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Lucknow news- लिक्विड ऑक्सीजन ही नहीं तो कैसे भरें सिलेंडर, दूसरे राज्यों से आपूर्ति में कमी

लखनऊ। राजधानी के औद्योगिक क्षेत्र स्थित ऑक्सीजन बाटलिंग यूनिट में लिक्विड ऑक्सीजन का बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है। यही वजह है कि कॉमर्शियल उपयोग पर प्रतिबंध लगने के बाद भी कोरोना मरीजों को जीवन देने वाला ऑक्सीजन गैस का सिलेंडर नहीं भर पा रहा है।

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन लखनऊ डिवीजन के चेयरमैन सूर्य प्रकाश हवेलिया ने बताया कि राजधानी के छह बॉटलिंग यूनिट को छत्तीसगढ़, राउरकेला, मोदीनगर, काशीपुर आदि से लिक्विड ऑक्सीजन टैंकर के जरिए सप्लाई होता है। मगर, कुछ दिनों से इसकी सप्लाई में कमी हो गई है। इसके चलते उद्यमी गैस सिलेंडर नहीं भर पा रहे हैं।

संकट की एक वजह ये भी : जरूरत न होने पर भी सिलेंडर खरीदकर घर में रख रहे

तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमी दिनेश गोस्वामी कहते हैं कि ऑक्सीजन गैस सिलेंडर के संकट की एक वजह ये भी है कि जिनको जरूरत नहीं हैं वह भी खरीद कर घर में रख रहे हैं। इससे जरूरतमंदों को ऑक्सीजन गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। दरअसल जो आम आदमी गैस सिलेंडर खरीद कर घर ले गया उसने गैस का इस्तेमाल नहीं किया, जिससे सिलेंडर भी फंस गया। इससे भी अस्पताल में मरीजों को ऑक्सीजन गैस नहीं मिल पा रही है।

रोजाना 1200 छोटे-बड़े भरते हैं गैस सिलेंडर

नादरगंज स्थित मुरारी गैस प्लांट में ऑक्सीजन लिक्विड का प्रोडक्शन कर सिलेंडर भरे जाते हैं। उद्यमी अजय मिश्रा ने बताया कि वह रोजाना अथक प्रयास करने के बाद भी लगभग 1200 ऑक्सीजन गैस सिलेंडर भर कर सप्लाई कर रहे है। इनमें छोटे और बड़े सिलेंडर शामिल हैं। छोटे सिलेंडर में लगभग डेढ़ क्यूबिक गैस और बड़े सिलेंडर में लगभग सात क्यूबिक ऑक्सीजन गैस भरी रहती है।

साउथ इंडिया को ट्रांसफर हो रहा लिक्विड

राजधानी के एक उद्यमी ने बताया कि ऑक्सीजन गैस के सिलेंडर भरने के लिए लिक्विड को वह छत्तीसगढ़ और राउरकेला से मंगाते थे। एक पखवारे से यहां से आने वाली ऑक्सीजन की लिक्विड साउथ इंडिया की ओर ट्रांसफर हो गई है। इसके चलते बॉटलिंग प्लांट में गैस सिलेंडर नहीं भर पा रहे हैं।

बड़े स्टील प्लांट में कम करें खपत

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन लखनऊ चैप्टर के अध्यक्ष अवधेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि ऑक्सीजन गैस की सर्वाधिक खपत स्टील के बड़े प्लांट में होती है जो दूसरे राज्यों में स्थित हैं। उनका कहना है लखनऊ के जितने सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल और औद्योगिक इकाइयों में ऑक्सीजन की खपत एक दिन में होती है उतनी खपत बड़े स्टील प्लांट में दो घंटे में हो जाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे बड़े स्टील प्लांट की ऑक्सीजन खपत को कम करके कोरोना से जूझ रहे महानगरों को मुहैया कराई जाए।

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