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Lucknow news- समीकरण बदलता देख किसी की बांछें खिलीं तो किसी का चेहरा मुरझाया

हाईकोर्ट के फैसले से राजधानी की पंचायतों में चुनावी गणित में उलटफेर की आशंका से हलचल सी मची है।

पहले रोटेशन के आधार पर लिस्ट बनी थी, लेकिन अब 2015 के शासनादेश के आधार पर आरक्षण सूची में हर जिले में परिवर्तन होगा।

ऐसे में चुनाव प्रचार की तैयारियों में लगे संभावित उम्मीदवार असमंजस में हैं। प्रत्याशियों का कहना है कि अब जहां सीट सामान्य थी, वहां की सीट बदल जाएगी।

वहीं जहां पर सीट आरक्षित थीं, वहां सीट सामान्य होने की संभावना है। ऐसे में बदलते समीकरणों के कारण किसी की बांछें खिल गई हैं तो किसी का चेहरा मुरझा गया है।

नगराम : पोस्टर छपवा लिए थे, अब असमंजस में

नगराम की बहरौली पंचायत में 25 साल के बाद सीट आरक्षित होने से प्रधानी लड़ने के लिए नए उम्मीदवार मैदान में थे। एससी उम्मीदवार देशराज, ओम प्रकाश, गुज्जी नेता चुनाव लड़ने की तैयारी में पोस्टर छपवा चुके हैं, लेकिन अब क्या होगा, यह सवाल खड़ा हो गया है। इसी तरह ममई मऊ के राजनारायण सिंह प्रधान की सीट महिला घोषित होने से उत्साहित थे, पर उनका भी उत्साह फीका पड़ता दिख रहा है। वहीं निवर्तमान प्रधान जितेंद्र कुमार पटेल को अब उम्मीद जगी है कि उन्हें चुनाव लड़ने का मौका मिल जाएगा। रामकृपाल त्रिपाठी, मोहित शुक्ला आशीष, कैलाश वर्मा, शब्बीर के बैनर-पोस्टर भी टंग गए हैं। सुशील वर्मा अनैया खरगापुर से पत्नी को चुनाव लड़ाने की तैयारी में लगे हैं, लेकिन अब रातों की नींद उड़ना स्वाभाविक है। सेल्हूमऊ हरदोईया, गढ़ा, समेसी, कुबहरा, कमालपुर बिचलिका, छतौनी, रसूलपुर, सलेमपुर, हसनापुर, बघौली, करोरा, करोरवा में भी तैयारी कर रहे कई प्रत्याशियों ने नए बदलाव को लेकर प्रचार रोक दिया है।

मलिहाबाद : निवर्तमान प्रधानों में खुशी

हाईकोर्ट के फैसले की जानकारी होने के बाद निवर्तमान प्रधानों में खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं पहली बार चुनाव की तैयारी में जुटे प्रत्याशियों में मायूसी का माहौल बन गया। विकास खंड मलिहाबाद में 67 ग्राम पंचायतों पर चुनाव होना है। इसमें से 21 ग्राम पंचायतें ऐसी थीं जो नई आरक्षण व्यवस्था के तहत पहली बार एससी/ओबीसी के लिए आरक्षित की गई थीं। पहली बार आरक्षित हुईं इन सीटों पर एससी/ओबीसी के प्रत्याशी चुनाव मैदान में पूरे जोर शोर जुट गए थे, लेकिन अब इनका उत्साह फीका पड़ गया है।

बख्शी का तालाब : संभावित दावेदार परेशान

बख्शी का तालाब और इटौंजा में 94 सीटें प्रधान पद, 104 सीटें क्षेत्र पंचायत सदस्यों के लिए और 5 जिला पंचायत की हैं। ग्राम पंचायत की करीब 25 सीटें ऐसी हैं जो नई आरक्षण सूची आने के बाद अनारक्षित हो गई थीं। क्षेत्र पंचायत की 33 और जिला पंचायत की एक सीट भी अनारक्षित हो गई थी। इसी के हिसाब से प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने तैयारियां, जनसंपर्क शुरू कर दिया था। कुछ ने हजारों रुपये तक खर्च कर डाले हैं। वहीं आरक्षण क्रम बदलने के कारण जो चुनाव लड़ने से वंचित रह गए थे, उनमें एक आशा जगी है। बख्शी का तालाब के एडीओ पंचायत अभिलाष कश्यप ने बताया कि अभी तक उच्चाधिकारियों के द्वारा कोई निर्देश ब्लॉक प्रशासन को नहीं मिले हैं।

