राज कपूर भी अपने पिता पृथ्वीराज कपूर की तरह बहुत बड़े एक्टर बनना चाहते थे. लेकिन उनके पिता पृथ्वीराज कपूर चाहते थे कि राज कपूर अपनी शुरुआत जीरो लेवल से करें. इसी की वजह से उन्होंने राज कपूर को पहली फिल्म में मजदूर का रोल दिलवाया. अपने पिता की बात मानकर राज कपूर बॉम्बे टॉकीज में काम करने लगे.

वह कभी सेट की सफाई करते तो कभी हीरो हीरोइन के जूठे कप प्लेट को उठाकर ले जाते. कभी वह कैमरा सेट करते तो कभी लाइट सेट करते. उनके पिता चाहते थे कि वह जीरो लेवल से शुरुआत करें इसलिए वह यह सभी काम करना शुरू किए. वैसे तो राज कपूर बहुत बड़े एक्टर पृथ्वीराज कपूर के बेटे थे लेकिन फिर भी वह मजदूरों के साथ खाना खाते थे.

उसी समय की बात है, जब बॉम्बे टॉकीज फिल्म ‘ज्वार भाटा’ दिलीप कुमार के साथ बना रहा था. दिलीप कुमार राजकुमार के बहुत ही अच्छे दोस्त थे. राजकुमार भी उसी फिल्म के सेट पर मजदूरों के साथ काम करते थे. एक बार उन्हें ऐसा लगा कि राजकुमार नॉन फिल्मी होकर भी फिल्म में हीरो का काम कर रहा है और मैं एक बड़े स्टार का बेटा होकर भी मजदूर का काम कर रहा हूं. यह सोच कर उन्हें गुस्सा आने लगा लेकिन वह अपनी फीलिंग किसी से शेयर नहीं करते

उन्हें एक दिन अपनी ऐसी हालत पर इतना गुस्सा आया कि उन्होंने हथौडे़ से फिल्म के सेट को तोड़ दिया.मगर इतनी बड़ी घटना के बाद भी उन्हें किसी ने कुछ नहीं कहा. फिर उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि अगर इतनी बड़ी हरकत किसी और ने की होती तो उसे बहुत बड़ी सजा मिलती. तब उन्होंने यह सोच लिया कि वह यहां काम सीखने आए हैं किसी और की बराबरी करने नहीं.

उसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया और ऊंचाइयों को छुआ. उन्होंने ‘मेरा नाम जोकर’, ‘सपनों का सौदागर’, ‘तीसरी कसम’, ‘पापी’, ‘आवारा’, ‘प्यार’, ‘अमर प्रेम’, ‘दिल की रानी’, ‘आग’ और ‘नीलकमल’ जैसी फिल्मों में काम किया.