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Lucknow news- दादरी को देश का लॉजिस्टिक हब बनाएगी योगी सरकार, बोराकी और वाराणसी में भी बन रहा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब

दादरी और इसके आसपास के क्षेत्र को योगी सरकार देश के लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित करने की कवायद में जुटी है। इसके लिए दादरी, बोराकी (ग्रेटर नोएडा) और वाराणसी में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक (ट्रांसपोर्ट) हब की स्थापना की जा रही है। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की बाधाओं को भी सरकार तेजी से दूर करने का प्रयास कर रही है। योगी सरकार की यह मुहिम ब्रांड यूपी को देश-दुनिया के बाजार में पहचान दिलाने में काफी कारगर साबित होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नीति आयोग की बैठक में भी इस पर चर्चा कर चुके हैं।

शासन के अधिकारियों के मुताबिक लैंड लॉक्ड (बंदरगाह का न होना) होना यूपी की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा रही है। सरकार का मानना है कि एक्सप्रेस-वे, हवाई अड्डे और लॉजिस्टिक हब के जरिए ही लैंड लॉक को तोड़ा जा सकता है। इसके टूटने पर ब्रांड यूपी के उत्पाद भी देश-दुनिया मे तेजी से सुरक्षित पहुंच सकेंगे। देश ही नहीं दुनिया के बाजार जब पहुंच में होंगे तो ब्रांड यूपी को भी अलग पहचान मिलेगी। यही वजह है कि यह काम योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रहा है। सरकार के चार साल के प्रयास को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले कुछ वर्षों में लैंड लॉक्ड का यह अभिशाप टूट सकता है। सरकार इसके लिए एक्सप्रेस-वे, एयर कनेक्टिविटी और फ्रे ट कॉरीडोर को जरिया बना रही है। बीते करीब चार वर्षों में इन सेक्टर्स पर युद्ध स्तर पर काम शुरू हुआ है। अगले साल के बजट में भी इन सभी सेक्टर्स का पूरा ध्यान रखा गया है।

प्रदेश में होगा 1789 किमी एक्सप्रेस-वे का संजाल

340 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का लगभग 80 फीसदी काम पूरा हो गया है। इस साल इसके पूरा हो जाने की संभावना है। इसी तरह 296 किलोमीटर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर भी तेजी से काम हो रहा है। अगले साल इसके भी पूरा होने की उम्मीद है। मेरठ को प्रयागराज से जोड़ने वाले 592 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण योगी सरकार की प्राथमिकताओं में है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे पर भी सरकार का फोकस है। सभी एक्सप्रेसवेज के बन जाने पर इनकी कुल लंबाई करीब 1789 किमी होगी। संभवत: इतने बड़े एक्सप्रेस-वे के संजाल वाला यूपी देश का इकलौता राज्य होगा।

एयर कनेक्टिविटीपर भी जोर

सुरक्षित, सुखद और तेजी से एक से दूसरी जगह आवागमन के लिए एयर कनेक्टिविटी पर सरकार का खास जोर है। अधिकारियों का कहना है ये भी लैंड लाक्ड तोड़ने में खासा मददगार होगा। मौजूदा समय में प्रदेश में लखनऊ, आगरा, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, हिंडन और कानपुर के हवाई अड्डे क्त्रिस्याशील हैं। बरेली एयरपोर्ट भी चालू हो गया है। अलीगढ़, आजमगढ़, श्रावस्ती, मुरादाबाद एयरपोर्ट का काम तकरीबन पूरा है। यहां से उड़ानों को शुरू करने के लिए सिर्फ  लाइसेंस की जरूरत है। इसके अलावा चित्रकूट और सोनभद्र में एयरपोर्ट निर्माण का काम चल रहा है।

सहारनपुर, झांसी, मेरठ और ललितपुर में भूमि लेने की प्रक्त्रिस्या जारी है। कुशीनगर के इंटरनेशनल एयरपोर्ट को डीजीसीए का लाइसेंस मिल गया है। जल्द ही वहां से उड़ानें शुरू होने की संभावना है। जेवर में एशिया के सबसे बड़े और 6 रनवे वाले ग्रीनफील्ड एयपोर्ट पर भी काम जारी है। इसी तरह अयोध्या में भी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के नाम से बनने वाले इंटरनेशल एयरपोर्ट का काम भी तेजी से आगे बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण ने अयोध्या में एटीआर-72 विमानों के संचालन के लिए 250 करोड़ रुपये दिए हैं।

प्रदेश के विकास का गेट-वे बनेंगे योगी सरकार के ये काम
योगी सरकार द्वारा कराए जा रहे ये सारे काम आने वाले समय में यूपी के विकास का गेट-वे बनेंगे। इन कामों से यूपी में सप्लाई चेन का मिसिंग लिंक पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उप्र देश ही नहीं पूरी दुनिया से बेहतरीन तरीके से जुड़ जाएगा। लैंड लॉक्ड टूटने से प्रदेश के बाजार के दरवाजे दुनिया के लिए खुल जाएंगे। व्यवसाय के कई विकल्प खुलेंगे। इससे सिर्फ  यूपी के व्यापारी ही बाहर माल ही नहीं बेचेंगे बल्कि पूरी दुनिया के व्यापारी यहां आएंगे।

ओडीओपी के जरिए ब्रांड यूपी से वाकिफ  होगी पूरी दुनिया
अधिकारियों की मानें तो सरकार के  इन कदमों से छुपी हुई प्रतिभाएं और हुनर बाहर निकलेगा। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) को भी नई उड़ान मिलेगी। उत्पादों को गन्तव्य तक पहुंचाने में समय और संसाधनों की बचत होगी। बंदरगाहों तक शीघ्र एवं सुरक्षित माल पंहुचेगा जिससे पेरिसेबिल (शीघ्र नष्ट होने वाले समान) उत्पादों को न्यूनतम क्षति होगी। ऐसा होने पर देश के बंदरगाह यूपी की भी ताकत और हिस्सा बन जाएंगे। विश्व भर के सप्लाई चेन बाजार के खिलाड़ी इन सुविधाओं का उपयोग यूपी समेत भारत से माल खरीदने और बेचने में करेंगे। इससे सिर्फ  इस्पात, पेट्रोलियम उत्पाद, लौह अयस्क, सीमेंट, खाद, और खाद्यान्न का निर्यात तो होगा ही, किसानों के साथ कारीगरों को भी विश्वबाजार और एक नया विजन मिलेगा। इससे उद्यमशीलता को भी बढ़ावा मिलेगा।

एयर कनेक्टिविटीपर भी जोर

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