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Gorakhpur news- गोरखपुर: पंजाब के व्यापारी ने साथियों संग की थी स्वर्ण कारोबारी से लूट, तीन गिरफ्तार

विस्तार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के राजघाट इलाके के पांडेयहाता के पास दो मार्च को अमृतसर के स्वर्ण कारोबारी सुरेंद्र सिंह से हुई लूट का सोमवार को पुलिस ने पर्दाफाश किया। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वारदात को पंजाब के ही एक स्वर्ण व्यापारी ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर अंजाम दिया था।

पुलिस ने आरोपियों के पास से तकरीबन 26 लाख का गला हुआ शुद्ध सोना, 1.20 लाख रुपये नकद, लूट की रकम से खरीदी गई दस लाख रुपये की कार, वारदात में इस्तेमाल स्कूटी, लाइसेंसी पिस्टल, अवैध पिस्टल व कारतूस बरामद किया है। पुलिस आरोपियों पर गैंगस्टर और एनएसए के तहत कार्रवाई करेगी।

 

उधर, घटना का पर्दाफाश करने पर प्रमुख सचिव गृह ने पुलिस टीम को एक लाख और एसएसपी ने 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषण की है। आरोपियों की पहचान अमृतसर के न्यू अंतरयामी कॉलोनी निवासी सरदार संतोख सिंह उर्फ हीरा, राम कॉलोनी गुरुदासपुर निवासी प्रदीप कुमार भारद्वाज और संतकबीरनगर के धनघटा निवासी राजू उर्फ राजकुमार के रूप में हुई है।

एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने पुलिस लाइंस में प्रेस कांफ्रेंस कर पकड़े गए बदमाशों के बारे में जानकारी दी। एसएसपी ने बताया कि संतोख उर्फ हीरा की अमृतसर (पंजाब) में हर्ष ज्वेलर्स के नाम से दुकान है। वह भी गोरखपुर में पिछले 25 साल से कारोबार के सिलसिले में आता था। 27 फरवरी को वह गोरखपुर अपने एक साथी प्रदीप के साथ आया था। खुद सराफ भवन में रुका और प्रदीप को होटल में ठहराया था।

उसे मालूम था कि पंजाब से व्यापारी आते हैं और उनके पास सोना होता है। सुरेंद्र भी सराफा भवन से थोड़ा आगे राधेश्याम गेस्ट हाउस में रुके थे। वारदात के  दिन मंगलवार को बाजार बंदी और भीड़ कम होने की वजह से चुना गया। सुरेंद्र उसी दिन बंधु सिंह पार्क के पास नाश्ता करने गए थे। उस समय संतोख ने भी प्रदीप के साथ वहीं पर नाश्ता किया और उसे पता चला कि सुरेंद्र अमृतसर से आए हैं। थोड़ी देर बाद सुरेंद्र पैदल निकले और प्रदीप उनके पीछे लग गया।

संतोख साथी राजू द्वारा दिलाई स्कूटी से पीछा करने लगा। ट्रांसपोर्ट नगर में सुरेंद्र बस पर सवार हुए तब दोनों स्कूटी से बस के पीछे लग गए। संतकबीरनगर में सुरेंद्र ने कई दुकानों में सामान बेचा। इसी बीच जब वे जा रहे थे तो दोनों ने लूट की कोशिश की, लेकिन अचानक सुरेंद्र मुड़ गए। भीड़ की वजह से दोनों लूट को अंजाम नहीं दे पाए। इसके बाद पीछा करते हुए पांडेयहाता तक आए और यहां अकेला पाकर लूट को अंजाम दिया। राजू थोड़ी दूरी पर था। उसने ही गली में आने की जानकारी दी थी।

वारदात के बाद तीनों स्कूटी से राजू के मामा के घर संतकबीरनगर चले गए। रात वहां गुजारने के बाद संतोख और प्रदीप बस से लखनऊ और दिल्ली होते हुए पंजाब चले गए थे। दोबारा सात मार्च को संतोख पंजाब से अपना सामान लेने सराफा भवन आया था। इस बीच दोनों बदमाश राजू से मिलने के लिए हाबर्ट बंधे के पास आए थे, तभी पुलिस ने सूचना के आधार पर दबोच लिया।

 

