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Lucknow news- चिकित्सा संस्थानों में संविदा पर नियुक्त होंगे प्रोफेसर

कैबिनेट ने प्रस्ताव को दी मंजूरी, 2.20 लाख रुपये प्रतिमाह दिया जाएगा पारिश्रमिक

राजधानी के चिकित्सा संस्थानों में खाली चल रहे पदों को भरने का रास्ता साफ हो गया है। एसजीपीजीआई, केजीएमयू और लोहिया संस्थान में संविदा पर सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को नियुक्ति दी जाएगी। उन्हें एम्स की तर्ज पर 2.20 लाख रुपये प्रतिमाह पारिश्रमिक दिया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।

राजधानी में चिकित्सा संस्थानों और जिला अस्पताल को मिलाकर कुल करीब 1000 पद खाली हैं। कैंसर संस्थान को छोड़ दें तो सिर्फ तीन संस्थानों में 135 प्रोफेसर के पद रिक्त हैं। अन्य पद असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट और एडिशनल प्रोफेसर के हैं। इन पदों पर राजकीय मेडिकल कॉलेजों और आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज से रिटायर्ड चिकित्सा शिक्षकों को संविदा पर नियुक्त करने का फैसला हुआ है। नियुक्ति 30 जुलाई 2008 को संविदा पर भर्ती के लिए जारी शासनादेश के तहत होगी। प्रस्ताव के मुताबिक संविदा पर चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति प्रयोग के तौर पर अधिकतम पांच साल के लिए होगी। हालांकि उन पदों पर स्थायी नियुक्ति न होने की स्थिति में इनके सेवा को विस्तार देने पर विचार किया जाएगा। संविदा पर नियुक्त होने वाले प्रोफेसरों को उन संस्थानों में नियुक्त नहीं किया जाएगा, जहां वे पहले कार्यरत थे।

सुधरेगी राजधानी की चिकित्सा और शैक्षिक व्यवस्था
तीनों चिकित्सा संस्थानों में संविदा के आधार पर प्रोफेसरों की नियुक्ति किए जाने से चिकित्सा व्यवस्था और शैक्षिक व्यवस्था में सुधार होगा। केजीएमयू में कुल करीब 450 पद खाली हैं। यहां संविदा के आधार पर 200 पदों को भरने की योजना बनाई गई थी। इसमें 80 से ज्यादा पद प्रोफेसर के हैं। इन पदों के भरे जाने से कई विभागों में अतिरिक्त यूनिट तैयार होगी, जिसके जरिए सुपर स्पेशलिटी की सीटों में इजाफा होगा। डीएम और एमसीएच के कोर्स के लिए एमसीआई ने यूनिट पूरी नहीं हो पाने के कारण मान्यता देने से मना कर दिया था। इसी तरह एसजीपीजीआई में करीब 100 पद खाली हैं। संस्थान प्रशासन ऑर्गन ट्रांसप्लांट को लेकर बेहद गंभीर है। ऐसे में यहां करीब 20 प्रोफेसरों की नियुक्ति होने से नए कोर्स शुरू किए जा सकेंगे और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसे प्रोजेक्ट आगे बढ़ेंगे। लोहिया संस्थान में कुल 231 पद खाली हैं, जिसमें प्रोफेसर के 35 पद हैं। यहां भी प्रोफेसरों की संख्या बढ़ने पर पीजी की सीटें के लिए मान्यता मिल सकेगी।
मरीजों को भी फायदा
केजीएमयू और लोहिया संस्थान में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट नहीं हैं। इसी तरह अलग-अलग संस्थानों में कई विभाग संकाय सदस्य नहीं होने की वजह से चल नहीं पा रहे हैं। प्रोफेसरों की नियुक्ति होने से यहां नए कोर्स शुरू होंगे और सुपर स्पेशलिटी के नए डॉक्टर भी तैयार होंगे। बंद विभागों के चालू होने से मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा।
‘अमर उजाला’ ने उठाया था मुद्दा
चिकित्सा संस्थानों में संकाय सदस्यों के पद खाली होने से शैक्षिक गतिविधियों और इलाज प्रभावित होने का मुद्दा ‘अमर उजाला’ ने जोर-शोर से उठाया था। 23 सितंबर को माई सिटी पेज 1 पर ‘केजीएमयू और लोहिया में मधुमेह थायराइड का इलाज ठप’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर बताया था कि ये दोनों विभाग बंद हो चुके हैं। इसी तरह अन्य कई विभागों में भी मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। खबर प्रकाशित होने के बाद सभी संस्थानों में लंबित चल रही भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग में प्रस्ताव भेजा गया। ‘अमर उजाला’ के माई सिटी पेज 1 पर नौ नवंबर को ‘नए साल में राजधानी को मिलेंगे 1000 चिकित्सक’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई। इसमें बताया गया कि सभी चिकित्सा संस्थानों के अलावा जिला स्तरीय अस्पतालों में भी पद खाली हैं। संस्थानों ने चिकित्सा शिक्षा विभाग और अस्पतालों ने महानिदेशक के जरिए स्वास्थ्य विभाग को प्रस्ताव भेजा था।

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