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Gorakhpur news- शर्मनाक: सड़क पर फेंकी मिली नवजात बच्ची, थानेदार बोले- जांच के बाद दर्ज किया गया जाएगा केस

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गोरखपुर के सहजनवां इलाके में सहजनवां सीएचसी के पास शुक्रवार को एक नवजात बच्ची सड़क पर फेंकी हुई मिली। फेंके जाने से नवजात को चोट लग गई थी। उधर से गुजर रहे बोक्टा निवासी लालू यादव की नजर पड़ी तो उसे सीएचसी ले गए और इलाज कराया।

इस बीच सूचना पर पहुंची पुलिस ने चाइल्ड केयर सेंटर से संपर्क कर बच्ची को वहां भेजवा दिया। थानेदार का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।  

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर 12 बजे के करीब बोक्टा निवासी लालू यादव सीएचसी सहजनवां में इलाज कराकर थाना गेट की तरफ से जा रहे थे। पास में ही सड़क पर एक नवजात बच्ची पर नजर पड़ी। वह रो रही थी। वहां पर कई लोग एकत्र हो गए, लेकिन कोई भी बच्ची के बारे में जानकारी नहीं दे पाया। जिसके बाद लालू उसे लेकर सीएचसी पहुंचे और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आस्था पांडेय से उसका इलाज कराया।

इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक सतीश सिंह का कहना है कि स्थानीय थाने को सूचना दी गई थी। पुलिस ने बच्ची को चाइल्ड केयर सेंटर गोरखपुर भिजवा दिया है।

 

इस तरह के मामलों में पुलिस नहीं दर्ज करती एफआईआर

नियमानुसार ऐसे मामलों में केस दर्ज करने का प्रावधान है। इसमें आरोपित को सात साल तक की सजा हो सकती है। लेकिन, पुलिस केस दर्ज करने में ही आनाकानी करती है। इसके पहले गोला, चौरीचौरा और सहजनवां इलाके में इस तरह के मामलों में केस तो दर्ज किया गया, लेकिन काफी हीलाहवाली के बाद। पुलिस कई बार वादी ना होने का हवाला देकर मामले को टाल देती है, जबकि पुलिस चाहे तो खुद ही केस दर्ज करा सकती है।

इस धारा में होनी चाहिए कार्रवाई

धारा-315 आईपीसी: शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के पश्चात मृत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य ।

सजा:दस वर्ष तक कारावास और आर्थिक दंड

धारा-317 आईपीसी: माता-पिता या नवजात की देखरेख करने वाले व्यक्ति द्वारा 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना अपराध है।

सजा: सात साल की सजा या फिर जुर्माना, या फिर कैद और जुुर्माना दोनों

धारा- 318 आईपीसी: पैदाइश छिपाने के लिए नवजात को गोपनीय तरीके से जीवित अथवा मृत फेंकना अपराध है।

सजा: दो साल की कैद या जुर्माना, या फिर कैद और जुर्माना दोनों।

सहजनवां प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा ने कहा कि बच्ची का इलाज कराकर चाइल्ड केयर भेज दिया गया है। तस्करा भरा गया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद केस दर्ज किया जाएगा।

इस तरह के मामलों में पुलिस नहीं दर्ज करती एफआईआर

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