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Lucknow news- छह दिसंबरः अतीत को भूल नई उड़ान के लिए बेकरार रामनगरी, भविष्य के सपने बुन रहे हैं अयोध्यावासी

छह दिसंबर की पूर्व संध्या पर रामनगरी अपनी रौ में दिखी। सर्दी के मौसम में सरयू तट पर भक्तों की भीड़ से घाट गुलजार थे तो जय श्रीराम व जय सरयू मैया का जयघोष वातावरण में आध्यात्मिकता का सृजन कर रहा था। कल-कल सतत बहती सरयू मानो ये संदेश दे रही थी कि अब अतीत को भूलकर रामनगरी नई उड़ान को बेकरार है।

हर सुबह की तरह शनिवार की सुबह भी जहां मंदिरों में रामधुन की गूंज रही तो मस्जिदों की अजान सौहार्द का संदेश दे रही थी। अयोध्या में हर जगह लोग सिर्फ भविष्य के सपनों पर ही चर्चा करते नजर आए, लोगों ने कहा कि अब कैसा विवाद, अब तो नए निर्माण की ओर अयोध्या बढ़ रही है।

सरयू तट पर आचमन कर रहे ज.गु.रामदिनेशाचार्य बोले रामनगरी का बुरा समय अब खत्म हो चुका है अब तो रामनगरी विकास, पर्यटन, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, धार्मिक मूल्यों की नई इबारत गढ़ने के लिए बेकरार है। वह दिन दूर नहीं जब सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि पर्यटन की दृष्टि लेकर भी लोग अयोध्या आएंगे। स्नान कर पूजन कर रहे कानपुर से आए राजेश शर्मा व नीलम शर्मा ने कहा कि अयोध्या में अलग सा उल्लास देखने को मिल रहा है। अब कैसा छह दिसंबर, कैसा बाबरी विध्वंस, ये सब अतीत की बातें हो चुकी हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अगली बार जब अयोध्या आएंगे तो हमें अयोध्या का नया स्वरूप दिखेगा। पास में खड़े नीलकांत द्विवेदी तुरंत बोले भैया सही कह रहे हैं आप, अयोध्या अब बहुत दर्द झेल चुकी है। अब इसे विवाद में नहीं उलझना है।

पंडा राम आधार पांडेय कहते हैं कि राममंदिर का निर्माण शुरू होने से पूरा देश खुश है। अयोध्या में जितने अधिक से अधिक लोग आएंगे उतना ही यहां के लोगों को रोजगार मिलेगा। हां इतना जरूर है सुविधाओं को अब विकसित करने पर जोर देना होगा। भेलसर निवासी उमेश भी सरयू स्नान को पहुंचे थे। कहा कि हम तो आशान्वित हैं कि अब रामनगरी में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और हम सभी की तरक्की का मार्ग प्रशस्त होगा। हनुमानगढ़ी क्षेत्र भी भक्तों से गुलजार था।

हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर भक्तों की लंबी कतार दर्शन-पूजन के लिए बेसब्र नजर आ रही थी। भक्तों की भीड़ ये स्पष्ट कर रही थी कि अब अयोध्या में खौफ व तनाव के लिए कोई जगह नहीं। प्रसाद की दुकान करने वाले अशोक गुप्ता ने कहा कि आज शनिवार है, भक्तों की भीड़ देखकर लगता है कि लोग उत्साह से लबरेज हैं। कहा कि भोर चार बजे से ही प्रसाद की दुकान पर हैं, सुबह दस बजे तक करीब दस हजार भक्तों ने हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन कर लिया है। यहां दर्शन-पूजन का सिलसिला दिनभर जारी रहा।

