दिसंबर 2022 तक पूर्वोत्तर रेलवे के 90% मार्गों पर इलेक्ट्रिक इंजन की ट्रेन चलने लगेगी.मुख्य रेलमार्गों के अलावा साइड लाइनों लूप लाइनों पर भी विद्युतीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है. आनंदनगर-बढ़नी-गोंडा के रूट पर मार्च तक विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा. रेलवे ने तय किया है कि 2023 तक सभी मार्गों पर विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा.

इलेक्ट्रिक इंजनों के चलने से लिंकहाफमैन बुश कोच वाली ट्रेनों से पावरकार की उपयोगिता समाप्त हो गई है.ट्रेनों में विकल्प के रूप में सिर्फ एक पावरकार लग रही हैं. एक पावरकार की जगह अतिरिक्त एलएसआरडी कोच लगाए जा रहे हैं. इस कोच में यात्रियों को बैठने के लिए 31 कोच अतिरिक्त मिल जा रहे हैं. इसके अलावा चार टन पार्सल की ढुलाई भी हो जा रही है.

77 प्रतिशत रूट का पूरा हो गया है विद्युतीकरण

पूर्वोत्तर रेलवे के 3141.53 रूट किमी में से अभी तक कुल 2415.1 रूट किमी यानी लगभग 77 प्रतिशत रेलमार्ग का विद्युतीकरण पूरा हो गया है
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी. पंकज कुमार सिंह के अनुसार वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 में अभी तक 15 रेलमार्गों विद्युतीकरण हुआ है, जिसपर इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनें चलने लगी हैं.13 जनवरी को रेल संरक्षा आयुक्त गोंडा-बहराइच विद्युतीकृत रेलमार्ग का निरीक्षण करेंगे.

दो वर्ष में इन रेलमार्गों का हुआ विद्युतीकरण

कछवा रोड-माधोसिंह-ज्ञानपुर रोड, भटनी-औंड़िहार, औंड़िहार-नन्दगंज-गाजीपुर सिटी,

औंड़िहार-डोभी, सलेमपुर-बरहज बाजार, दुरौंधा-मसरख, गोण्डा-सुभागपुर, गोरखपुर-आनन्दनगर-नौतनवा, मऊ-आजमगढ़, सीतापुर-परसेण्डी, सीतापुर-लखीमपुर-बांकेगंज, बरेली सिटी-पीलीभीत, मन्धना-ब्रह्मावर्त, पीलीभीत-टनकपुर, फेफना-इंदारा, गोण्डा-बहराईच। आजमगढ़-शाहगंज, शाहजहापुर-पीलीभीत.

विद्युतीकरण के फायदे

डीजल का बचत होगा और पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होगा.

ट्रेन की रेक से एक पावरकार की उपयोगिता समाप्त.

अतिरिक्त कोच में 31 सीट के साथ चार टन सामान की ढुलाई.