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Gorakhpur news- गोरखपुर: यहां एक ही गिरोह ने की थी तीन हत्याएं, जानिए कैसे रची थी खौफनाक साजिश

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गोरखपुर जिले के गगहा इलाके में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे पूर्व बसपा नेता रितेश मौर्या, फिर व्यापारी शंभू मौर्या और उनके कर्मचारी संजय पांडेय की हत्या 2013 में गगहा में ही हुए तिहरे हत्याकांड के अभियुक्त सन्नी सिंह के गिरोह ने की थी। फिलहाल, पुलिस ने गिरोह के छह लोगों को गिरफ्तार कर शूटर की पहचान कर ली है। रितेश को तिहरे हत्याकांड के वादी की मदद करने और शंभू को रंगदारी देने से इनकार करने की वजह से मौत के घाट उतारा गया।

जानकारी के मुताबिक, सन्नी सिंह ने दोस्त युवराज सिंह के साथ मिलकर दोनों घटनाओं को अंजाम दिया था। दोनों अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। दोनों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से एक पिस्टल, तीन कारतूस, दो तमंचा, पांच कारतूस, एक स्कार्पियो और दो बाइक बरामद कर ली गई है।

आरोपियों की पहचान गगहा के हटवा निवासी वेदप्रकाश सिंह, अमित सिंह, अभिषेक सिंह उर्फ हैप्पी सिंह, खोराबार के डांगीपार निवासी राजू चौधरी, गगहा के मेहदियां निवासी विशाल सिंह उर्फ कल्लू सिंह, गगहा के मंझरिया निवासी आकाश यादव के रूप में हुई है। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने पुलिस लाइंस सभागार में प्रेस कांफ्रेंस कर घटना का पर्दाफाश किया।

घटना का पर्दाफाश करते एसएसपी दिनेश कुमार पी।
– फोटो : अमर उजाला।

एसएसपी ने बताया कि गिरोह के छह सदस्यों को पुलिस ने पकड़ा है, जिन्होंने पूछताछ में कुबूल किया कि सन्नी, खुद पर दर्ज तिहरा हत्या के केस को खत्म कराने के लिए पीड़ित कन्हैया पर दबाव बना रहा था। वह तैयार हो गया था। मगर रितेश ने कन्हैया की मदद की और उसे पुलिस सुरक्षा मिल गई और वह केस वापस लेने से मुकर गया। इससे नाराज होकर उसने रितेश की हत्या कर दी। वहीं शंभू से सन्नी ने चार साल पहले मेरठ जेल से रंगदारी मांगी थी, लेकिन उसने मना कर दिया था, इस वजह से उसकी हत्या की थी। कर्मचारी संजय ने आरोपितों को देख लिया था, लिहाजा उसे भी गोली मारकर मौत के घाट उतारा दिया था।

एसएसपी ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया है कि उन्होंने दोनों हत्या की साजिश वेदप्रकाश सिंह के पोल्ट्री फार्म पर बनाई थी। साजिश के मुताबिक सुनियोजित तरीके से मृगेंद्र सिंह उर्फ सन्नी सिंह एवं युवराज सिंह ने हत्या की घटनाओं को अंजाम दिया। हत्या की दोनों घटनाओं को अंजाम देने के बाद आरोपी, राजू चौधरी की स्कार्पियो से फरार हुए थे। स्कार्पियों में राजू के साथ ही आकाश भी मौजूद था। पूछताछ में यह पता चला कि बाइक से घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी स्कार्पियो से फरार हो जाते थे।

वर्ष 2013 में हुई थी कन्हैया के परिवार के तीन लोगों की हत्या
एसएसपी ने बताया कि 2013 में सन्नी सिंह व उसके भाई टिका सिंह ने गगहा के कन्हैया के परिवार के तीन लोगों की हत्या गोली मारकर महज इसलिए कर दी थी, क्योंकि उसने सन्नी से रस्सी के एवज में दस रुपये मांगे थे। इस घटना में दो अन्य लोग भी घायल हुए थे। इस मामले में सन्नी और उसके भाई टिका सिंह को जेल भेजा गया था। बाद में दोनों मेरठ जेल में शिफ्ट कर दिए गए थे। यहीं से सन्नी ने शंभू मौर्य से पांच लाख की रंगदारी मांगी थी, लेकिन शंभू ने उसी समय विरोध किया और पुलिस को तहरीर देकर केस दर्ज करा दिया था। तभी से सन्नी, शंभू से नाराज था। रितेश मौर्या क्योंकि कन्हैया की मदद कर रहे थे, और सन्नी को लग रहा था कि वह चुनाव जीत गए तो और प्रभावशाली हो जाएंगे, इस वजह से उनकी हत्या कर दी थी।

वेदप्रकाश करता था आर्थिक मदद, प्रिंस भी गिरोह का सदस्य

रितेश मौर्या की हत्या के बाद पुलिस का संदेह प्रिंस चंद और सन्नी सिंह पर गया था, लेकिन प्रिंस ने एक सीसी टीवी फुटेज दिखाया, जिसमें वह लखनऊ में दिख रहा था। जिस वजह से पुलिस ने उसे रंगदारी के मामले में जेल भेजा था और सन्नी की तलाश में जुट गई थी। इसी बीच सन्नी ने दोहरे हत्याकांड को अंजाम दे दिया। साजिश इतनी सटीक रची गई थी कि जिस समय वारदात को अंजाम दिया जा रहा था, प्रिंस ठीक उसी समय में लखनऊ में मौजूद था।
 
वसूली करने को आकाश और हैप्पी जाते थे
पता चला है कि सन्नी सिंह जेल से जब रंगदारी मांगता था तो उसके गिरोह के सदस्य आकाश और हैप्पी सिंह वसूली करने जाते थे, या फिर वे मोबाइल फोन को ले जाकर व्यापारी से बात कराते थे।
 
कई से रंगदारी वसूलने का भी संदेह
पुलिस को संदेह है कि कई अन्य लोगों से रंगदारी वसूली भी गई है, लेकिन कोई पुलिस में शिकायत लेकर नहीं आया। जिस वजह से सन्नी का मनोबल बढ़ता चला गया और वह गिरोह बनाकर रंगदारी मांगने लगा। पुलिस ने कन्हैया प्रकरण में अन्य गवाहों को भी सुरक्षा मुहैया करा दी है।

पुलिस की गतिविधि पर रखते थे नजर

जांच में पता चला है कि गिरोह के सदस्य पुलिस की हर गतिविधि पर नजर रखते थे। वेदप्रकाश इसमें सबसे आगे था। निगरानी कर मुखबिरी करते थे और सन्नी को बताते थे। वहीं चर्चा है कि रितेश की हत्या के बाद उस समय के थानेदार, एसओजी आदि पुलिसकर्मियों को भनक लग गई थी कि इसमें सन्नी का हाथ है। किसी कारण से पुलिस दूसरे बिंदु पर काम करने लगी और फिर दोहरा हत्याकांड हो गया।
 
पहले भी जेल जा चुके हैं आरोपी
वेदप्रकाश पर बलवा, मारपीट और धमकी देने का एक केस दर्ज है। विशाल पर मारपीट, धमकी, बलवा, डकैती की कोशिश का केस है। आकाश पर छेड़खानी और पॉक्सो एक्ट का केस है। अभिषेक सिंह पर हत्या की कोशिश का एक केस दर्ज है। राजू चौधरी पर तीन केस हैं। हत्या की कोशिश का एक, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का एक और एक केस धमकी देने का दर्ज है। 

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