क्षेत्रीय राजनीति के अलावा सत्ताधारी विधायक का करीबी है संतोख

संतोख पिछले तीन साल से राजनीति में सक्रिय था। वह कोई पद भी पा गया था और पंजाब में सत्ताधारी पार्टी के विधायक के साथ भी कामकाज करने लगा था। सोने-चांदी की दुकान होने की वजह से उसकी पहचान व्यापारी के तौर पर पहले से थी। असलहों का शौकीन होने के साथ ही सोशल मीडिया पर उसकी कई फोटो भी मौजूद है।

अमृतसर कमिश्नर को पत्र भेजकर असलहा लाइसेंस कराएंगे रद्द
एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि संतोख के पास लाइसेंसी असलहा है। ऑल इंडिया लाइसेंस होने की जानकारी दी है। हालांकि वह लाइसेंस नहीं दिखा पाया है। लाइसेंस को निरस्त कराने के लिए अमृतसर के कमिश्नर को पत्र भेजा जाएगा।

संतोख और प्रदीप पर दर्ज हैं मुकदमे
संतोख पर अपहरण कर पिटाई करने का एक केस दर्ज है, फिर भी उसे असलहे का लाइसेंस मिल गया है। प्रदीप पंजाब का भगोड़ा है। बहन-बहनोई के खुदकुशी करने के मामले में वह उकसाने का आरोपी है। इसके अलावा मारपीट समेत चार मुकदमे उस पर दर्ज हैं। उससे पूछताछ करने के लिए पंजाब पुलिस भी आने वाली है।

 

सीसीटीवी कैमरे की मदद से हुआ खुलासा

घटना का पदार्फाश करने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे का सफल इस्तेमाल किया। जिस बंधु सिंह पार्क के पास सुरेंद्र और आरोपी नाश्ता साथ में किए थे, वहां की एक सीसीटीवी फुटेज पुलिस को मिल गई थी, जिसमें आरोपियों का चेहरा साफ था। आने-जाने के दौरान सुरेंद्र की संतोख से कुछ जान पहचान भी हो गई थी। इस वजह से देखते ही उसने पहचान भी लिया था। घटनास्थल के पास से भी सीसीटीवी कैमरे का फुटेज मिल गया था। सर्विलांस व दूसरों माध्यमों का इस्तेमाल कर पुलिस आरोपितों तक पहुंच गई।

राजू है मास्टरमाइंड, बोला था इतनी दूर नहीं जा पाएगी पुलिस
पुलिस ने स्वर्ण कारोबारी से लूट का पर्दाफाश करते हुए जिस संतकबीरनगर के राजू उर्फ राजकुमार को पकड़ा है, वही पूरे घटना का मास्टरमाइंड है। लूट की साजिश तो सरदार संतोख ने रची थी, मगर उसने बताया था कि गोरखपुर में अगर वारदात कर पंजाब चले जाओगे तो कोई नहीं पकड़ पाएगा। मुख्यमंत्री का शहर होने की वजह से पुलिस जल्द पर्दाफाश करने के चक्कर में किसी अन्य को पकड़ सकती है। उसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर इतना बड़ा सवाल खड़ा करते हुए वारदात के लिए दोनों को तैयार किया था।

आपस में बांट लिए थे रुपये
पुलिस को संतोख ने बताया कि लूट से उसके हाथ 1.3 किलो सोना लगा था, जिसे गलाने के बाद 600 ग्राम हुआ था। इसमें से पुलिस ने लगभग आधा किलो सोना बरामद किया है। लूट की रकम से ही दस लाख की कार खरीदी थी और करीब दो लाख रुपये राजू को दिया था। प्रदीप को सोना बिकने पर रकम देने की बात कही थी, मगर इसके पहले ही पकड़ लिए गए। संतकबीरनगर का राजू टाइल्स मजदूरी का काम करता है। संतोख के गोरखपुर आने के दौरान ही उसकी मुलाकात उससे हुई थी। शराब का आदी होने के कारण कुछ रुपये संतोख उसे दे देता था। लूट की साजिश रचने के दौरान लोकल में गाड़ी के लिए राजू को साथ रखा था।

 

क्षेत्रीय राजनीति के अलावा सत्ताधारी विधायक का करीबी है संतोख

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