सरोजनीनगर : प्रधानी लड़ने के सपने पर ग्रहण

सरोजनीनगर के कई गांवों में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद संभावित उम्मीदवारों को गहरा झटका लगा है। कुरौनी के अलोक यादव का कहना है कि अब उनकी सीट आरक्षित से सामान्य हो जाएगी। वहीं जीत बहादुर की सीट सामान्य से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो जाएगी। हरौनी प्रधान बृजेश सिंह का कहना है उनकी सीट सामान्य पुरुष हो जाएगी, जो कि पिछड़ा वर्ग महिला हुई थी। कमलापुर के प्रधान रघुवीर यादव का कहना है कि उनके यहां ग्राम प्रधान का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हो जाएगा। सरोजनीनगर विकास खंड में 47 ग्राम पंचायतें हैं। बीते दिनों जारी आरक्षण सूची में सात सीट अनुसूचित जाति, 5 सीटें महिला अनुसूचित जाति, 8 सीटें पुरुष पिछड़ा वर्ग व 4 सीटें महिला पिछड़ा वर्ग लिए आरक्षित हुई थीं। इसी के साथ लोगों ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया था, लेकिन अब बदले समीकरण में सारी तैयारियां धरी रह गई हैं।

मोहनलालगंज : 78 ग्राम पंचायत, 108 बीडीसी और 5 जिला पंचायत की सीटों पर असर तय

मोहनलालगंज की 78 ग्राम पंचायतों, 108 बीडीसी और पांच जिला पंचायतों की सीटों पर सीधे असर पड़ना तय है। दरअसल इनमें से अधिकतर सीटें आरक्षित हो गई थीं। जानकारों का कहना है कि यदि 2015 की स्थिति बहाल होती है तो कई सीटें अनारक्षित होने के आसार हैं। पहले मोहनलालगंज ब्लॉक प्रमुख की सीट अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित थी, लेकिन बीते दिनों यह अनारक्षित हो गई थी और इसी के हिसाब से दिग्गजों ने गणित लगाना शुरू कर दिया था। अब फिर समीकरण बदलेंगे, इसलिए नए प्रत्याशियों में आस जगी है। वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित होने के बाद से कई दावेदार तैयार होने लगे थे, लेकिन अब सभी का उत्साह फीका पड़ गया है। ऐसे ही ग्राम पंचायत निगोहां, परेहटा, भदेसुवा समेत कई सीटें सामान्य से आरक्षित कर दी गई थीं। बीते दिनों सूची जारी होने के साथ ही सभी ने अपनी और अपनों की दावेदारी के लिए राजनीतिक बिसात बिछाते हुए दिन रात एक कर दिए थे। हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद अब उलटफेर की आशंका से सबकी रातों की नींद उड़ गई है। वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्हें इस फैसले में एक नई उम्मीद दिखाई दे रही है।

काकोरी : सुबह से बदले से नजर आने लगे मिजाज

काकोरी में जिला पंचायत की दो, प्रधान की 47 और बीडीसी की 56 सीटों के लिए बीते दिनों जारी आरक्षण सूची के अनुसार दावेदारों की तैयारियां जारी थीं। इधर, सोमवार को हाईकोर्ट के फैसले के बाद सभी का रवैया बदला-बदला सा रहा। जो लोग लुभावने वादे करना शुरू कर चुके थे, उन्होंने वादों की पोटली समेट ली। वहीं जनसंपर्क बंद हो गया। जनता हो या दावेदार हर कोई कयास लगाता नजर आया।

गोसाईंगंज: 50 फीसदी सीटों की तस्वीर बदलेगी

यहां 76 ग्राम पंचायत, 4 जिला पंचायत और 94 बीडीसी की सीटें हैं। हाईकोर्ट के आदेश से नई व्यवस्था लागू होने पर अब पहले बाहर हो चुके कई प्रत्याशियों को फिर ताल ठोंकने का मौका मिलेगा। मसलन, तीन सामान्य सीट के प्रबल दावेदारों की बांछें खिली हुई हैं, क्योंकि ये अभी तक नई आरक्षण सूची के कारण बाहर हो गए थे। बीडीसी से लेकर ब्लॉक प्रमुख तक का पद आरक्षित होने के कारण इन पदों के प्रबल दावेदारों से समर्थित प्रत्याशियों ने बदली व्यवस्था का लाभ लेने का जुगाड़ शुरू कर दिया है। हालांकि अभी आरक्षण को लेकर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। पंचायत चुनाव में लगे एक अधिकारी के मुताबिक 2015 के आधार पर करीब 50 प्रतिशत सीटों की तस्वीर बदल जाएगी।

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