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Lucknow news- उपचुनाव में हार का ठीकरा मुनकाद पर, भीम नए प्रदेश अध्यक्ष

बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने यूपी में विधानसभा की सात सीटों के उप चुनाव में एक भी सीट न जीत पाने के बाद पहला बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। मुस्लिम समाज से मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष मुनकाद अली को हटा दिया है। उनके स्थान पर पिछड़े वर्ग में राजभर समाज से पार्टी के पुराने कार्यकर्ता भीम राजभर को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। मायावती ने दीवाली के दूसरे दिन रविवार को नए प्रदेश अध्यक्ष का एलान ट्वीट कर किया। भीम राजभर वर्तमान में बिहार प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे थे। 

दरअसल, हाल में सात विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बसपा एक भी सीट नहीं जीत सकी। पार्टी के लिए चिंता की बात यह रही कि उसके दो प्रत्याशी चौथे और चार तीसरे स्थान पर रह गए। केवल एक प्रत्याशी दूसरे स्थान पर पहुंच पाया। दूसरी ओर, उपचुनाव में भाजपा अपनी सभी छह और सपा एक सीट पर कब्जा बरकरार रखने में कामयाब रही। एक और चुनाव में बसपा राज्य में तीसरे स्थान पर रह गई। मायावती ने भीम राजभर को पार्टी व मूवमेन्ट से जुड़े पुराने, कर्मठ व अनुशासित सिपाही के रूप में उल्लेख करते हुए नियुक्ति का एलान किया है।

जानकार बताते हैं कि इन उपचुनावों में पार्टी संगठन के बड़े नेताओं से लेकर निचले स्तर तक के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पार्टी नेताओं को भरोसा था कि बसपा इस उपचुनाव में सीट जीतेगी और 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सशक्त प्रदर्शन कर सत्ताधारी दल की मुख्य प्रतिद्वंदी के तौर पर पेश करने में सफल रहेगी। पर, उपचुनाव नतीजों ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसके बाद से बसपा में इस तरह के निर्णय की अटकलें लगाई जा रही थी। पार्टी अब दलित-मुस्लिम (डीएम) की जगह दलित-अन्य पिछड़ा वर्ग (डू) फॉर्मूले को तवज्जो और पिछड़ों पर फोकस देती नजर आए तो चौकने वाली बात न होगी।

मुस्लिमों का सपा की ओर झुकाव मुनकाद को पड़ा भारी
मायावती ने सात सीटों के उपचुनाव में दो सीटें मुस्लिम समाज के लोगों को दी थी। नौगावां सादात और बुलंदशहर। इनमें ही शामिल बुलंदशहर का उम्मीदवार नंबर दो पर रहा। दूसरी सीट नौगावां सादात का प्रत्याशी नंबर तीन पर रहा। इसके बावजूद बसपा ने मुस्लिम समाज से प्रदेश अध्यक्ष मुनकाद अली को हटाकर लोगों को चौकाया है। माना जा रहा कि बसपा रणनीतिकारों को उम्मीद थी कि यदि बसपा के कोर वोटर के साथ इन सीटों का मुस्लिम मतदाता जुड़ जाएगा तो पार्टी की जीत निश्चित है। लेकिन दोनों ही सीट नहीं निकली। पड़ताल में यह बात सामने आ रही है कि उपचुनाव में मुस्लिम समाज ने खुलकर सपा को तवज्जो दिया। जहां भी सपा के उम्मीदवार थे, बिना किसी दुविधा उन्हें तवज्जो दिया।

बुलंदशहर में बसपा प्रत्याशी इसलिए नंबर दो पर आ गया क्योंकि वहां सपा प्रत्याशी नहीं था और रालोद व कांग्रेस के साथ जिताऊ बेस वोट नहीं था। इसलिए वहां मुस्लिमों के सामने भाजपा के खिलफ केवल बसपा ही मुख्य प्रतिद्वंद्वी नजर आई जिसका उसे लाभ मिला। पार्टी के एक जिम्मेदार नेता बताते हैं कि नौगावां सादात में सपा प्रत्याशी था और मुस्लिम समाज से था। नतीजा यह हुआ कि बसपा प्रत्याशी केवल पार्टी के बेस वोट तक सीमित रह गया। यदि मुस्लिम बसपा के साथ होता तो सीट निकल आती। माना जा रहा है कि मुस्लिम समाज की यह बेरुखी मुनकाद की प्रदेश अध्यक्ष पद से विदाई की वजह बन गई।

