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Lucknow news- प्लेनेट लेडीज क्लब : संदेहों को परे रख अपनी लड़ाई खुद लड़ें महिलाएं

लखनऊ। हर महिला को अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। अपने संदेहों को परे रखना होगा। जानकारी और आत्मविश्वास से भरे इन शब्दों के साथ शुरू हुआ प्लेनेट लेडीज क्लब का संवाद। गोमती नगर स्थित पार्श्वनाथ प्लेनेट परिसर में शनिवार को आयोजित संवाद में मुख्य अतिथि थीं डीसीपी महिला अपराध और सुरक्षा रुचिता चौधरी। उन्होंने भेदभाव खत्म करने के लिए बेटों में भी ना सुनने की आदत डालने को कहा। इसके अलावा लीगल एक्टिविस्ट शुभांगी सिंह ने कानूनी मदद के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

रानी बेटी के पैदा होने पर पूरी खुशी मनाइए

डीसीपी ने कहा कि महिला दिवस लंबे वक्त से मनाया जा रहा, मगर आज भी जागरूकता की ही बातें की जा रही हैं। दरअसल भेदभाव की नींव रखने की दोषी कहीं ना कहीं महिला ही हैं। राजा बेटे के होने का जश्न तो मनाया जाता है, पर अभी भी रानी बेटी के होने की खुशी कुछ-कुछ अधूरी सी लगती है। अब जरूरी है कि हर मां बेटियों को ना सुनना सीखने को ना कहें बल्कि बेटों को ना सुनने की आदत डालें।

इज्जत के लिहाफ के नाम पर घरेलू हिंसा सहना बंद करें

लीगल एक्टिविस्ट शुभांगी ने घरेलू हिंसा कानून के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अक्सर महिलाएं इज्जत का लिहाफ ओढ़े रहती हैं और घरेलू हिंसा सहती रहती हैं। उन्होंने कहा कि कानून तो है पर सबकुछ सह रही महिला को हिम्मत दिखानी होगी।

जीवन की जरूरत रोटी- कपड़ा और मकान से कहीं ज्यादा

संवाद के दौरान शुभांगी सिंह ने लोगों से पूछा- हमारी बुनियादी जरूरतें क्या हैं? प्लेनेट लेडीज क्लब की सदस्यों का जवाब एकदम अलग तरीके से सामने आया। एक ने कहा कि शिक्षा, किसी ने कहा साफ -सुथरा माहौल, किसी ने बेहतर पर्यावरण की जरूरत बताई। एक सदस्य का कहना था कि निजता भी हमारी एक बुनियादी जरूरत का हिस्सा है। सदस्यों का कहना था कि रोटी-कपड़ा और मकान जरूरी है, पर सिर्फ यही बुनियादी जरूरत नहीं है।

अकेली फोटो और लोकेशन को सोशल मीडिया पर ना डालें

साइबर क्राइम से जुड़े एक सवाल पर डीसीपी ने कहा कि सोशल मीडिया पर अकेली फोटो कतई ना डालें, लोकेशन अपडेट ना करें। बात करने की सीमाएं ध्यान रखें। सोशल मीडिया पर भावनाओं में ना बहें।

इन्होंने पूछे सवाल, डीसीपी ने दिए जवाब

प्रियंका जौहरी ने पूछा- विभूतिखंड में एक पिंक बूथ की जरूरत है, क्या यहां बन सकता है?

डीसीपी ने इंस्पेक्टर शारदा चौधरी को जगह और अन्य जरूरी चीजों को जांचने को कहा है।

श्रेया ने पूछा- ट्रांसजेंडरों की मदद कैसे की जा सकती है।

कानून सभी के लिए है, सभी की मदद की जाती है और उन्हें भी न्याय मिलता है।

मुनमुन मेहरोत्रा ने पूछा कि रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद फॉलोअप के लिए क्या करें?

डीसीपी ने कहा कि आपको एक बार थाने तक आना चाहिए, कुछ लिखा पढ़ी की जरूरत होती है। हां, यदि कोई दुर्व्यवहार करे तो हमें बताइए।

इस दौरान इनकी भी सहभागिता रही

प्लेनेट क्लब की अध्यक्ष शिवानी सिंह, सचिव रितिका सिंह वर्मा, संस्कृति सचिव सीमा सिंह, सदस्य मामली मुखर्जी, उषा, ज्योति गुप्ता, विनीता, सीमा आजाद, कंचन देवरा, सुनीता धूपिया और लेडीज क्लब की अन्य सदस्य और बच्चे। पार्श्वनाथ प्लेनेट गोमतीनगर में प्लेनेट लेडीज क्लब के संवाद कार्यक्रम में डीसीपी महिला अपराध र?

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