शुरुआत की है, जिसमें नौकरी पेशा लोगों को पीएचडी करने का अवसर दिया जा रहा है। इसके लिए ऑनलाइन प्रवेश आवेदन भी शुरू हो गए हैं। कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने बताया कि इंटीग्रेटेड पीएचडी का प्रस्ताव यूजीसी को भेजा गया है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद इसे प्रभावी बनाया जाएगा। यह अपने तरह का बिल्कुल अलग और देश में पहला प्रयोग होगा। हम एनईपी को हर स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।

लविवि : एमबीए कोर्स शुरू करने पर छिड़ा विवाद

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में नया एमबीए कोर्स शुरू करने को लेकर विवाद छिड़ गया है। हाल में विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग द्वारा अपनी बोर्ड ऑफ स्टडीज से स्व वित्तपोषित मोड में एमबीए इन फाइनेंस एंड अकाउंट कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव पास किया, जिसमें 40 सीटें प्रस्तावित की गई थी। किंतु जब वह फेकल्टी बोर्ड में गया तो उसका विरोध हो गया।

मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभागाध्यक्ष प्रो. संजय मेधावी ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि जब इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज और लुंबा के तहत मैनेजमेंट के कोर्स पहले से संचालित किए जा रहे हैं तो फिर नए विभाग में मैनेजमेंट का कोर्स चलाने का क्या औचित्य है? आईएमएस में आधा दर्जन एमबीए कोर्स चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में इसे लेकर अंब्रेला इंस्टीट्यूट की व्यवस्था पहले से की गई है। पूर्व में इंजीनियरिंग विभाग में एमबीए का एक कोर्स चलाया गया था, जिसे विवि ने यही कहते हुए बंद किया था कि जब इसके लिए केंद्रीयकृत व्यवस्था है तो फिर इसकी क्या जरूरत है। रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि प्रो. मेधावी की आपत्ति मिली है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसका परीक्षण कराकर उचित निर्णय लेगा।

Most Popular