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Lucknow news- कोरोना टीकाकरण के प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन के लिए होगा टीम का गठन, बूथ स्तर से हो रही तैयारी

कोरोना टीकाकरण के बाद के प्रतिकूल प्रभाव से निपटने के लिए भी डॉक्टरों की टीम तैयार की जा रही हैं। एडवर्स इफेक्ट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन (एईएफआई) के प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य विभाग, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर टीमों का गठन हो रहा है। इसमें सरकारी के साथ ही निजी चिकित्सकों को भी शामिल किया जाएगा।

भारत सरकार ने राज्यों से कहा है कि वह कोरोना वायरस वैक्सीन से संबंधित दुष्प्रभावों से निपटने की व्यवस्था भी रखें। कोविड -19 टीकाकरण के बाद प्रतिकूल घटनाओं से निपटने के लिए सही रिपोर्टिंग और समय पर सूचना देने की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि टीकाकरण निगरानी प्रणाली में बूथ स्तर से सूचना तंत्र विकसित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीन का दुष्प्रभाव कुछ लोगों में संभव है। इन वजह से अन्य लोगों में कोई दुष्प्रचार न हो, इसके लिए मजबूत निगरानी और प्रबंध तंत्र जरूरी है।

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार दुष्प्रभाव से निपटने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञ भी टीकाकरण टीम का हिस्सा होंगे। इससे बिना समय खराब किए टीके के प्रतिकूल असर का प्रबंधन किया जा सके। संक्रमण के उच्च-जोखिम वाले समूहों में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, पल्मोनरी मेडिसिन विशेषज्ञ भी शामिल किए जाएंगे।

निजी चिकित्सकों को भी किया गया शामिल

प्रतिकूल असर की समय पर जानकारी व प्रबंधन के लिए जिला प्रतिरक्षण अधिकारी और जिला एईएफआई कमेटी को समन्वय करना होगा। यह नेशनल एईएफआई कमेटी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार को रिपोर्ट करेंगे। टीके के प्रतिकूल असर के प्रबंधन के लिए सरकारी व्यवस्था के साथ ही निजी चिकित्सकों को भी शामिल किया जाएगा।

प्रत्येक टीकाकरण टीम के साथ रहेंगे मेडिकल ऑफिसर
परिवार कल्याण के महानिदेशक डॉ. राकेश दुबे का कहना है कि प्रत्येक टीकाकरण में प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन के लिए चिकित्सकों की टीम एलर्ट रहती है। कोराना टीकाकरण में भी टीम के साथ मेडिकल अफसर निगरानी के लिए रहेगा। यदि कोई दिक्कत आती है तो नजदीकी अस्पताल में प्रतिकूल असर के प्रबंधन के लिए तैयार रहेंगे।

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