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Lucknow news- सड़क किनारे सिम खरीदा तो खाली हो सकता है आपका बैंक अकाउंट, जानिए कैसे…

लखनऊ में अगर आप फुटपाथ किनारे कैनोपी लगाकर सिम बेचने वालों से सस्ते दामों में सिम एक्टीवेट करा रहे हैं तो सावधान हो जाइए। जालसाज झांसा देकर एक से अधिक बार दस्तावेजों की स्कैनिंग कर लेते हैं। इसके बाद ग्राहकों के नाम से दूसरा सिम सक्रिय कर फर्जी कॉल सेंटरों को बेच देते हैं। फिर ये फर्जी कॉल सेंटर इन सिम के जरिए ठगी का धंधा करते हैं। चिनहट पुलिस व साइबर क्राइम सेल की टीम ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश कर इसके दो गुर्गों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके पास से 5028 एक्टिवेटेड सिम, 34 एंड्रायड मोबाइल व दो बायोमीट्रिक डिवाइस बरामद की हैं।

साइबर क्राइम सेल के एसीपी विवेक रंजन राय के मुताबिक, फरवरी में चिनहट थाने में एक युवती से नौकरी के नाम पर ठगी हुई। ठगी करने वालों ने शाइनडॉटकॉम नाम से ऑनलाइन कंपनी बनाकर नौकरी दिलाने का झांसा दिया। पहले तो ठगों ने युवती से रजिस्ट्रेशन कराया फिर पेमेंट के लिए उसके मोबाइल पर फोन-पे का लिंक भेजा। युवती के इस लिंक पर क्लिक करते ही उसके यूनियन बैंक के खाते से 10,799 रुपये निकल गए। मुकदमा दर्ज कर साइबर क्राइम टीम ने जांच शुरू की। टीम ने आलमबाग से हरदोई के बालामऊ निवासी गोपाल मौर्या और उरई के इंदिरानगर कुइया निवासी भरत शर्मा को गिरफ्तार किया। दोनाें आलमबाग के सुंदरनगर में किराए पर रहते थे।

10 से 20 रुपये में बेचते थे सिम

एसीपी के मुताबिक, जालसाजों के पास बीएसएनल व वोडाफोन कंपनी के सिम के एक्टिवेशन की अथॉरिटी है। कंपनी में सिम का दाम 30 रुपये है और दुकानों पर यह 50 रुपये में बेचा जाता है। लेकिन ये ठग ग्रामीण व नई कॉलोनियों में सड़क किनारे कैनोपी लगाकर ये सिम 10 से 20 रुपये में बेचते थे। जालसाज झांसा देकर लोगों के दस्तावेजों की फोटो कई बार खींच लेते थे। इसके बाद असली दस्तावेजों के जरिए तीन से चार सिम एक्टिव करते थे। फिर सिम के जरिए फोन पे, गूगल पे और मोबिक्विक वॉलेट एक्टिव करते थे। इस्तेमाल के बाद सिम एनसीआर में चलने वाले साइबर ठगी के कॉल सेंटर को बेच देते थे। पूछताछ में ठगों ने कुबूला कि एक इलाके में 40 से 70 सिम बेचने के बाद दूसरे इलाके में चले जाते थे। एक या दो लोगों को ठगने के बाद सिम बंद कर देते थे।

वॉलेट से अपने खाते में करते थे ट्रांसफर

प्रभारी निरीक्षक चिनहट धनंजय पांडेय के मुताबिक, जालसाज अपने मोबाइल पर भुगतान के लिए बने ज्यादातर एप सक्रिय रखते थे। इनके जरिए बेरोजगारों के खाते से रुपये जमा कराते थे। इसके बाद पासवर्ड हासिल कर उनके खातों से रकम निकाल कर ऑनलाइन बैंक खाता बनाकर जमा करवाते थे। इससे रकम अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते थे।

कंपनियां कर रहीं नियमों का उल्लंघन

एसीपी साइबर क्राइम विवेक रंजन राय के मुताबिक, सिम बेचने की प्रक्रिया में सभी कंपनियां नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। एक व्यक्ति के नाम पर एक ही दिन में एक ही वक्त और एक ही स्थान से कई सिम एक्टिवेट हो जा रहे हैं। इस संबंध में टेलीकॉम प्रोवाइडरों से पत्राचार कर सिम विक्रेताओं द्वारा नियमों का खुलेआम उल्लंघन की जानकारी दी जाएगी। लोगों से अपील की है कि सिम लेते वक्त एक ही बार फोटो क्लिक कराएं। नहीं तो ठगी के शिकार हो सकते हैं।

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