साल 2021 से आम जनता का बजट बिगड़ा हुआ है. खाने पीने के सामान के दाम आसमान छू रहे हैं. दिसंबर 2021 में खाने-पीने के सामान के दाम में 2 गुना वृद्धि देखने को मिली थी.राष्ट्रीय सांख्यकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 4.05 प्रतिशत हो गई, जो इससे पिछले महीने 1.87 प्रतिशत थी.

विशेषज्ञों का कहना है कि रिजर्व बैंक महंगाई के ऊंचे स्तर को दॆखते हुए एक बार फिर दरों में कटौती के विचार को त्याग सकता है. रिजर्व बैंक के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में सकल मुद्रास्फीति अपने उच्चस्तर पर होगी.उसके बाद से यह नीचे आएग. इससे पहले पिछले हफ्ते देश के कई अर्थशाश्त्रियों ने खुदरा महंगाई के 5.50 फीसदी से अधिक रहने की आशंका जताई थी और दिसंबर की खुदरा महंगाई उसके करीब रही है.

औद्योगिक उत्पादन अप्रैल-नवंबर में 17.4 फीसदी बढ़ा

चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-नवंबर के दौरान औद्योगिक उत्पादन 17.4 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष 2020-21 की इसी अवधि में इसमें 15.3 प्रतिशत की गिरावट आयी थी. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक आंकड़ों के अनुसार मार्च, 2020 से शुरू हुई कोरोना वायरस महामारी के कारण औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हुआ.

रिपोर्ट के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष 2022-23 में सरकार का राजकोषीय घाटा थोड़ा कम होकर 15.2 लाख करोड़ रुपये रह सकता है, जो जीडीपी का 5.8 प्रतिशत होगा.इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि कर संग्रह में तेजी आने से सरकार की सकल कर प्राप्तियां वर्ष 2021-22 में बजट अनुमान से 2.5 लाख करोड़ रुपये तक अधिक रह सकती हैं.हालांकि, जून 2022 के बाद जीएसटी क्षतिपूर्ति की व्यवस्था खत्म होने से राज्य सरकारों का राजकोषीय घाटा बढ़ेगा.