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Lucknow news- जरूरत का भी नहीं मिल रहा पानी नहीं तो क्यों देें टैक्स

जरूरत का भी नहीं मिल रहा पानी नहीं तो क्यों देें टैक्स

बेगम हजरतमहल वार्ड के पार्षद और नगर निगम कार्यकारिणी सदस्य मो. सलीम कहते हैं कि वार्ड में सुबह शाम एक-एक घंटे आपूर्ति होती है जबकि टंकी से दूर वाले इलाकों में आधा घंटा।

कई इलाकों में गंदा पानी आता है। इससे जरूरत भर का पानी भी नहीं मिल पा रहा है। शिकायत के बावजूद सुनवाई नहीं होती है। ऐसे में टैक्स कम किया जाए।

महात्मा गांधी वार्ड के पार्षद अमित चौधरी बताते हैं कि जोनल पंपिंग स्टेशन पहले वीआईपी इलाकों को पानी देते हैं। ऐसे में कई इलाकों को बमुश्किल आधा घंटा पानी मिल पाता है।
इसके चलते सबमर्सिबल लगवाने पड़े। गंदे पानी की शिकायत अक्सर रहती है। जलकल के अधिकारी सुनते नहीं है। ऐसे में टैक्स पूरा क्यों लिया जा रहा है।
जगदीश चंद्र बोस वार्ड के पार्षद और सपा पार्षद दल के नेता यावर हुसैन रेशू बताते हैं कि बहुत शिकायत के बाद आपूर्ति सुधरी है। कंधारी बाजार सहित कई इलाकों में बहुत गंदा पानी आता था।
टंकी के पास वाले इलाकों में तो सुबह-शाम एक-एक घंटा पानी आता है, लेकिन दूर के इलाकों में आधा घंटा से अधिक पानी नहीं आता। ऐसे में टैक्स में छूट देनी चाहिए।
राजधानी की प्यास बुझाने में जलकल फेल साबित हो रहा है। पुराने शहर समेत अन्य इलाकाें में लोगों को जरूरत भर का पानी भी नहीं मिल रहा है।
इससे नाराज स्थानीय निवासियों और पार्षदों का कहना है कि सुबह शाम कम से कम दो-दो घंटे आपूर्ति होनी ही चाहिए नहीं तो टैक्स में भी कटौती होनी चाहिए। ‘जितना पानी उतना टैक्स’ की नीति लागू होनी चाहिए।
जल निगम के पेयजल प्रोजेक्ट मैनेजर जीसी श्रीवास्तव के अनुसार, इस समय शहर की आबादी करीब 35 लाख है। इसके लिए 615 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) पानी की जरूरत है लेकिन, अभी नदियों से महज 400 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है।
पानी की कमी को ट्यूबवेल से पूरा किया जाता है। साथ ही उनका कहना है कि भूगर्भ जलस्तर के तेजी से गिरने के चलते ट्यूबवेल भी ज्यादा सफल नहीं हैं।
ऐसे में नदियों और तालाबों के पानी की ही जरूरत है। इसके लिए सिंचाई विभाग को लगातार पत्र लिखा जा रहा है। पानी की कमी के कारण तीसरे जलकल का विस्तार भी अटका है।
वहां 80 एमएलडी का एक प्लांट और लगाया जाना है। गोमती नगर और इंदिरा के उन इलाकों को भी पानी दिया जाना है, जहां अभी आपूर्ति नहीं हो रही है।
प्रति व्यक्ति रोजाना 150 लीटर पानी देने का नियम
जलकल महाप्रबंधक एसके वर्मा कहते हैं कि मानक के तहत यह माना जाता है कि प्रति व्यक्ति को रोजाना 150 लीटर पानी की जरूरत होती है। इस हिसाब से ही आपूर्ति की जानी चाहिए। इसे लेकर इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड के पार्षद समीर पाल सोनू और पूर्व पार्षद रुद्र प्रताप कहते हैं कि उनके वार्ड में कई इलाके ऐसे हैं, जहां लाइन तो है पर पानी नहीं आता। कई बार शिकायतों के बावजूद मामला सिफर है। जलकल और जल निगम एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल देते हैं।
जलकल का दावा, पानी की कमी नहीं
जलकल महाप्रबंधक एसके वर्मा कहते हैं कि जितने शहर में पानी की पाइप लाइन पड़ी है उस हिसाब से 450 एमएलडी पानी की जरूरत है जबकि उनके तीन जलकलों और ट्यूबवेल को मिलाकर करीब 750 एमएलडी पानी रोज उपलब्ध रहता है। उनका यह भी कहना है कि करीब बीस प्रतिशत पानी लीकेज आदि में बर्बाद हो जाता है। आपूर्ति सिस्टम सही न होने से कुछ इलाकों में आपूर्ति अधिक समय नहीं हो पाती है वहीं, ऐशबाग सहित जलकल से जुड़े कुछ इलाकों में अधिक समय तक आपूर्ति रहती है।

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