अब रेलवे के गार्ड को गार्ड नहीं कहा जाएगा बल्कि उन्हें अब मैनेजर कहा जाएगा. रेलवे बोर्ड ने सभी जोन के महाप्रबंधक को को इसके लिए निर्देश जारी कर दिया गया है. 1900 ग्रेड पे पर तैनात असिस्टेंट गार्ड अब असिस्टेंट पैसेंजर ट्रेन मैनेजर, 2800 ग्रेड पे पर तैनात गुड्स गार्ड अब गुड्स ट्रेन मैनेजर, 4200 ग्रेड पे पर तैनात सीनियर गुड्स गार्ड अब सीनियर गुड्स ट्रेन मैनेजर, 4200 ग्रेड पे पर तैनात सीनियर पैसेंजर गार्ड अब सीनियर पैसेंजर ट्रेन मैनेजर तथा 4200 ग्रेड पे पर तैनात एक्सप्रेस गार्ड, एक्सप्रेस ट्रेन मैनेजर कहलाएंगे.

आपको बता दें कि रेलवे कर्मचारी संगठन के द्वारा लगातार गार्ड का नाम बदलने को लेकर मांग किया जा रहा था.आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन ने बोर्ड के साथ बैठक में इस मुद्दे को एक बार फिर से उठाया गया था. इस मांग को बोर्ड ने स्वीकार कर लिया.

एआईआरएफ के संयुक्त महामंत्री और एनई रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री केएल गुप्त रेलवे बोर्ड के इस निर्णय का काफी ज्यादा सम्मान किया है और उन्होंने बताया कि नए पद से गार्ड के नाम का सम्मान बढ़ जाएगा. इसके साथ ही साथ कई बड़े अफसरों ने रेलवे गार्डों को इसके लिए बधाइयां भी दी है.

जहाज की तरह 40 बोगियों में लगे वैक्यूम ग्रीन टॉयलेट-

बता दें कि अब एरोप्लेन के जैसे ट्रेन की बोगियों में भी बायो टॉयलेट की जगह इको फ्रेंडली बायो वेक्यूम ग्रीन टॉयलेट बनाया जाएगा. रेलवे ने अभी तक पूर्वोत्तर रेलवे के 40 ट्रेनों में सुविधा को शुरू कर दिया है और साथ ही साथ अन्य ट्रेनों में भी सुविधा को शुरू करने का तैयारी शुरू किया गया है.गोरखपुर के साथ-साथ 40 स्टेशनों पर पे एंड यूज प्रसाधन केंद्र की सुविधा उपलब्ध है. गोरखपुर, वाराणसी, बनारस, काशीपुर, काठगोदाम, रूद्रपुर सिटी हल्द्वानी में मशीनें लगा दी गई हैं.