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Gorakhpur news- कोविड महामारी के एक साल: जरूरत पड़ी तो अस्पतालों में बढ़े थे संसाधन, अब फिर आएंगे काम

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कोविड महामारी लगभग खत्म होने को थी कि इसका संक्रमण फिर बढ़ने लगा है। एक साल पहले जब कोरोना का संक्रमण फैलना शुरू हुआ था तो इससे लड़ने के लिए बेहद कम संसाधन थे। लेकिन जरूरत के हिसाब से सुविधाएं जुटाई और बढ़ाई गईं। इसका लाभ लोगों को मिला। अधिक से अधिक लोगों का इलाज किया गया और जानें बचाईं गईं। यही संसाधन एक बार फिर काम आएंगे।

बीआरडी को मिले 140 वेंटिलेटर

पूर्वांचल में कोविड-19 से पहले युवक की मौत बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले साल 31 मार्च को हुई थी। तब युवक का इलाज करने वाले डॉक्टर से लेकर कर्मचारी तक सभी डरे हुए थे। जिले में 26 अप्रैल को जब पहला मरीज मिला तो करीब 10 दिनों तक वह मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में भर्ती रहा। ठीक होकर जब घर गया तो स्वास्थ्य कर्मियों का हौसला बढ़ा।

इसके बाद बीआरडी में अलग से कोविड वार्ड बनाए गए। 140 बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा शुरू की गई। वेंटिलेटर प्रदेश सरकार ने उपलब्ध कराए। इसके बाद लगातार मरीजों का इलाज होता रहा और वे ठीक होकर घर गए। बीआरडी में 500 बेड का कोविड वार्ड अब भी बना हुआ है।

 

प्रदेश का पहला सबसे बड़ी बीएएसएल थ्री लैब मिली

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में प्रदेश की सबसे बड़ी बीएसएल थ्री लैब मिली। ढाई करोड़ की लागत से करीब 2200 स्क्वायर फीट में बनी इस प्रयोगशाला में सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। लैब में जांच के लिए कई आधुनिक मशीनें भी हैं। इसी लैब में कोरोना वायरस की जांच की जा रही है।   

दो आरटीपीसीआर और दो आरएनए मशीनें मिलीं
कोरोना मरीजों की जांच के लिए जब बीआरडी को नोडल बनाया गया तो पूर्वांचल के आठ जिलों से प्रतिदिन हजारों नमूने जांच के लिए आने लगे। केवल एक आरटीपीसीआर मशीन होने से जांच में देरी हो रही थी। इस पर शासन ने दो आधुनिक आरटीपीसीआर मशीनें उपलब्ध कराईं। साथ ही जांच में सुविधा के लिए दो आरएनए स्ट्रक्चर मशीन भी दी। इसके बाद एक दिन में दो हजार के करीब जांचें होनी लगीं।

बीआरडी में बना किट सेंटर
बीआरडी में कोरोना की जांच के लिए किट सेंटर बनाया गया। यहीं से आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज, बस्ती मेडिकल कॉलेज सहित आरएमआरसी को किट जा रही है। यह काम पिछले आठ महीनों से जारी है। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि अभी किट की सप्लाई जारी रहेगी, क्योंकि केस लगातार बढ़ रहे हैं।

 

जिला अस्पताल को भी मिले वेंटिलेटर

जिला अस्पताल में 19 बेड का कोविड वार्ड बनाया गया था। इनमें चार बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा थी। सभी बेड पर ऑक्सीजन की भी सुविधा थी। यह वार्ड अब भी काम कर रहा है। इसके अलावा 100 बेड टीबी अस्पताल में 15 बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा जिला अस्पताल में जांच के लिए ट्रूनेट मशीनें मिली, जिनसे जांच की जा रही है।

निजी अस्पतालों ने भी बढ़ाए वेंटिलेटर
कोविड महामारी के बीच निजी अस्पतालों ने जब कोविड मरीजों का इलाज शुरू किया तो काफी हद तक राहत मिली। पनेशिया हॉस्पिटल में 40 बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध थी। फातिमा हॉस्पिटल में 25 बेड के वेंटिलेटर, आर्यन में 10, गर्ग में पांच बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध थी। इसके अलावा सामान्य कोविड मरीजों के लिए भी बेड थे। छह निजी लैबों में जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। इसका असर यह हुआ कि काफी हद तक बीआरडी से बोझ कम हो गया।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि कोरोना महामारी के बीच काफी संसाधन बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बढ़ाए गए। इसकी वजह से मरीजों का इलाज और कोविड जांच में तेजी आई। इन्हीं संसाधनों के भरोसे कोविड से लड़ाई जारी है। लोग सतर्क रहें और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते रहें।

सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि कोरोना महामारी के बीच काफी संसाधन बढ़े। इन्हीं से लड़ाई जारी है। अभी कोरोना खत्म नहीं हुआ है। इसलिए लोग सतर्क रहें और सुरक्षित रहते हुए लोगों को मास्क पहनने के लिए जागरूक करते रहें।

 

प्रदेश का पहला सबसे बड़ी बीएएसएल थ्री लैब मिली

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