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Gorakhpur news- आशिक मिजाज दरोगा प्रकरण: हनक में दागदार हो गई खाकी वर्दी, दस पुलिसकर्मियों समेत 12 के खिलाफ केस दर्ज

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आशिक मिजाज दरोगा की हरकतों पर लगाम न लगाने और युवती की शिकायतों की अनदेखी के मामले में रविवार को कई  पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई। शासन ने तत्कालीन सीओ को निलंबित कर दिया। वहीं पीड़िता की तहरीर पर दस पुलिसकर्मियों समेत 12 के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इनमें पूर्व कोतवाल, महिला थाने की पूर्व प्रभारी, तीन दरोगा, पांच सिपाही, कानूनगो व लेखपाल शामिल हैं।

आशिक मिजाज दरोगा प्रकरण में कार्रवाई का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। घटना के समय सीओ सिटी रहे गिरीश सिंह को शासन ने निलंबित कर दिया। वह कानपुर में तैनात थे। वहीं, पीड़िता की तहरीर पर मुख्य आरोपित दरोगा दीपक सिंह, उसके भाई दरोगा राजन सिंह मूल निवासी सोनबरसा बाजार, चौरीचौरा, गोरखपुर, पूर्व कोतवाल रामपाल यादव मूल निवासी गाजीपुर, पूर्व महिला थाना प्रभारी शीला यादव मूल निवासी बलिया, दरोगा अभिषेक सिंह, कानूनगो सतीश, हल्का लेखपाल शालिनी सिंह, आरक्षी पवन कुमार कुशवाहा, आलोक कुमार, संजय कुमार, महिला आरक्षी दीक्षा यादव, नीलम सिंह तथा दो-तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों पर संगीन आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। नवागत एसपी आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि मामले की उच्चस्तरीय जांच हो रही है। नामजद पुलिसकर्मियों को निलंबित करते हुए लाइनहाजिर कर दिया गया है।

प्रकरण के मुख्य किरदार दरोगा दीपक सिंह और जांच के दायरे में आए पुलिस तथा प्रशासन के अन्य कर्मियों पर शासन का शिकंजा कस गया है। एसपी हेमराज मीणा को हटाने के बाद तत्कालीन सीओ सिटी गिरिश कुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया है। उनका एक महीने पहले कानपुर स्थानांतरण हुआ था।

उधर, शनिवार देर रात पीड़िता ने शहर कोतवाली में तहरीर दी थी, जिस पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एसपी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि कोतवाली में दर्ज मुकदमे की जांच सीओ सिटी आलोक प्रसाद को सौंपी गई है। कुशीनगर में एयरपोर्ट से संबद्ध दरोगा दीपक सिंह और कोतवाल रामपाल यादव को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।

 

आईजी से मिली पीड़िता

शिकायतकर्ता युवती परिजनों के साथ रविवार को भी आईजी कार्यालय पहुंची। यहां उसने आईजी अनिल कुमार राय को घटना के संबंध में दस्तावेज दिए। आईजी ने पीड़िता से कई सवाल भी किए।

यह था मामला
आरोप के मुताबिक, लॉकडाउन के दौरान बिना मास्क लगाई एक लड़की को कोतवाली क्षेत्र की चौकी सोनूपार के इंचार्ज दीपक सिंह ने रोका और चालान न करने के एवज में उसका मोबाइल नंबर ले लिया। उसके बाद दरोगा युवती को अश्लील मैसेज भेजने लगा। विरोध करने में उसने फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। इसी बीच, युवती के गांव में चकरोड के लिए विवाद हो गया। इस मामले में ग्रामीणों ने दरोगा को बंधक बना लिया था। ग्रामीणों के साथ ही युवती के परिवार वालों पर भी मुकदमा दर्ज किया गया। युवती ने अश्लील मैसेज प्रकरण की जानकारी देते हुए दरोगा द्वारा फर्जी मुकदमे में फंसाने की शिकायत की।  दरोगा दीपक सिंह पर अपने पद का दुरुपयोग करने की गूंज शासन तथा राज्य महिला आयोग तक पहुंची। उसके बाद प्रमुख सचिव गृह स्तर से एडीजी गोरखपुर जोन अखिल कुमार की अगुवाई में स्पेशल जांच टीम गठित कर दी गई। शनिवार को एडीजी खुद गांव पहुंचे थे। करीब सात घंटे तक टीम ने शिकायतकर्ता युवती के साथ उसके परिजनों और गांव के लोगों से पूछताछ कर बयान दर्ज किया। इसके कुछ देर बाद शासन स्तर से एसपी हेमराज मीणा को हटा दिया गया। एडीजी अखिल कुमार के निर्देश पर आरोपी दरोगा दीपक सिंह और कोतवाल रामपाल यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।

 

आईजी से मिली पीड़िता

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