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Lucknow news- अमर उजाला ग्राउंड रिपोर्ट: कोरोना मरीजों के लिए तैयार किए गए आइसोलेशन कोच बन रहे मुसीबत  

सार
भारत में जब कोरोना महामारी ने दस्तक दी तो सरकार ने भी इससे निपटने के लिए हर वो कदम उठाया जो उस समय जरूरी लगा। लेकिन अब उसके द्वारा उठाए गए कुछ कदम मुसीबत और पैसे की बर्बादी की दास्तां बयां कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण ने जिस गति से अपने पैर पसारे थे लग रहा था कि हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। इसी आपाधापी में सरकार ने भारतीय रेल का सहारा लिया। मरीजों को आइसोलेशन में रखने के लिए रेलवे के कोच को आइसोलेशन कोच में तब्दील कर दिया गया। एक कोच को तैयार करने में सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर दिए। लेकिन अब ये कोच अलग-अलग स्टेशन की पटरियों पर खड़े होकर यात्रियों को निहार रहे हैं और यात्री इन्हें। रेलवे के इन कोचों की हालत अपने आप में एक कहानी बयां कर रही है। अपने थमे पहियों के साथ पटरी पर खड़े इन कोचों की हालत पर अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट…
 

विस्तार
आगरा: 56 लाख रुपये में बने 28 आइसोलेशन कोचों में जम गई धूल, आठ महीने से ताले ही नहीं खुले

आगरा में कोरोना संक्रमितों को भर्ती करने के लिए दो-दो लाख खर्च करके तैयार किए गए रेल के 28 कोचों में आठ माह में एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया है। आलम यह है कि बेड पर धूल की मोटी परत जम गई है। अप्रैल से कैंट स्टेशन के यार्ड में खड़े इन कोचों की खिड़कियों का पेंट उखड़ गया है। जिस टेप से खिड़कियां बंद की गई, वह भी हट चुकी है। ताले तक नहीं खुले हैं। आगे पढ़ें…

गोरखपुर: कोविड मरीजों के लिए बने रेलवे के कोचों का नहीं किया गया इस्तेमाल, आठ माह में नहीं खुले इसके ताले

कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती करने के लिए बनाए गए रक्षक रेलवे कोचों के आठ माह में ताले भी नहीं खुले। 140 बेड वाले 10 कोच नकहा जंगल स्टेशन पर आज भी मरीजों की सेवा के लिए तैयार हैं। यह आलम तब है, जबकि दो माह पहले तक कोरोना के मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करने के लिए बेड तक नहीं मिल रहे थे।  शुरुआती दौर में कोरोना के बढ़ते मरीजों के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने रेलवे कोच को आइसोलेशन वार्ड बनाने के निर्देश दिए थे। आगे पढ़ें…

मुरादाबाद: 22 आइसोलेशन कोचों में आठ माह में एक भी मरीज भर्ती नहीं
मुरादाबाद में अप्रैल-मई माह में रेलवे द्वारा तैयार किए आइसोलेशन कोचों में आठ माह बाद तक एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। चूंकि उस समय रेलवे ने तेजी से फैलती महामारी के दृष्टिगत आपातकालीन स्थिति के लिए ये कोच तैयार किए थे। इसलिए यह राहत की बात है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई कि इन कोचों में मरीजों को भर्ती करना पड़े। मुरादाबाद में दो एसी कोच समेत इस प्रकार के 22 कोच खड़े किए गए थे। आगे पढ़ें…

आइसोलेशन के लिए ट्रेन की बोगियों को किया तैयार
– फोटो : ANI

बरेली: आइसोलेशन वार्ड वाले कोच अब रेलवे की मुसीबत बनने लगे, नई ट्रेनों के संचालन में दिक्कत
प्रदेश सरकार की सहायता के लिए बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में बदले गए कोच में आठ महीने में एक भी कोविड मरीज भर्ती नहीं किया गया। अब कोरोना की दूसरी लहर होने से स्थानीय प्रशासन ये कोच हटाने का निर्णय नहीं ले पा रहा है। इससे सबसे अधिक दिक्कत रेलवे को हो रही है, कोच नहीं हटे तो ट्रेनों की संख्या बढ़ने पर उनके संचालन के लिए प्लेटफार्म खाली नहीं मिलेगा। आगे पढ़ें…

वाराणसी: रेलवे ने ट्रेन को बदला आइसोलेशन कोच में, पर नहीं हो सका प्रयोग
कोरोना संक्रमण को देखते हुए आइसोलेशन के लिए रेलवे ने भी तैयारियां की थीं। शुरुआती दौर में जब अस्पतालों में बेड की कमी होने की आशंका हुई तो रेलवे ने ट्रेनों की कई रैक को आइसोलेशन कोच में बदलवाया।  पूर्वात्तर रेलवे की ओर से जून में वाराणसी मंडल के दस स्टेशनों पर भी चिकित्सकीय सुविधाओं से लैस ग्यारह आइसोलेशन रैक लगाए गए। आगे पढ़ें…

झांसी: धूल खा रहे आइसोलेशन कोच, 560 की क्षमता पर भर्ती नहीं हुआ एक भी मरीज
कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आठ महीने पहले तैयार किए गए 70 आइसोलेशन कोचों का अब तक इस्तेमाल नहीं हो सका है। दस कोचों की एक ट्रेन भी प्लेटफार्म पर खड़ी है, लेकिन यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया। लाखों रुपये खर्च कर तैयार किए गए ये कोच अब धूल खा रहे हैं। इन कोचों में 560 मरीज भर्ती किए जा सकते थे। उत्तर मध्य रेल प्रशासन ने बढ़ती कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या को देखते अप्रैल में झांसी, आगरा व प्रयागराज मंडल में आइसोलेशन कोच तैयार किए थे। इनमें 70 कोच झांसी में तैयार किए गए थे। आगे पढ़ें…

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