वोट बैंक में गिरावट दूसरी बड़ी चिंता 

खास बात यह भी कि पार्टी के वोटबैंक में गिरावट का सिलसिला रुक नहीं रहा है। उपचुनाव में पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव से कम मत प्रतिशत पर ही ठिठक गई। 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को औसत 23.62 फीसद वोट मिले थे। उपचुनाव में यह 18.97 फीसद ही रह गई। 

राजभर समाज में नए चेहरे को उभारने की रणनीति
भीम राजभर अपने समाज में भी प्रदेश के लिए कोई बड़ा चर्चित नाम नहीं है। सिर्फ बसपा की बात करें तो यहां अब तक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर की गिनती ही असरदार राजभर नेताओं में होती रही है। लेकिन मायावती ने पिछड़े समाज में राजभर समाज से भीम के रूप में नया चेहरा देने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि पिछड़े वर्गों में बसपा की पकड़ अन्य जातियों की अपेक्षा राजभर समाज में कुछ ज्यादा है। 2017 की भाजपा लहर में भी पार्टी के दोनों राजभर विधायक चुनाव जीते। सुखदेव राजभर की बढ़ती उम्र और रामअचल के कुछ मुकदमों में उलझने की वजह से मायावती ने राजभर समाज से नया चेहरा आगे लाने का फैसला किया है। कम चर्चित लेकिन दो वरिष्ठ राजभर नेताओं की अपेक्षा कम उम्र के भीम पर मायावती ने बड़ा दांव लगाया है। 

मुख्तार से मुकाबला कर चुके हैं भीम
भीम राजभर 2012 के विधानसभा चुनाव में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी से मुकाबला कर चुके हैं। तब मुख्तार कौमी एकता दल से प्रत्याशी थे और मायावती ने भीम को उनके मुकाबले के लिए मैदान में उतारा था। भीम ने मुख्तार को कड़ी टक्कर दी थी और दूसरे नंबर पर रहकर 5900 वोटों से चुनाव हार गए थे। 

मुनकाद अली को उत्तराखंड का प्रभार
बसपा प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद पूर्व सांसद मुनकाद अली को उत्तराखंड का स्टेट कोऑर्डिनेटर बनाया गया है। वह प्रदेश में आगरा व अलीगढ़ मण्डल के मुख्य सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी पहले से देख रहे हैं। 

10 नवंबर, उपचुनाव नतीजे….

मल्हनी विधानसभा क्षेत्र
लकी यादव – सपा – 73468
धनन्जय सिंह – निर्दलीय – 68836
मनोज कुमार सिंह – भाजपा – 28840
जय प्रकाश दुबे – बसपा – 25180

बांगरमऊ
श्रीकांत कटियार – भाजपा – 71303
आरती बाजपेयी – कांग्रेस- 39983
सुरेश कुमार पाल – सपा- 35322
महेश प्रसाद – बसपा – 19062

बुलंदशहर
उषा सिरोही – भाजपा – 86645
मोहम्मद यूनुस – बसपा – 66943
मो. यामीन-आसपा- 13530
सुशील चौधरी – कांग्रेस- 10319
प्रवीण कुमार सिंह – रालोद – 7286

देवरिया
डॉ-सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी – भाजपा – 68732
ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी -सपा – 48645
अभयनाथ त्रिपाठी – बसपा – 22069
अजय प्रताप सिंह – निर्दलीय – 19282
मुकुंद भास्कर – कांग्रेस – 3692

घाटमपुर
उपेंद्र नाथ पासवान – भाजपा – 60405
डॉ. कृपाशंकर – कांग्रेस – 36585
कुलदीप संखवार – बसपा – 33995
इंद्रजीत कोरी – सपा – 22735

टूंडला 
प्रेमपाल सिंह धनगर – भाजपा – 72950
महाराज सिंह धनगर – सपा- 55267
संजीव कुमार चक – बसपा – 41010

नौगांव सादात
संगीता चौहान – भाजपा – 86692
जावेद आब्दी- सपा – 71615
फुरकान अहमद – बसपा – 38399
कमलेश सिंह – कांग्रेस – 4532

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