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Lucknow news- समझ रहे थे हार्ट की बीमारी, निकली विटामिन डी की कमी, कोरोना से जीत चुके लोगों में देखने को मिल रही समस्या

चंद्रभान यादव

लखनऊ। राजधानी निवासी विजय कोरोना को मात दे चुके हैं। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सीटी स्कैन कराया तो फेफडे़ की स्थिति सामान्य मिली, लेकिन सप्ताह भर बाद सीने में दर्द होने लगा। इससे वह तनाव में रहने लगे और लोहिया संस्थान पहुंचे। यहां चिकित्सक ने जांच कराई तो विटामिन डी की कमी निकली। मरीज ने चिकित्सक से निवेदन कर ईको, ईसीजी सहित हृदय से जुड़ी जांचें भी कराईं, लेकिन सभी सामान्य मिलीं। विजय की तरह ही प्रतिदिन ओपीडी में कोरोना को मात देने वाले कुल मरीजों में 10 फीसदी लोग हार्ट को लेकर भयभीत होकर पहुंच रहे हैं।

राजधानी के केजीएमयू, एसजीपीजीआई, लोहिया संस्थान की हृदय रोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन करीब पांच सौ मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें करीब 50 फीसदी पोस्ट कोविड वाले हैं। इन मरीजों में 10 से 15 फीसदी लोग मामूली दर्द को भी हार्ट अटैक से जोड़ते हुए सवाल करते हैं। इसी तरह जिन मरीजों की पहले से हार्ट संबंधी दवाएं चल रही हैं उनमें करीब 20 फीसदी पहले की अपेक्षा ज्यादा भयभीत नजर आते हैं। बातचीत के दौरान वे बार-बार खुद के कोरोना पॉजिटिव होने और ठीक होने के बाद समस्या बढ़ने की शिकायत कर रहे हैं। जांच के दौरान इन मरीजों में हार्ट से जुड़ी समस्या पहले जैसी मिली, लेकिन विटामिन डी की कमी जरूर मिली है।

तो क्या करें मरीज

लोहिया संस्थान के हृदय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. भुवनचंद तिवारी बताते हैं कि कोरोना की चपेट में आने वाले सिर्फ उन्हीं मरीजों में हृदय संबंधी समस्या बढ़ी है, जो अति गंभीर हो गए थे। लंबे समय तक आक्सीजन सपोर्ट पर रहने वालों में भी समस्या मिल रही है। ऐसे मरीजों के लगातार मोबाइल पर सर्च करने की वजह से अवसादग्रस्त हो जा रहे हैं। अन्य मरीजों में विटामिन डी की कमी पाई जा रही है। लोग अनावश्यक परेशान न हों। डॉक्टर ने जो दवाएं दी हैं, उनका प्रयोग करें। स्वास्थ्य वर्धक, कम वसायुक्त भोजन करें और मन को प्रसन्न रखें। वही जांच कराएं, जिसकी डॉक्टर ने सलाह दी है। दवाएं नियमित खाएं और सुबह-शाम सैर करें।

लंबे समय तक विटामिन डी की कमी से समस्या

एसजीपीजीआई के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. नवीन गर्ग बताते हैं कि नए मरीजों और पहले से इलाज कराने वाले हृदय रोगियों में विटामिन डी की कमी ज्यादा देखी जा रही है, लेकिन यह समस्या कोविड की चपेट में आने से पहले थी या बाद में, इस पर विस्तृत अध्ययन की जरूरत है। यह भी देखा गया है कि कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाली दवाएं भी विटामिन डी को कम कर देती हैं। ऐसे में हृदय रोगियों को अब विटामिन डी भी दिया जा रहा है। लंबे समय तक विटामिन डी की कमी बने रहने से हृदय रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। भारतीय शोध में यह बात भी सामने आ चुकी है कि विटामिन डी की कमी से होने वाले इंसुलिन प्रतिरोध की वजह से दिल का दौरा पड़ सकता है। हृदय कोशिकाओं में इंसुलिन प्रतिरोध के कारण हृदय में ग्लूकोज और वसा अम्ल जैसे ऊर्जा उत्पादकों का उपयोग बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। इसलिए जांच में विटामिन डी की कमी है तो उसे पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।

विटामिन डी की कमी के लक्षण

मांसपेशियों में दर्द, सीने में दर्द, शरीर में सूजन आदि।

इस तरह बढ़ाएं विटामिन डी

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि रोज कम से कम एक घंटे धूप लें। धूप नहीं मिलती तो विटामिन डी बनाने वाले तत्व कोलेस्ट्रॉल में बदल जाते हैं। विटामिन डी कम होने पर इम्यून सिस्टम तेजी से कम होने लगता है। विटामिन डी की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा होता है। इससे हार्ट अटैक हो सकता है। इसी तरह दूध और दूध से बनी चीजें, गाजर अंडे, मछली लें।

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