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Lucknow news – विवादित MLA पर बड़ा फैसला: पंजाब मंगलवार को करेगा मुख्‍तार अंसारी को UP पुलिस के हवाले, देर रात आ रही टीम, सेहत ठीक नहीं होनेे के चलते 4 डॉक्टर्स भी आ रहे साथ

उत्तर प्रदेश के विवादित विधायक मुख्तार अंसारी को लेकर मोहाली कोर्ट में पहुंची पंजाब पुलिस। -फाइल फोटो

उत्‍तर प्रदेश के विवादित मुख्तार अंसारी को मंगलवार को वहां की पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश की पुलिस ने पंजाब के गृह विभाग को अंसारी को शिफ्ट करने संबंधी जानकारी दे दी है और अब बांदा से पुलिस की एक टीम पंजाब के रोपड़ के लिए रवाना हो चुकी है। संभावना है कि देर रात तक यह अीम यहां पहुंच जाएगी।इसकी पुष्टि करते हुए ADGP जेल PK सिन्हा ने बताया कि देर रात तक UP पुलिस पंजाब आ रही है। ऐसे में शिफ्टिंग की प्रक्रिया मंगलवार सुबह ही पूरी हो पाएगी। दूसरी ओर, पंजाब के जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा था कि यदि UP पुलिस की टीम शाम छह बजे से पहले रोपड़ जेल पहुंच जाती है तो मुख्‍तार अंसारी को आज ली सौंप दिया जाएगा, पर ऐसा नहीं हो सका।

मिली जानकारी के अनुसार मुख्तार अंसारी को बांदा शिफ्ट किए जाने को लेकर UP पुलिस सारे सुरक्षा प्रक्रिया पर भी ध्यान दे रही है। पुलिस की एक पार्टी रविवार देर रात ही रोपड़ पहुंच चुकी थी। वह सोमवार को दिन भर जेल के आसपास चक्कर लगाती रही है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अंसारी को उत्तर प्रदेश के बांदा जेल में शिफ्ट किया जाना है। ऐसे में अंसारी की सुरक्षा को लेकर भी पूरी तैयारी चल रही है और यही कारण है भारी लाव-लश्कर के साथ UP पुलिस पंजाब पहुंच रही है। अंसारी की सेहत ठीक नहीं होने के कारण UP पुलिस 4 डॉक्टरों को भी साथ ला रही है।

इसको लेकर दिन में एक साक्षात्कार में जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा था कि पंजाब सरकार के लिए मुख्तार अंसारी और जेल में बंद बाकी आरोपी एक बराबर हैं। अगर शाम 6 बजे जेल में बंदी हो गई और उसके बाद उतर प्रदेश की पुलिस टीम पहुंची तो उसे अंसारी बिलकुल नहीं सौंपा जाएगा। अगर छह बजे से पहले टीम पहुंची तो एक सेकंड में मुख्तार अंसारी सौंप दिया जाएगा।

वहीं पंजाब के ADGP जेल PK सिन्हा ने कहा कि सूर्यास्त के बाद कैदी को सुपुर्द नहीं किया जाता है। ऐसे में अंसारी की सुपुर्दगी भी मंगलवार को ही होगी। असल में जेल मैनुअल के तहत सूर्यास्त के बाद न तो कोई नया कैदी जेल में आ सकता है और न ही किसी कैदी की शिफ्टिंग प्रक्रिया को किया जा सकता है। वहीं, हाईप्रोफाइल हो चुके इस मामले को देखते हुए अंसारी को भारी सुरक्षा के बीच यूपी की बांदा जेल में शिफ्ट किया जाएगा। माना यह भी जा रहा है कि रास्ते में कोई गड़ब़ड़ी न हो इसके लिए अंसारी को बीच-बीच में दूसरी गाडि़यों में भी शिफ्ट किया जा सकता है।

मुख्तार अंसारी को क्यों लाया गया था पंजाब?दरअसल, 8 जनवरी 2019 को मोहाली के एक बड़े बिल्डर की शिकायत पर वहां की पुलिस ने अंसारी के खिलाफ 10 करोड़ की फिरौती मांगने का केस दर्ज किया था। 12 जनवरी को प्रोडक्शन वारंट हासिल करने के लिए पुलिस कोर्ट पहुंची। 21 जनवरी 2019 को मोहाली पुलिस मुख्तार अंसारी को प्रोडक्शन वारंट पर उत्तर प्रदेश से मोहाली ले आई। 22 जनवरी को कोर्ट ने उसे एक दिन की रिमांड पर भेज दिया। 24 जनवरी को उसे न्यायिक हिरासत में रोपड़ जेल भेज दिया गया।

BJP विधायक की पत्नी ने प्रियंका गांधी से गुहार लगाई थीगाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से BJP विधायक अलका राय ने इस संबंध में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को तीन बार चिट्ठी लिखी है। इसमें अलका का सवाल है कि मुख्तार जैसे अपराधी को पंजाब सरकार क्यों बचा रही है, प्रियंका जी अंसारी को सजा दिलाने में मदद करें। दरअसल, अलका के पति पूर्व विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप मुख्तार अंसारी पर है। हालांकि इस केस में कोर्ट मुख्तार को बरी कर चुकी है।

8 बार लौटी UP पुलिस2 साल में उत्तर प्रदेश पुलिस की टीम 8 बार अंसारी को लेने पंजाब गई, लेकिन हर बार सेहत, सुरक्षा और कोरोना का कारण बताकर पंजाब पुलिस ने सौंपने से इनकार कर दिया। पंजाब पुलिस डॉक्टर की सलाह का हवाला देती रही कि अंसारी को डिप्रेशन, शुगर, रीढ़ की बीमारियां हैं। ऐसे में उसे कहीं और शिफ्ट करना ठीक नहीं है।कानपुर में बिकरु कांड के आरोपी विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद अंसारी ने जान का खतरा बताया था, उसने पत्र लिखकर आशंका जताई थी कि जैसे दुबे की जीप पलट गई और जान चली गई, ऐसे मेरी भी जा सकती है।

कोर्ट में UP सरकार रख चुकी यह तर्कसुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान UP सरकार ने कहा था कि मुख्तार अंसारी पर 15 केस दर्ज हैं और वह गैंगस्टर की श्रेणी में आता है। वह पंजाब की जेल में मौज कर रहा है। उसके न आने से उत्तर प्रदेश की अदालतों में उसके खिलाफ सुनवाई रुकी हुई है। वहीं, पंजाब सरकार के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि UP सरकार की मांग संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने वकील की दलील ठुकरा दी।

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