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Lucknow news- चौक, चौपटिया, अमीनाबाद, हो गए सब होरियारों संग…

अभिषेक सहज

लखनऊ।

शहर में घुलने लगे हैं रंग,

उड़े मन जैसे कोई पतंग

चौक, चौपटिया, अमीनाबाद

हो गए सब होरियारों संग…

चढ़ी फागुन की मस्त तरंग

अवध में बजने लगे मृदंग

हो कैसरबाग या हजरतगंज

हर तरफ दिखने लगी उमंग।

चारों तरफ होली की उमंग छा गई है। होरियारों की टोलियां तैयार हैं और तैयार है गंगा-जमुनी सभ्यता में रचा बसा अपना लखनऊ भी। लखनऊ की होली बेहद खास होती है और यहां की होली को देखने का अपना-अपना तरीका भी है। लखनऊ के कवि और साहित्यकारों की नजर में होली को देखने का अपना अलग रंग-ढंग होता है। इस संबंध में हमने लखनऊ के प्रसिद्ध कुछ हास्य-व्यंग्य कवियों से बातचीत कर जाना उनका मन। सभी ने अपने-अपने ढंग में इस बार की होली में भरे हैं अपने हास्य-व्यंग्य के रंग।

पंकज प्रसून

सबसे खतरनाक है कवि सम्मेलन का रद्द हो जाना…

पाश ने कहा था कि सबसे खतरनाक होता है सपनों का मर जाना लेकिन उससे भी ज्यादा खतरनाक होता है कवि सम्मेलन का रद्द हो जाना। हर कवि इस वक्त भकुरा बैठा हुआ है। उसने शृंगार, वीर और हास्य रस की तरह वायरस में भी रस खोज निकाला। एक साल तक तो वह आत्मनिर्भर ही रहा। खुद ही कविता लिखकर को खुद को ही सुनाता रहा। खुद ही ताली बजाता रहा और खुद को ही लिफाफा भी देता रहा। अब वह इस खाली लिफाफे को कब तक स्वयं को समर्पित करता रहेगा। अभी कुछ महीनों ने वह वर्चुअल से एक्चुअल हुआ ही था कि कोरोना की दूसरी लहर आ गई। लेकिन कवि के अंदर उठती कविता की लहर का क्या होगा। नए स्ट्रेन की दहशत है। एक जमाना था जब वीर रस कवि की कविता से दहशत होती थी। आज के हालात यह हैं कि रद्द हुए कार्यक्रमों के पोस्टर कवि अपनी वाल पर लगाकर उस पर आती हुई संवेदनाओं को इकट्ठा कर रहा है। यहां भी एक तरह का वार चल रहा है। मने कि जिसके जितने ज्यादा कवि सम्मेलन रद्द हुए वह उतना ही बड़ा कवि। एक कवि ने अपने रद्द हुए 10 कार्यक्रमों की लिस्ट डाली तो जिनके एक दो कैंसिल हुए थे, वह हीनभावना से ग्रस्त हो गए। फिर उन्होंने डिजाइनर से 15 फर्जी पोस्टर बनाकर डाले तब जाकर उनको सुकून मिला। अंत मे इतना ही कहना है कि एक कवि का कविता लिखना सरोकारी प्रवृत्ति है लेकिन उनको सुना न पाना विनाशकारी साबित हो सकता है। अगर कुछ दिन और कवि सम्मेलन बंद रहे तो मीर और मजाज की जमीन पर शायरी करने वाले उसी जमीन पर चाट और मूंगफली का ठेला लगाए मिलेंगे।

बुरा न मानो होली है…

इस बार इंद्रलोक में भी होली की चर्चा

नारायण-नारायण की रिंगटोन बजाते हुए नारद मुनि लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज लेकर इंद्र देवता के समक्ष प्रकट हुए। नारद मुनि को देखते ही इंद्र देवता उत्सुकतापूर्वक पूछ बैठे, हे नारद मुनि! क्या समाचार लाए हैं। नारद मुनि किसी क्राइम शो के एंकर की तरह सनसनी फैलाते हुए बोले, महाराज! इस समय धरती लोक की स्थिति कुछ अजीब सी हो गई है। होली के मौके पर लोग एक दूसरे से गले मिलने के बजाए सोशल डिस्टेंसिंग कर रहे हैं। जिन्हें रंग लगाने का शौक था वह सैनिटाइजर लगा रहे हैं। धरती लोक पर कोई कोरोना नामक वायरस आया है। जिसने होली के रंग में भंग कर दिया है।

कोरोना वायरस का नाम सुनते ही इंद्र देवता ‘सरप्राइजिंग’ मोड में आकर बोले- हे नारद मुनि! ये कोरोना वायरस किस चिड़िया का नाम है। अब नारद मुनि उनकी दो ‘जीबी’ वाली मेमोरी को चौसठ ‘जीबी’ में कन्वर्ट करते हुए बोले, महाराज! इस कोरोना वायरस को कुछ-कुछ ऐसे समझ लीजिये कि जैसे आपके इंद्रलोक में किसी अमरता प्राप्त राक्षस ने हमला कर दिया हो। हर तरफ त्राहि-त्राहि मची हो। इंद्र देवता चिंतित होकर बोले, ‘तो नारद मुनि इस कोरोना वायरस का धरती लोक के प्राणी कोई इलाज क्यों नहीं ढूंढते।’ नारद मुनि बोले- महाराज! फिकर नॉट, इसका वैक्सीन रूपी कवच आ गया है। अरे जब होली में राम का केसरिया और रहीम का हरा रंग मिलकर उन्माद का वायरस भगा सकता है तो ये कोरोना वायरस क्या बला है। वो भी भाग ही जाएगा।

