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Lucknow news- 5014 कोरोना मरीज, 3590 डिस्चार्ज,52,376 पहुंचा सक्रिय मरीजों का आंकड़ा, 19 की मौत

लखनऊ। राजधानी में कोरोना के इलाज की बदहाल व्यवस्था के बीच मंगलवार को संक्रमण के नए केसों में कमी और डिस्चार्ज होने वालों की संख्या बढ़ने से राहत मिली। बीते 24 घंटे में संक्रमण के 5014 नए मामले मिले, जबकि इस दौरान रिकॉर्ड 3590 लोग डिस्चार्ज हुए। हालांकि, वायरस ने 19 लोगों की जान ले ली।

इलाज के दौरान राज्य मंत्री हनुमान मिश्र और पूर्व सांसद श्याम बिहारी समेत 19 लोगों की मौत दर्ज हुई। वहीं संक्रमण से उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष श्याम बिहारी मिश्र, पूर्व विधानसभा सदस्य संडीला हरदोई कुंवर महाबीर, कवि वाहिद अली वाहिद, पूर्वोत्तर रेलवे ओबीसी के पूर्व कर्मचारी एसोसिएशन लखनऊ महामंडल मंत्री आरपी यादव की भी जान चली गई।

लगातार आठवें दिन पांच हजार से ज्यादा केस

लखनऊ में संक्रमण का ग्राफ कुछ कम हुआ है, पर अब भी पांच हजार से ज्यादा केस रोजाना मिल रहे हैं। यह लगातार आठवां दिन है जब कोेरोना के पांच हजार से ज्यादा केस आए। बीते 24 घंटे में लोकबंधु कोविड अस्पताल में आईसीयू के चार डॉक्टर समेत करीब नौ स्टाफ के साथ कुल 5014 लोग पॉजिटिव हुए।

48 घंटे में 6231 डिस्चार्ज

लखनऊ में सोमवार को 2641 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। वहीं, मंगलवार को 3590 लोगों को डिस्चार्ज किया गया। इस तरह 48 घंटे में कुल 6231 लोग अस्पताल से घर पहुंचे। मंगलवार को सक्रिय मरीजों की संख्या 52,376 दर्ज की गई।

कवि वाहिद अली वाहिद को लोहिया में नहीं किया भर्ती, सांसे टूटीं

खुर्रमनगर कब्रिस्तान में आज किए जाएंगे सुपुर्द-ए-खाक

लखनऊ। कौमी एकता की पहचान कवि वाहिद अली वाहिद का मंगलवार को निधन हो गया। 59 वर्षीय वाहिद को तीन दिन से बुखार आ रहा था। उन्हें लोहिया ले जाया गया, लेकिन न तो स्ट्रेचर मिला और न ही भर्ती किया गया। उनकी बड़ी बेटी शामिया ने बताया कि पिता को हृदय रोग पहले से था। मंगलवार सुबह उनकी तबियत अचानक बिगड़ गई, जिस पर उन्हें लोहिया अस्पताल ले जाया गया। लेकिन उन्हें भर्ती ही नहीं किया गया और घर लौटा दिया गया। इसी बीच उनकी सांसें टूट गईं। शामिया के अलावा वाहिद के परिवार में छोटी बेटी अंजुम, पत्नी नजमुन्निशा और बेटा राशिद हैं, जो कतर में है। वाहिद को बुधवार को खुर्रमनगर कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। वाहिद आवास एवं विकास परिषद में कार्यरत थे। उनके निधन पर साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनकी दर्जनभर से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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