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Lucknow news- एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत कम फैसला है बर्ड फ्लू

एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता बर्ड फ्लू, चिकित्सा विशेषज्ञ बोले-इससे नहीं घबराएं

लखनऊ। बर्डफ्लू का असर कोरोना वायरस की तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं देखा गया है। इतना ही नहीं इसके इलाज की व्यवस्था भी है। जरूरत पड़ने पर पीसीआर मशीन से इसकी जांच की जा सकती है। ऐसे में चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। साफ सफाई रखें। पोल्ट्री फार्म में इसके लक्षण दिखें तो उनकी जांच कराएं। पशु चिकित्सक की जांच के बाद बीमार पक्षियों को गड्ढा खोदकर मिट्टी के नीचे दबा देना चाहिए।

एनफ्लूएंजा के कई स्वरूप होते हैं। इसके 11 वायरस हैं। इसमें पांच ऐसे हैं, जो जानलेवा साबित होते हैं। इन्हें एच5एन1, एच7एन3, एच7एन7, एच7एन9 और एच9एन2 शमिल हैं। अभी तक बर्ड फ्लू में एच5एन1 पाया गया है। केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि बर्ड फ्लू का इलाज भी अन्य फ्लू की तरह ही किया जाता है। इसके लिए गांधी वार्ड में अलग से वार्ड बना दिया गया है। यह सही है कि बर्ड फ्लू वायरस के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसका वायरस हवा से फैलता है। वायरस तेजी से म्यूटेशन भी करता है, लेकिन ऐसे मामले कम देखने को मिले हैं कि एच5एन1 एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में पहुंचता हो। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। सावधानी बरतें। यहां इलाज की सभी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

चीन से हुई शुरुआत

चीन के गुआंगडोंग में इंसानों को एच5एन1 बर्ड फ्लू वायरस ने पहली बार 1997 में संक्रमित किया था। अब तक एच5एन1 बर्ड फ्लू वायरस का यही म्यूटेशन वाला वायरस लगातार फैल रहा है। इसके दो स्वरूप एंटीजेनिक शिफ्ट और एंटीजेनिक डिफ्ट हैं। केरल में मिले बर्ड फ्लू के एच5एन8 स्ट्रेन को ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा हैं। ऐसे में यहां मुर्गे, मुर्गियों व बतखों को मार दिया गया है।

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