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Lucknow news- करोड़ों की ठगी: मेडिकल में प्रवेश के नाम पर 15 करोड़ की ठगी, नीट देने वाले 26 लाख छात्रों का डाटा व नोट गिनने की मशीन मिली

एमबीबीएस व मेडिकल के पीजी में प्रवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश एसटीएफ ने शनिवार को किया। जांच एजेंसी ने गोमतीनगर के विजयंत खंड से गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से नीट में शामिल हुए 26 लाख छात्रों का डाटा और कई अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। 

एसटीएफ के प्रभारी एसएसपी अनिल कुमार सिसोदिया के मुताबिक जालसाजों ने गोमतीनगर में कार्यालय खोल रखा था। मेडिकल की पढ़ाई में प्रवेश के नाम पर ठगी की शिकायतें पुलिस को मिलीं थीं। इसके आधार पर एसटीएफ की साइबर क्राइम ब्रांच ने जांच कर तीनों  लोगों को दबोचा। सौरभ कुमार गुप्ता गिरोह का मास्टरमाइंड है। 

वह मूलरूप से दरभंगा, बिहार के माधोपट्टी का रहने वाला है। लखनऊ के चिनहट स्थित स्वपन लोक कॉलोनी में उसने आलीशान मकान बनवा रखा है। सौरभ राईज ग्रुप प्रा. लि. का डायरेक्टर है। अन्य आरोपियों में यूनिवर्सल कंसल्टिंग सर्विसेज का निदेशक व इंदिरानगर सेक्टर-19 निवासी डॉ. अजिताभ मिश्रा, राईज ग्रुप का महाप्रबंधक व नई दिल्ली संगम विहार निवासी विकास सोनी शामिल हैं। डॉ. अजिताभ मूलरूप से अमेठी का है। 

पूरे देश में नेटवर्क, 15 करोड़ की ठगी कुबूली

एसटीएफ के मुताबिक इस गिरोह का नेटवर्क पूरे देश में फैला है। आरोपियों ने पूछताछ में कुबूला है कि लोगों से 15 करोड़ रुपये ठग चुके हैं। जांच एजेंसी पता लगा रही है कि इनके पास नीट अभ्यर्थियों का डाटा कहा से आया। गिरोह में कई मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी व अधिकारियों के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है। जल्द उनकी भी गिरफ्तारी हो सकती है।  

 

नोट गिनने की मशीन मिली

आरोपियों के पास से नोट गिनने की मशीन, भारी मात्रा में स्टांप पेपर, शैक्षणिक दस्तावेज, कम्प्यूटर, लैपटॉप, एमबीबीएस व पीजी चार्ट शीट, मुहरें व एसयूवी बरामद हुई है।

फंसाने के लिए करवाते थे कॉल

आरोपियों ने बताया कि छात्रों को फंसाने के लिए गिरोह टेलीकॉलर से कॉल करवाते थे। उन्हें अपने कार्यालय बुलाकर प्रवेश का दावा कर रकम ऐंठते थे। यही नहीं उन्हें धोखे में रखकर एग्रीमेंट भी करवा लेता था। इसके बदले पांच-छह लाख रूपये की वसूली होती थी। आरोपियों ने कबूल किया कि वो पहले नीट में शामिल होने वाले छात्रों का डाटा निकलवाते थे। इसके बाद वहां से मोबाइल नंबरों पर कॉल कर प्रवेश के लिए पूछताछ करते थे। इसके लिए गिरोह ने टेलीकॉलर को हायर कर रखा था। 

 

नोट गिनने की मशीन मिली

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