Home लखनऊ Lucknow news- बिना कनेक्शन जलकर भी नहीं, निर्णायक लड़ाई की तैयारी

Lucknow news- बिना कनेक्शन जलकर भी नहीं, निर्णायक लड़ाई की तैयारी

नियम में संशोधन के लिए नगर निगम सदन में लाया जाएगा प्रस्ताव

प्रवेंद्र गुप्ता

राजधानी में ऐसे हजारों लोग हैं जो न तो जलकल के पानी का उपयोग करते हैं और न ही सीवर लाइन का। फिर भी नियमों की बाध्यता ऐसी है कि उन्हें इसका बिल भरना पड़ रहा है। अब इसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई की रूपरेखा तैयार की जा रही है। नगर निगम के पार्षद और कार्यकारिणी सदस्य मांग कर रहे हैं कि जिसके घर में जलकल के पानी का कनेक्शन है, उसी से वाटर टैक्स लिया जाए। कई दलों के पार्षद इस नियम में बदलाव के लिए नगर निगम सदन में प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं। वहीं जलकल के अधिकारी कहते हैं कि नियमानुसार यदि किसी घर से 100 मीटर के दायरे में सीवर या पानी की लाइन है तो भी उस भवन स्वामी को सीवर और वाटर टैक्स देना होगा।

शासन नहीं माना तो न्यायालय होगा रास्ता
नगर निगम अधिनियम के जानकार छह बार के पार्षद और मौजूदा नगर निगम कार्यकारिणी के सदस्य नागेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि पहले नगर निगम सदन में प्रस्ताव पास होगा। उसके बाद अधिनियम में संशोधन के लिए उसे शासन को भेजा जाएगा, क्योंकि अधिनियम में संशोधन शासन ही कर सकता है। शासन प्रस्ताव को मानकर संशोधन कर देगा तो ठीक। अगर नहीं करेगा तो फिर न्यायालय का रास्ता है। इसको लेकर विचार भी चल रहा है, यदि शासन नहीं मानेगा तो न्यायालय जाएंगे।
तीस करोड़ से अधिक का लगेगा झटका
जलकल विभाग अभी करीब साढ़े चार लाख कनेक्शनों ने सालाना करीब 160 करोड़ रुपयेे जलकर और सीवर कर लेता है। जलकल विभाग के महाप्रबंधक एसके वर्मा के मुताबिक इनमें करीब 20 प्रतिशत ऐसे भवन शामिल हैं, जिनमें पानी का कनेक्शन नहीं है। फिर भी उनसे वाटर टैक्स लिया जाता है। ऐसे में यह साफ है कि यदि नियम में बदलाव हुआ तो जलकल विभाग को सालाना 30 करोड़ से अधिक का झटका लगेेगा।
कार्यकारिणी में रखेंगे मुद्दा
जिनके यहां पानी-सीवर का कनेक्शन नहीं है, उनसे न्यूनतम टैक्स लिया जाना चाहिए। यह बड़ी समस्या है, क्योंकि अधिनियम में जहां पर हाउस टैक्स लगा है, वहां पर वाटर टैक्स भी लिए जाने का प्रावधान है। ऐसे में इस बारे में कार्यकारिणी में प्रस्ताव लाकर विचार किया जाएगा।
– रजनीश गुप्ता, उपाध्यक्ष, नगर निगम कार्यकारिणी
जब सुविधा नहीं तो किस बात का टैक्स
जो लोग सरकारी पानी और सीवर लाइन का उपयोग नहीं कर रहे हैं, उनसे वाटर और सीवर टैक्स नहीं लिया जाना चाहिए। जब अधिनियम बना था तब शहर में आबादी कम थी और सुविधाएं ज्यादा थीं। ऐसे में लोग सुविधा ले रहे थे और टैक्स देना सही था। मगर जब लोगों ने पैसा खर्च कर खुद सीवर टैंक बनवाया और पानी का इंतजाम किया तो फिर टैक्स क्यों लिया जा रहा है। यह पुुरानी व्यवस्था बदली जानी चाहिए।
– यावर हुसैन रेशू, नेता सपा पार्षद दल
बदला जाए टैक्स का नियम
जिस नियम की आड़ लेकर टैक्स लिया जा रहा है, वह पचास साल पहले बना था। तब और अबकी स्थितियों में बहुत पर्क है। शहर बढ़ रहा है, मगर उस हिसाब से सुविधाएं नहीं बढ़ी हैं। मालवीय नगर की शीतल विहार कॉलोनी के सैकड़ों लोग इस समस्या से परेशान हैं। उनका मसला भी सदन में उठाया था, तब टैक्स माफ करने की बात भी हुई थी। मगर अब तक नहीं किया गया। सदन में प्रस्ताव लाएंगे कि जो पानी का उपयोग करे, उसी से टैक्स लिया जाए।
– ममता चौधरी, नेता, कांग्रेस पार्षद दल
जहां सीवर-वाटर लाइन है, वहां लगेेगा टैक्स
अधिनियम के तहत वाटर और सीवर टैक्स लिया जाता है। नियम है कि यदि किसी घर से 100 मीटर के दायरे में सीवर या पानी की लाइन है तो उस भवनस्वामी को सीवर और वाटर टैक्स देना होगा। जलकल विभाग अपने स्तर से इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकता है। बिना कनेक्शन टैक्स न लिया जाए, इसके लिए अधिनियम में संशोधन करना होगा और यह काम शासन स्तर पर होगा।
– एसके वर्मा, महाप्रबंधक, जलकल

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