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Lucknow news- अमेठी: कबाड़ में बिक गया राजीव गांधी का सपना, जानें पूरा मामला

अमेठी। एक दशक पूर्व मालविका स्टील प्लांट को खरीदने वाली सेल ने आखिरकार पुराने प्लांट व मशीनों को कबाड़ के भाव नीलाम कर दिया। दो माह पहले 61 करोड़ रुपये में हुई इस नीलामी के साथ ही अतीत की नींव पर रखी गई भविष्य की आधारशिला का तिलिस्म भी ढह गया। 740 एकड़ के बड़े भू-भाग पर फैले इस परिसर में मौजूदा समय टीएमटी बार मिल की एक छोटी इकाई संचालित हो रही है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने जगदीशपुर को इंडस्ट्रियल सिटी के रूप में विकसित करने का सपना देखा था। उन्हीं के कहने पर ऊषा ग्रुप के डायरेक्टर अनिल राय व विनय राय ने जिले के कमरौली स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में वर्ष 1989 में एशिया के सबसे बड़े स्टील प्लांट की स्थापना की थी।

मालविका के नाम से कंपनी की स्थापना के लिए ग्रुप ने यूपीएसआईडीसी से 740 एकड़ भूमि 99 साल की लीज पर ली थी। इस भूमि पर कंपनी स्थापित करने में उस समय 9,447 करोड़ रुपये खर्च हुए। कंपनी सन 2000 में बनकर तैयार हुई। कंपनी का संचालन शुरू हुआ तो इसमें 600 को लोगों को स्थाई व करीब 2000 लोगों को अस्थायी रोजगार मिला। हालांकि कुछ ही दिनों बाद ग्रुप ने इस कारखाने को बीमार करार देते हुए बंद कर दिया। कंपनी बंद होने से लोगों की उम्मीदें टूट गई। कारखाने में लगे तमाम हाथ बेकार हो गए। कई घरों के निवाले छिन गए। फाइनेंसर बैंक ने कारखाने पर अपने गार्ड तैनात कर दिए। गार्डों की अदला बदली के दौरान कुछ लोगों ने कंपनी को खोखला कर दिया।

लोगों की उम्मीदें 27 फरवरी 2009 को एक बार तब हरी हुईं, जब तत्कालीन सांसद राहुल गांधी ने बंद पड़ी मालविका फैक्ट्री को सेल द्वारा अधिग्रहीत किए जाने की घोषणा की। राहुल ने कहा कि सेल 450 करोड़ रुपये की लागत से कंपनी को वर्ष 2011 में शुरू करेगा। हालांकि सेल ने जनसभा के कुछ दिन बाद मनमानी करते हुए कंपनी शुरू करने के बजाए छोटी सरिया इकाई व बेयर हाउस की स्थापना की। वर्ष 2014 तक केंद्र में यूपीए की सरकार होने के बावजूद सेल द्वारा अधिग्रहीत परिसर में हलचल नहीं शुरू हुई। बाक्स

2019 में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने सेल को जल्द कंपनी का संचालन शुरू करने का निर्देश दिया। इसके बाद स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने पुराने प्लांट को शुरू करने के बजाए सितंबर 2019 में पहले से स्थापित की गई छोटी इकाई का संचालन शुरू कर दिया] लेकिन इसके बाद स्मृति ईरानी ने कोई खास रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने या उनके प्रतिनिधियों ने यह नहीं देखा जिस फैक्ट्री में कभी दो हजार कर्मचारी काम करते थे वहां सिर्फ 20 से 25 लोग ही काम कर रहे हैं।

सेल ने तीन दशक पूर्व हजारों करोड़ रुपये की लागत से स्थापित मशीनों को करीब दो माह पूर्व चौधरी एंड संस फोर्जिंग प्राइवेट लिमिटेड गाजियाबाद को मात्र 61 करोड़ रुपये की मामूली कीमत में नीलाम कर दिया। सेल की मशीनों को नीलामी पर लेने वाली कंपनी ने हसरत इंटर प्राइजेज को पेटी कांट्रैक्टर का काम देकर मशीनों को काट कर निकालने का काम शुरू कर दिया है। मालविका के नाम से स्थापित पुराने प्लांट की नीलामी के बाद अमेठी के लोगों का सपना चकनाचूर हो गया है।

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