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Lucknow news- 16.59 करोड़ के भ्रष्टाचार का मामला, बीज घपले में कृषि विभाग का अपने अधिकारियों के शामिल होने से इनकार

प्रदेश के चर्चित 16.59 करोड़ रुपये के बीज घपले में कृषि विभाग ने अपने अधिकारियों व कर्मचारियों के शामिल होने से इनकार कर दिया है। उप्र. बीज विकास निगम की जांच रिपोर्ट में घोटाले की अवधि में तैनात रहे जिला कृषि अधिकारियों और अन्य संबंधित कर्मचारियों को भी उत्तरदायी ठहराया गया था और कार्रवाई के लिए कृषि निदेशक को पत्र लिखा था।

दरअसल, उप्र. बीज विकास निगम से कृषि विभाग बीज खरीद कर इसे अनुदान पर किसानों को उपलब्ध कराता है। वर्ष 2018 में अमर उजाला ने बीज खरीदने में बड़े घोटाले का खुलासा किया था। जांच में पाया गया कि वर्ष 2011-12 से 2018-19 के बीच 53 हजार क्विंटल बीज कानपुर के निगम गोदाम से उठाना दिखाया गया, लेकिन किसानों को इसका वितरण नहीं किया गया। इसमें 50 हजार क्विंटल बीज गेहूं का था, जबकि शेष तीन हजार क्विंटल सरसों और चना का बीज था। कृषि विभाग ने निगम को इस बीज की कीमत 16.56 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।

बीज विकास निगम की जांच रिपोर्ट में इस पूरे घपले में कानपुर स्टोर के विपणन अधिकारी आलोक कुमार व अवधेश कुमार सिंह और शैक्षिक सहायक उमेश राय को दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अवधि में इटावा में तैनात रहे जिला कृषि अधिकारी, बफर गोदाम निरीक्षक और ठेकेदार की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर बीज विकास निगम ने कृषि निदेशालय को पत्र भेजा कि संबंधित कार्मिकों की भूमिका की जांच करके कार्रवाई की जाए। लेकिन, कृषि निदेशालय ने अपने जवाब में कहा है कि कानपुर स्टोर से इटावा के जिला कृषि अधिकारी ने बीज उठवाया ही नहीं था। जिस स्टोर रसीद से यह घपला किया गया, उसे भी इटावा के जिला कृषि अधिकारी कार्यालय से जारी नहीं किया गया था। ऐसे में कृषि विभाग की जिम्मेदारी कैसे बन सकती है। हालांकि, इस मामले की पड़ताल ईओडब्ल्यू भी कर रहा है।

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