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Gorakhpur news- Petrol Prices 30 May: गोरखपुर में बढ़े पेट्रोल के दाम, जानिए कितना हुआ दाम

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गोरखपुर में पेट्रोल के दाम रविवार को 91.56 रुपये तक पहुंच गए। 20 से 31 मई के बीच शहर में पेट्रोल की कीमतें 95 पैसे तक बढ़ाई जा चुकी हैं। पेट्रोल के दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं में परेशानी दिखी लेकिन कुछ लोगों ने इसे देश हित में उठाया जाने वाला कदम बताया। अधिकतर लोगों में दाम बढ़ाए जाने के लिए पेट्रोलियम कंपनियों के खिलाफ रोष भी दिखा।  

उनवल निवासी सूरज शाह रविवार को पेट्रोल भरवाने पहुंचे तो दाम 91.56 रुपये लीटर देखकर गुस्से में आ गए। बोले कि दस दिन पहले कार का टैंक 3157 रुपये में फुल करवाया था। आज उतने ही तेल के लिए 3204 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। छह माह पहले उनकी इस कार का टैंक (35 लीटर) 2850 रुपये में भर जाता था। कंपनियां बिना किसी कारण के लगातार पेट्रोल के दाम बढ़ा रही हैं। लॉकडाउन में रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण वाहन मालिकों का बजट बिगड़ रहा है।

मोहद्दीपुर निवासी अनूप कुमार कहते हैं कि सरकार ने पेट्रोल कंपनियों को नियंत्रण मुक्त कर दिया है यानी अब यह कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए काम कर रही हैं। सरकार पेट्रोलियम पदार्थों को अन्य उत्पादों की तरह जीएसटी के दायरे में क्यों नहीं ला रही है? सरकार ने निजी कंपनियों को भी पेट्रोल बेचने और आउटलेट खोलने की इजाजत दे दी है। यदि दाम कम हुए तो इन निजी कंपनियों का मुनाफा भी कम होगा। आरोप लगाया कि इसीलिए सरकार कंपनियों के दाम नियंत्रित नहीं कर रही हैं।

तिवारीपुर के रहने वाले अरुण शर्मा पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ाने को क्रॉस सब्सिडी और कल्याण कार्यों के लिए धन जुटाने की सरकार की रणनीति के रूप में देखते हैं। अरुण कहते हैं कि कोरोना लॉकडाउन के कारण बाजार, उद्योग, उत्पादन बंद हुए हैं। रोजगार भी घटे हैं। इस कारण सरकार के राजस्व के स्रोत घट रहे हैं। जनता को चिकित्सा सुविधा, खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए सरकार को अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने से जो राजस्व प्राप्त हो रहा है वह जनता की भलाई में ही खर्च हो रहा है।  

पेट्रोल के दाम बढ़ने से नाराज राजू सैनी कहते हैं कि सरकार आम जनता पर अप्रत्यक्ष कर के बोझ बढ़ाती जा रही है। सरकारी पेट्रोल कंपनियां चार हजार करोड़ रुपये का मुनाफा कमाती हैं, इनमें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने ही अकेले 21 हजार करोड़ का मुनाफा कमाया है।

उनका कहना है कि इन विपरीत परिस्थितियों में तो सरकार को इन कंपनियों पर नकेल कसनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते नहीं हैं लेकिन कंपनियां रोजाना कुछ पैसे बढ़ा देती हैं, सरकार को कंपनियों की इस मुनाफाखोरी पर रोक लगानी चाहिए।

 

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