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Lucknow news- ट्रेनों के आइसोलेशन कोच पर 60.50 हुए खर्च, नहीं मिले मरीज तो किेए शिफ्ट

कोरोना मरीजों के इलाज के लिए उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने 300 आइसोलेशन कोच तैयार किए। 60.50 लाख रुपये खर्च कर इन्हें इलाज की सुविधाओं से लैस किया गया। लेकिन मरीज नहीं मिले। इसके चलते बोगियों को दूसरे स्टेशनों पर शिफ्ट कर दिया गया है।

मालूम हो कि गत मार्च में कोरोना फैला तो रेलवे बोर्ड ने बोगियों को आइसोलेशन वार्ड बनाने का खाका तैयार किया। रेल मंत्रालय की मुहर लगने के बाद उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने भी आइसोलेशन वार्ड बनाने शुरू किए। उत्तर रेलवे ने 250 कोच तैयार किए। प्रत्येक कोच पर 17800 रुपये खर्च हुए।

जबकि पूर्वोत्तर रेलवे ने पचास कोच बनाए और प्रत्येक पर 32 हजार रुपये खर्च किए। यह वह दौर था, जब लखनऊ में भी तेजी से मरीज बढ़ रहे थे। लेकिन आइसोलेशन बोगियों की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बाद रेलवे ने इन्हें मंडल के दूसरे स्टेशनों पर मरीजों की राहत के लिए रवाना कर दिया। जबकि राजधानी में ये बोगियां दो से तीन महीने तक खड़ी रहीं।

मऊ में ही भर्ती हुए मरीज

उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल द्वारा तैयार किए गए आइसोलेशन कोच का इस्तेमाल नहीं होने से इन्हें दूसरे स्टेशनों पर भेज दिया। इसमें लखनऊ से मऊ भेजे गए आइसोलेशन कोच ही इस्तेमाल में लाए जा सके। डीआरएम ने बताया कि मऊ में मरीजों को भर्ती कराया गया था। इसके बाद अयोध्या में भी कुछ मरीज भर्ती हुए। दूसरे अन्य स्टेशनों पर अभी तक आइसोलेशन कोच का इस्तेमाल नहीं हो सका।

इतना हुआ खर्च
               उत्तर रेलवे         पूर्वोत्तर रेलवे
कोच             250                    50
खर्च     44.50 लाख रुपये     16 लाख रुपये
स्टाफ       10 से 12                10 से 15    

इसलिए खास हैं आइसोलेशन कोच

– आठ केबिन प्रत्येक कोच में बनाए गए 
– चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ के लिए अलग केबिन
– मरीजों के लिए ऑक्सीजन की सुविधा
– हर केबिन के बाहर पारदर्शी प्लास्टिक के पर्दे 
– सूखा, गीला व अपषिष्ट पदार्थों के लिए अलग-अलग डस्टबिन 
– मच्छरों से बचाने के लिए सारी खिड़कियों पर मच्छरदानी
 

…तो इसलिए नहीं मिले मरीज

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बोगियों को आइसोलेशन वार्ड बनाने के बाद उन्हें राजधानी में रखा गया। इसके बाद उत्तर रेलवे के इंडोर अस्पताल को 250 बेड का कोविड केयर सेंटर बना दिया गया। फिर प्रशासन ने हज हाउस को भी केयर सेंटर बना दिया। अस्पतालों से लेकर हज हाउस, रेलवे अस्पतालों में जब एल-1 श्रेणी के मरीजों के लिए बेड खाली थे। इसलिए आइसोलेशन कोच इस्तेमाल में नहीं लाए जा सके।

250 आइसोलेशन कोच बनाए गए हैं। एक कोच पर करीब 17800 रुपये खर्च हुआ। कोच को प्रदेश सरकार को हैंडओवर कर दिया गया था। जब इनका इस्तेमाल लखनऊ में नहीं हुआ तो मऊ, भदोही, अयोध्या, वाराणसी आदि स्टेशनों पर भेज दिया गया। मऊ में कोविड मरीजों को भर्ती भी किया गया था। राज्य सरकार से निर्देश मिलने के बाद ही आइसोलेशन बोगियों को सामान्य कोचों की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। – संजय त्रिपाठी, डीआरएम, उत्तर रेलवे 

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मऊ में ही भर्ती हुए मरीज

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