रामजन्मभूमि क्षेत्र में भक्तों की खासी भीड़ दिखी। अस्थायी मंदिर में पहली बार रामलला का दर्शन करने वाले भक्त तो अत्यंत गदगद नजर आए। बस्ती निवासी 60 वर्षीय रामसुरेश पांडेय बोले कि अस्थायी मंदिर में रामलला का दर्शन कर इतनी खुशी मिली है कि बता नहीं सकते। दिल्ली से आए सुरेश अरोड़ा ने कहा कि अब रामलला के दिन बहुर गए हैं तो अयोध्या के दिन बहुरना लाजिमी है। ये सब रामलला की ही कृपा है। कहा कि अयोध्या छह दिसंबर जैसे विवादित दिन को भूलकर नई शुरूआत करती दिख रही है। यहीं धार्मिक पुस्तक आदि की दुकान करने वाले ध्रुव गुप्ता ने कहा कि पहले छह दिसंबर के एक दिन पहले ही रामकोट इलाका सील कर दिया जाता था, लेकिन इस बार कोई सख्ती नहीं है सब सामान्य है। भक्त भी खूब आए हैं, ये अयोध्या के अच्छे दिन का संकेत है।

कार्यशाला में भक्तों की ज्यादा चहल-पहल नहीं थी। यहां राममंदिर निर्माण की हलचल जरूर दिखी। एलएंडटी की टीम पत्थरों की कोडिंग कर रही थी तो वहीं दूसरी तरफ जो भक्त कार्यशाला पहुंच रहे थे वे राममंदिर निर्माण की प्रगति जानने की इच्छा जता रहे थे। कई भक्त मंदिर की शिलाओं को प्रणाम करते भी नजर आए। कार्यशाला के एक कोने में रखी रामशिलाओं पर शीश नवाते भी भक्त दिखे। सिद्धार्थनगर से आए राजीव त्रिपाठी व उनकी पत्नी उर्मिला ने कहा कि हमें तो याद ही नहीं था कि कल छह दिसंबर है। फिलहाल अब इसे याद रखने की जरूरत भी नहीं है। उन्होंने एलएंडटी के कर्मियों से राममंदिर निर्माण की क्या प्रगति है? ये जानना चाहा तो कर्मियों ने बताया कि शीघ्र ही राममंदिर की नींव खोदाई काम प्रारंभ होने जा रहा है।

बाबरी विध्वंस की पूर्व संध्या पर रामनगरी के मुस्लिम इलाकों में भी कहीं कोई तनाव व खौफ नहीं दिखा। लोग रोज की तरह अपने काम में मशगूल दिखे। मुस्लिम बाहुल्य सुटहटी मोहल्ले में बच्चे खेलकूद में मगन दिखे। यहीं मिले समाजसेेवी इरफान खान उर्फ नन्हें मियां बोले अब विवाद खत्म हो चुका है, सिर्फ भाईचारे की बात करिए। हम हिंदुस्तान में रहते हैं, इसलिए हिंदुस्तान का कानून मानना हम सभी का कर्तव्य है। देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले को मुस्लिमों ने स्वीकार कर लिया है।

अख्तर अली मुखिया ने कहा कि अब कैसा छह दिसंबर, जब मनाते थे तब मनाते थे। अब केवल शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। विवाद से ही अयोध्या आज तक पीछे है, अब अयोध्या को आगे बढ़ना है। एलएलबी के छात्र नवाब बोले हम तो कभी विवाद के हिमायती नहीं रहे। हमें तो रोजगार चाहिए ताकि पढ़ लिखकर हमें बाहर न जाना पड़े। अब शायद ऐसा ही अवसर पैदा होगा पूरी उम्मीद है। टेढ़ीबाजार मोहल्ले में भी मुस्लिम अपने कामों में जुटे नजर आए। आफाक अहमद उर्फ भोलू भाई से बात हुई तो कहा कि छह दिसंबर जैसी घटना अतीत की बात हुई। अगर नई शुरूआत करनी है तो पुरानी बातें भूलनी पड़ती हैं। सरकार ये सुनिश्चित करे कि अयोध्या का युवा अब बाहर नहीं जाएगा।

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