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Lucknow news- तेजस हुई फेल तो संकट में पड़ जाएगा निजी ट्रेनों का कारवां

लखनऊ। देश की पहली कारपोरेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस का संचालन फिलहाल अगले आदेश तक 23 नवंबर से बंद हो रहा है। तेजस के फेल होने से अधिकारियों के लिए परेशानी बढ़ गई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि तेजस की सफलता पर जिन 150 निजी ट्रेनों का संचालन होना था, वह भी खतरे में पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसा हुआ तो लखनऊ के रास्ते गुजरने वाली 12 प्राइवेट ट्रेनों के पहिये भी शुरू होने से पहले थम जाएंगे। वहीं, आईआरसीटीसी अधिकारियों की दलील है कि यात्रियों की कमी से शताब्दी भी जूझ रही है।

गत वर्ष अक्तूबर में देश की पहली कारपोरेट ट्रेन तेजस का संचालन लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच शुरू किया गया था। इसे चलाने की जिम्मेदारी आईआरसीटीसी को सौंपी गई। इसके तत्कालीन मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक अश्वनी श्रीवास्तव की निगरानी में ट्रेन में विमान सी सुविधाएं दी गईं। पहले महीने में ही मुनाफा कमाने से तेजस की सफलता की संभावनाएं और बढ़ र्गइं। इसी बीच वाराणसी से इंदौर के बीच महाकाल एक्सप्रेस का संचालन आईआरसीटीसी को दे दिया गया। हालांकि, मार्च में कोरोना तेजी से बढ़ा तो रेलवे ने ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया। तेजस के पहिये भी थम गए। इसके बाद अनलॉक में ट्रेनों को दोबारा पटरी पर लाया गया तो तेजस नए कलेवर के साथ लौटी। पहले से ज्यादा सुविधा दी गई। रिजर्वेशन पीरियड घटाकर एक महीना कर दिया गया और यात्रियों को 10 लाख रुपये का मुफ्त बीमा भी दिया गया। डायनेमिक फेयर में अधिकतम किराये भी तय कर दिया गया। बावजूद इसके यात्री न मिलने पर 14 नवंबर को तेजस का संचालन निरस्त कर दिया गया। अब 23 से इसे अगले आदेश तक कैंसिल कर दिया गया है। रेलवे अधिकारियों की मानें तो तेजस के फेल होने पर 150 निजी ट्रेनें चलाने का प्रोजेक्ट भी देरी का शिकार हो सकता है।

शताब्दी की हालत भी बदहाल

आईआरसीटीसी अफसरों की दलील है कि शताब्दी एक्सप्रेस की हालात भी खराब है। तेजस एक्सप्रेस में 18 से 22 नवंबर तक चेयरकार में 45, 239, 296, 261, 140 और एग्जीक्यूटिव क्लास में 4, 15, 21, 19, 13 सीटें खाली हैं। वहीं, शताब्दी के चेयरकार में इन तारीखों पर 317, 671, 667, 565, 412, 699 सीटें रिक्त हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार शताब्दी में लखनऊ से 50% तक सीटें त्योहार से पहले तक खाली रहती हैं।
12 निजी ट्रेनें मिलनी हैं लखनऊ को
रेलवे बोर्ड ने देशभर में 150 निजी ट्रेनें चलाने का खाका तैयार किया था। कोरोना के चलते योजना सुस्त पड़ गई। इनमें से 12 निजी ट्रेनें राजधानी के खाते में आने की संभावनाएं थीं। इसमें एक ट्रेन लखनऊ से मुंबई के बीच सीधी चल रही थी। बाकी लखनऊ के रास्ते हावड़ा रूट और उत्तर भारत के राज्यों के बीच चलनी थी।

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