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Lucknow news- कृषि कानूनों के कारण दबाव में नहीं आएगी भाजपा, विपक्ष को किसानों के मुद्दे पर घेरेगी, ये है रणनीति

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने किसानों के मुद्दे पर विपक्ष को अब उसी के कामों से घेरने की तैयारी की है। इसके लिए न सिर्फ  गैर भाजपा सरकारों के समय के आंकड़े जुटाकर साहित्य तैयार कराया जा रहा है, बल्कि खेती-किसानी के लिए चलाई गई योजनाओं और उनके क्रियान्वयन को लेकर भी घेरने की योजना है। विपक्ष को कठघरे में खड़ा करने के लिए भाजपा ने किसान नेता व पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह का भी सहारा लेने की रणनीति बनाई है।

भाजपा किसानों को अपनी सरकार के समय किसानों के लिए शुरू की गईं योजनाएं बताकर उन्हें बताएगी कि उससे ज्यादा उनका हितैषी दूसरे दल नहीं हैं। इसके लिए पूरे प्रदेश में अभियान चलाने की तैयारी है। अलग-अलग सरकारों में किसानों की आत्महत्याओं के आंकड़े भी जुटाए जा रहे हैं।

इनके सहारे लोगों को बताएंगे कि किसानों के साथ होने का दम भरने वाले विरोधी दलों की सरकारों में काफी ज्यादा किसानों ने आत्महत्याएं की हैं। खाद की किल्लत और कालाबाजारी के साथ दैवी आपदा में किसानों को पहले होने वाली दुश्वारियों तथा मोदी सरकार के द्वारा बदलाव करके उन्हें किसानों के लिए अधिक लाभप्रद बनाने के कामों के बारे में भी किसानों को जानकारी देने की तैयारी है।

विपक्ष की नीति से कराएंगे रूबरू

भाजपा किसानों को यह बताने की तैयारी भी कर रही है कि देश के इतिहास में सबसे ज्यादा समय 10 साल कृषि मंत्री रहे शरद पवार के कार्यकाल में सबसे अधिक किसानों ने आत्महत्याएं कीं। आज खेती में निजी क्षेत्र की भागीदारी का विरोध करने वाले शरद पवार सहित विपक्ष के सभी नेताओं ने समय-समय पर इसके पक्ष में तर्क दिए हैं।

राज्य की सपा-बसपा सरकारों ने भी कॉन्ट्रैक्ट खेती या कृषि को उद्योग का दर्जा देने जैसी बातों से इस दिशा में कदम उठाए थे। कांग्रेस ने भी अपनी सरकार व चुनाव के समय कमोबेश इन्हीं कानूनों की बात की थी।

पवार के पत्रों को भी जनता के बीच ले जाएगी भाजपा

भाजपा लोगों को यह भी बताने की तैयारी कर रही है कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने देश की कृषि विकास दर को 2.6 फीसदी से 4 फीसदी तक पहुंचाया था। पर किसानों के लिए बड़ी-बड़ी बातें करने वाले शरद पवार ने जब 2014 में पद छोड़ा तो यह माइनस 0.2 फीसदी पहुंच गई थी। इसे मोदी सरकार ने फिर ऊपर पहुंचाया है।

भाजपा पवार के उन पत्रों को भी जनता के बीच लेकर जाने की योजना बना रही है जो उन्होंने कृषि क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने का पक्ष लेते हुए लिखे थे। भाजपा ने किसान नेता पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह के सरोकारों के सहारे समीकरण साधने की भी तैयारी की है।

बताएंगे कि चौ. चरण सिंह के बाद उन्हीं की सरकार है जिसने खाद के दाम कम किए। बटाईदारों को भी कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का लाभ देकर उन्हें पहचान देने सहित अन्य कई काम करके चौधरी साहब के सपने को ही पूरा किया।

अपनी सरकार द्वारा किए गए फैसलों से अवगत करवाएगी

यह भी बताने की योजना है कि दैवी आपदा से होने वाले नुकसान के मुआवजे के लिए गैर भाजपा सरकारों के किन-किन जटिल नियमों के चलते किसानों को उसका लाभ नहीं मिलता था।

भाजपा सरकार ने आपदा राहत की राशि ही ढाई गुना बढ़ाया ही नहीं, बल्कि नुकसान के आकलन के लिए गांवों को मानक बनाकर और 33 प्रतिशत नुकसान पर भी उस इलाके के किसानों को मुआवजा देकर ज्यादा से ज्यादा किसानों को लाभ दिलाया।

किसान सम्मान निधि, समर्थन मूल्यों में बढ़ोतरी, गन्ना किसानों को पहले की सरकारों की तुलना में ज्यादा तेजी से भुगतान, नीम कोटेड यूरिया की बिक्री से इसकी कालाबाजारी पर अंकुश जैसे तमाम फैसलों की जानकारी देकर भी किसानों को विपक्ष की साजिश से सावधान करने की तैयारी है।

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