Home लखनऊ Lucknow news- एसजीपीजीआई में शुरू हुआ कृत्रिम त्वचा का प्रत्यारोपण

Lucknow news- एसजीपीजीआई में शुरू हुआ कृत्रिम त्वचा का प्रत्यारोपण

चोट लगने, कैंसर या संक्रमण की वजह से त्वचा पर पड़ने वाले दाग होंगे दूर

एसजीपीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने कृत्रिम त्वचा प्रत्यारोपण में सफलता पाई है। एक कैंसर मरीज का त्वचा प्रत्यारोपण सफल रहा है। इससे अब चोट लगने, संक्रमण की वजह से घाव होने अथवा कैंसर सर्जरी के बाद त्वचा पर पड़ने वाले दाग को दूर किया जा सकेगा। प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव अग्रवाल का दावा है कि किसी सरकारी संस्थान में यह प्रयोग पहली बार किया गया है।

बस्ती निवासी 78 वर्षीय बुजुर्ग को साल भर पहले मुंह की त्वचा का कैंसर हो गया था। पहले चरण में कैंसर वाले हिस्से को निकाला गया और दूसरे चरण में कृत्रिम त्वचा का प्रत्यारोपण किया गया। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि त्वचा प्रत्यारोपण में करीब चार घंटे लगे। कैंसरग्रस्त हिस्से को निकालने के बाद कृत्रिम त्वचा (इंटीगरा) लगाई गई। इससे सप्ताह भर में घाव भर गया। मरीज के चेहरे पर किसी तरह के निशान भी नहीं पड़े। अभी तक संबंधित व्यक्ति की जांघ के पास से त्वचा लेकर प्रत्यारोपित की जाती थी। इससे घाव तो भर जाता था, लेकिन कुछ समय बाद संबंधित स्थान पर गड्ढे जैसे निशान बन जाते थे।

क्यों पड़ती है जरूरत
डॉ. राजीव ने बताया कि आमतौर पर 3 से 4 सेंटीमीटर तक के घाव अपने आप भर जाते हैं, लेकिन बड़े घाव नहीं भर पाते हैं। ऐसे में वहां त्वचा प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। कृत्रिम त्वचा सभी तरह के छोटे आकार के घाव की प्लास्टिक सर्जरी में भी कारगर है। इसके प्रयोग से प्लास्टिक सर्जरी काफी सरल हो जाती है। घाव भरने में वक्त कम लगता है। खास बात यह है कि इस सर्जरी पर 30 से 50 हजार रुपये का ही खर्च आता है। हालांकि घाव यदि बड़े हैं और कृत्रिम त्वचा लगाने की ज्यादा जरूरत पड़ती है तो उसकी कीमत एक लाख तक पहुंच जाती है। अमेरिका सहित अन्य देशों में करीब 15 साल से इस तरह का प्रयोग किया जा रहा है।

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