कोरोना कलर के कवित्त सूर्य कुमार पांडेय के संग

रंग-पिचकारी संग ढेर गिफ्ट के तमाम,

खुद आया करते थे पद के प्रताप से।

महामारी वाली मार, होली में है इस बार,

कोई मिलने न आया, कोरोना के शाप से।

खाक आते उपहार, फीका लगे है त्योहार,

अपना खरीदा, खाया, खर्च किया आप से।

मन-मन में विलाप कर रहे साहब जी,

गुझिया खरीद रहे, खुद स्वीट शॉप से।

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होली मार्केट में है, रेट में बढ़ोतरी है,

टेंट में न धेला, पेट कर रहा सामना।

पापड़ बने हैं लोग, सीली लकड़ी से हाल,

आर्थिक मंदी, कोई धंधा, कोई काम ना।

वर्चुअल होली हम मना रहे इस बार,

कृपा करो होलिका जी, भेजो धन-दाम ना!

गिफ्ट छोड़ो, लिफ्ट कोई देने को तैयार नहीं,

दो गज की दूरी से ही, मिली शुभकामना।

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होली के मुक्तक ‘शलभ’ के व्यंग्य

सरकारी नौकर की होली

न आई यार की चिठ्ठी, न आया यार होली में

रहे बैठे सुबह से शाम तक बेकार होली में

नहीं है रंग ठंडाई, न गुझिया की झलक पाई

पड़ी ऐसी मियां अबकी बजट की मार होली में।

जुआरी की होली

पुलिस से खांमखां हमने करी तकरार होली में

थमा देते उन्हें सौ सौ के पत्ते चार होली में

जुआ खेलन गए पकड़े थे हम पिछली दिवाली में

सुना है वैध है इस बार भ्रष्टाचार होली में।

पत्नीव्रता पति की होली

अगर रूठी है पत्नी तो करो मनुहार होली में

दिलाकर चार छह साड़ी, करो सत्कार होली में

गजब की फागुनी रातें, करो कुछ प्यार की बातें

निरर्थक गा रहे हो क्यों मियां मल्हार होली में।

नेता जी की होली

चुनाव आने से पहले आए थे सरकार होली में

दिखाकर चल दिए सपनों का वो संसार होली में

मगर जनता निराली थी, धरी होंठों पे गाली दी

सड़े अंडों, टमाटर की करी बौछार होली में।

नशेड़ी की होली

रचाया स्वांग तुमने भी, रचाया स्वांग हमने भी

चखी थी भांग हमने भी, चखी थी भांग हमने भी

इसी टुन्ना अवस्था में, पड़े थे कूद छत से हम

थी तोड़ी टांग हमने भी, थी तोड़ी टांग तुमने भी।

कवि की होली

तुम्हारा दिल भी बच्चा है, हमारा दिल भी बच्चा है

तुम्हें शुभकामनाएं दूं, मेरा अरमान सच्चा है

अगर हो फांस दिल में तो निकालें, आज ही दिल से

शलभ इस वास्ते होली का मौका सबसे अच्छा है।

दो व्यस्त दोस्तों की होली

इमोशन प्रूफ़ हो तुम भी, इमोशन प्रूफ हैं हम भी,

बड़े मसरूफ हो तुम भी, बड़े मसरूफ हैं हम भी।

न तुमको फोन की फुर्सत, न मेसेज की हमें आदत,

अजब फन्टूश हो तुम भी, अजब फंटूश हैं हम भी।

इस बार होली में…

इश्क का चढ़ा बुखार, इस बार होली में,

पड़ोसन से कर रहे प्यार, इस बार होली में

गोल हुई गुझिया खोएदार, इस बार होली में

महंगाई की झेलो मार, इस बार होली में।

अबीर-गुलाल की बहार, इस बार होली में

नफरत बन जाएगी प्यार, इस बार होली में।

नेता अगर सुधर जाएं तो

हास्य-व्यंग्य के कवि किधर जाएं

पाकिस्तान-चीन यदि न रहें तो

फिर ओज के कवि किधर जाएं।

– हास्य कवि अनिल बांके

होली के अवसर पर…

होली के अवसर पर, राजनीति की सड़क पर

जा रहे गिरगिट को हमने देखा,

और उत्सुकतावश उससे पूछा

गिरगिट जी, बता सकते हैं

अपने और नेता के बीच आपसी संबंध को

तुलनात्मक रूप से समझा सकते हैं,

गिरगिट मुस्कुराया, बोला-

हमारी नेता से तुलना करना महापाप है

क्योंकि रंग बदलने के मामले में

नेता गिरगिट का बाप है।

– स्माइलमैन सर्वेश अस्थाना पंकज प्रसून सूर्य कुमार पांडेय सर्वेश अस्थाना अनिल बांके। अलंकार रस्तोगी

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