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Lucknow news- शाइन सिटी मालिकों की कई एजेंसियों को तलाश, पुलिस कर रही इंटरपोल से संपर्क, दुबई में शुरू किया हीरे का कारोबार

शाइन सिटी इंफ्रा के मालिकों राशिद नसीम और आसिफ नसीम की तलाश लखनऊ की पुलिस ही नहीं, कई एजेंसियां भी कर रही हैं। इन दोनों जालसाज बिल्डरों के खिलाफ ईडी और सेबी जैसी एजेंसी भी लगी हैं। हाल ही में ईडी ने शाइन सिटी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया था। गिरोह के सरगना व मास्टर माइंड राशिद नसीम ने लोगों से निवेश की रकम हड़पने के बाद दुबई में हीरे का कारोबार शुरू कर दिया है। उसने वहीं पर एक नामचीन बिल्डिंग में अपना शोरूम खोल रखा है। इसकी जानकारी गोमतीनगर पुलिस को भी है। उसकी गिरफ्तारी के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब इंटरपोल की मदद लेने की कवायद भी शुरू कर दी है। इस मामले में पत्राचार जल्द शुरू हो जाएगा।

हजारों लोगों को भूखंड देने के नाम पर पैसा ठगने वाली शाइन समूह की कंपनियों पर सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव को जांच के लिए पत्र भेजा गया था। सेबी के अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी शाइन सिटी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड पर पोंजी स्कीम में फं ड के लेनदेन करने का संदेह है। सेबी के पत्र के बाद अब महानिदेशक संस्थागत वित्त, बीमा एवं बाह्य सहायक वित्त  परियोजना ने डीएम लखनऊ और एलडीए वीसी से जांच कराने के लिए कहा था। पूरे मामले की जांच कराने के साथ ही इसकी रिपोर्ट पेश करने को कहा। जिसे प्रदेश सरकार सेबी के साथ भी साझा करेगी।

पोंजी स्कीम के जरिए रूपये के लेनदेन की शिकायत

सेबी में बिल्डर के जालसाजी के शिकार हुए आजमगढ़ के जितेंद्र कुमार सोनकर और कानपुर के ओवेस अहमद के खरीदारों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनको लखनऊ में अपनी आवासीय योजनाओं में निवेश के नाम पर रुपये लिये गये। उनको निवेश के बदले मोटा मुनाफा देने का वादा भी किया गया था। कंपनी ने रकम तो जमा करा ली। लेकिन मुनाफा देने के बजाए कंपनी के निदेशकों ने रकम ही हड़प ली। जिसकी शिकायत सेबी में की गई थी। 

सेबी के अधिकारियों ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि यह कंपनी सेबी में किसी भी तरह से पंजीकृत नहीं है। यह भी संदेह है कि पोंजी स्कीम के जरिए रुपयों की लेनदेन किये जाने की बात है। ऐसे में जरूरी है कि यूपी सरकार इस प्रकरण में जांच करे। आवश्यक कार्रवाई इसलिए भी होना जरूरी है जिससे आम लोग इस तरह के जालसाजी में न फंसे।

सेबी के मुख्य सचिव को पत्र मिलने के बाद अब वित्त विभाग ने अपनी जांच शुरू कर दी। वहीं एलडीए से भी आवासीय योजनाओं पर जानकारी मांगी गई है। डीएम भी अपनी रिपोर्ट जांच करा बिल्डर के खिलाफ  देंगे। इस जांच की महानिदेशक संस्थागत वित्त खुद निगरानी कर रहे हैं।

रेरा की जांच में जालसाजी का हुआ था खुलासा

इससे पहले रेरा भी शाइन सिटी बिल्डर के खिलाफ  जांच करा चुका है। लखनऊ में शाइन वैली फेज 1 में 58 भूखंड की आवासीय परियोजना में 3000 लोगों को भूखंड बेच दिए जाने की बात सामने आई। इसका क्षेत्रफल भी 18 गुना अधिक मिला। इसी तरह न्यू जेल रोड की सॉलिटेयर सिटी में भी बिल्डर ने 600 भूखंड बताए। यहां भी 1270 भूखंड की बुकिंग मिली है। इनमें से 650 की रजिस्ट्री भी कर दी गई। यह कैसे हुआ, यह बिल्डर ही बता सकता है।

लखनऊ में बिल्डर की अब तक आधा दर्जन से अधिक कालोनियों सामने आ चुकी हैं। इनमें से किसी का नक्शा एलडीए से स्वीकृत नहीं है। इसमें शाइन वैली एक्सटेंशन, ग्रीन होम्स, ड्रीम होम्स, पैराडाइज गार्डन, जेवियर सिटी, नेचर वैली समृद्धि गुल्लक,  वैदिक विहार फेज-1 व फेज-2 में नियमों की अनदेखी के अलावा रेरा को वित्तीय अनियमितताएं भी मिली। रेरा ने भी मनी लॉड्रिंग की आशंका जताई थी। अभी भी रेरा बिल्डर के प्रकरणों की सुनवाई कर रहा है। शाइन सिटी  के दो प्रोजेक्ट पर हाल ही में एलडीए ने न्यू जेल रोड पर अवैध निर्माण तोड़वाए। एलडीए अधिकारियों का कहना है कि इस समय किसी प्रोजेक्ट पर बिल्डर काम नहीं करा रहा है। जहां अवैध निर्माण हो चुके हैं। उनको भी तोड़वाया जाएगा।

रोजमर्रा के उत्पाद के नाम पर निवेश कराया
शाइन सिटी के मालिकों ने निवेशकों को ठगने के लिए नए-नए योजनाएं लांच की। आरोप है कि बिल्डर ने निवेश की गई रकम को दूसरे योजनाओं में लगाकर लाभ कमाया। इसमें शेयर ट्रेडिंग भी शामिल हैं। साथ ही कंपनी ने रोजमर्रा के उपयोग के उत्पादों की भी लॉचिंग की। जिसके नाम पर हजारों लोगों से रुपये निवेश कराये। इसी तरह का झांसा देकर आरोपियों ने करोड़ों रुपये हड़प लिये। इसके बाद धीरे से अपना पूरा कारोबार विदेशों में स्थापित कर दिया। कब वह विदेश निकल गये। इसकी जानकारी पुलिस को भी नहीं लग सकी।

नेपाल में हो चुका है गिरफ्तार
कमिश्नरेट पुलिस के अधिकारी के  मुताबिक शाइन सिटी का मालिक राशीद नसीम अपने कुछ लोगों के साथ नेपाल में भी कारोबार फैलाने गया था। वहां जालसाजी की भनक लगने के बाद स्थानीय लोगों ने पूरी टीम को एक होटल में घेर लिया था। वहीं से नेपाल पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। कुछ दिन बाद वहां से जमानत मिलने के बाद वहीं से दुबई निकल गया। इसके बाद वह कई बार भारत आया लेकिन इसकी जानकारी लखनऊ पुलिस को नहीं लगी। पुलिस के मुताबिक आरोपी की गिरफ्तारी के लिए शासन स्तर पर कार्यवाही शुरू हो गई है। जल्द ही उसे गिरफ्तार करने के लिए इंटरपोल की मदद ली जाएगी।

रेरा की जांच में जालसाजी का हुआ था खुलासा

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